बात-बात पर बच्चों को डांटना है गलत

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आपका बच्चा गलती करता है तो क्या बात-बात पर बच्चों को डांटना,  मारना और दूसरों के सामने उसकी बेइज्जती करना क्या ठीक है?  नहीं …बिल्कुल नहीं।

क्योंकि ऐसा करने से बच्चा एक पल तो आपकी बात मान लेता है, लेकिन मन ही मन आपके प्रति गुस्सा पनपता है जो बच्चे और आपके लिए घातक भी हो सकता है। मामला और भी पेचीदा हो सकता है, जब दो बच्चों की परवरिश साथ करनी हो। ऐसे में नए जमाने के चाइल्ड साइकालाॅजी आधारित पेरेंटिंग टिप्स की आपको दरकार है।

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– एक बच्चे का फेवर न करें। आमतौर पर पैरेंट्स दो बच्चों में एक बच्चे की साइड ज्यादा लेते हैं। ध्यान रहे कि अगर बच्चे लड़ रहे हैं, तो कभी भी एक की साइड न लें। दोनों को बराबर समझाएं।

ये बातें भी समझें

– उनकी प्राइवेसी की रिसपेक्ट करें। अगर आप बच्चे से यह कहते हैं कि वह आपके रूम में समान के साथ छेड़छाड़ न किया करें, तो आप भी उनके रूम के लिए इतनी ही प्राइवेसी बनाकर चलें। उनको यह महसूस कराएं कि एक बार वे अपने कमरे से निकल गए, तो उनके पीछे कोई भी उनकी चीेजें व अलमारी चेक नहीं करेगा।

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– बच्चें की बातों को कभी भी हल्के में न लें। बच्चा अगर आपसे कुछ कहता है, तो उसे ध्यान से सुनें। कई बार ऐसा भी होता है कि वह कुछ ऐसा सवाल आपसे पूछते हंै कि आप सुनकर हैरान हो जाते हैं। ऐसे में उसे डांटने या फिर कुछ भी उल्टा-पूल्टा जवाब न दें। उससे डिस्कस करें और उसे उसके सवाल का सटीक जवाब दें।

-हर बच्चा चाहता है कि उसकी भी परिवार में कोई अहमियत हो। इसके लिए वह नई-नई चीजें ट्राई करता रहता है और चाहता है कि कोई बताए कि वह सही कर रहा है या नहीं। अगर बच्चा कुछ नया सीखना चाहता है , तो उसे प्रोत्साहित करें।

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– बच्चों के साथ धैर्य से पेश आएं। इसके लिए आपको समय व एनर्जी की जरूरत होगी। अगर आप दिक्कतों से गुजर रहे हैं और छोटी-छोटी बातों पर बच्चे पर गुस्सा होते हैं। ऐसे में बच्चे को नहीं आपको संभलना होगा। आपका ऐसा व्यवहार बच्चे को आपसे दूर भी कर सकता है। ऐसे समय में बच्चों के साथ बाहर घूमने निकल जाएं।

– बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाएं। इससे बच्चे रूटीन लाइफ के आदी बनें रहेंगे।

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– कई माता-पिता समझते हैं कि तुलना करने से उनके बच्चे भी वही कार्य करने लगेंगे। लेकिन ऐसा सोचना गलत हैं। बच्चे की तुलना कभी भी दूसरे बच्चे से ना करें। इससे बच्चे में हीन भावना घर कर जाती हैं, जो उसके संपूर्ण विकास के लिए नेगेटिव होगी।

– बच्चे के सामने पार्टनर या किसी से भी झगड़ा न करें। ऐसा करने से बच्चा खुद को असुरक्षित समझेगा। याद रखें कि प्यार और नफरत की भाषा बच्चे भी समझते हैं।