Wrestler Sushil Kumar, दंगल से अपराध की दुनिया तक , तिरंगे से कोर्ट कचहरी तक

सुशील कुमार। हमारी शान । हमारा मान । तिरंगे के साथ ओलम्पिक का विजेता चेहरा । बहुत से युवा प्रेरित हुए होंगे जैसे सागर धनखड़ हुआ और सुशील कुमार को अपना आदर्श मान कर पहुंचा उसी के छत्रसाल अखाड़े में ।

खतरे की घंटी सुनाई देने लगी

सीखते सीखते कदम दर कदम बढ़ा पदक की ओर । बस यहीं सुशील कुमार को खतरे की घंटी सुनाई देने लगी । वैसी ही घंटी जो नरसिंह यादव की ओर से मिली थी । पिछली बार । ओलम्पिक न जा पाया । क्वालिफाइ न कर पाया और फिर अपराध की दुनिया में कदम रख दिया । नरसिंह यादव के साथ कानूनी लड़ाई और फिर खाने में क्या मिलाया और किसने मिलाया? पर डोप टेस्ट में यादव बाहर । न सुशील खेल पाया , न नरसिंह ।

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अब फिर ओलम्पिक और फिर खतरा

इस बार अपने ही शिष्य सागर पर उसी छत्रसाल स्टेडियम में जानलेवा हमले का आरोप और फिर तीन सप्ताह तक फरार रहा सुशील कुमार। जिसका चेहरा तिरंगे के साथ देख कर गर्व होता था , आज उसका चेहरा एक चिथड़े में लिपटा देखकर शर्म आई कि हमारे हीरो का यह विलेन रूप भी देखना बाकी था ?

कहानियां भी निकल निकल कर आ रही हैं


बहुत कहानियां आ रही हैं निकल कर । जैसे कभी सुशील की सफलता की कहानियां आती थीं , वैसे ही इस खलनायक बन जाने की कहानियां भी निकल निकल कर आ रही हैं । कहीं टोल प्लाजा की लूट तो कहीं पत्नी के नाम पर लिये फ्लैट के किराये की बात । सागर उसी की पत्नी के नाम के फ्लैट में रहता था किराये पर ।

Investigation : https://indianexpress.com/article/cities/delhi/olympic-medalist-sushil-kumar-arrested-by-delhi-police-in-murder-case-7326525/

जान ही ले ली

सुशील का आरोप कि दो माह का किराया नहीं दिया था सागर ने और बदमाश भी कहा था । बस । इतनी बड़ी सज़ा दे दी ? जान ही ले ली अपने शिष्य की ? सुशील यदि तुम्हारे गुरु तुम्हें न सिखाते और तुम्हारे ओलम्पिक विजेता होने पर ईर्ष्यालु हो जाते तो तुम कहां होते आज ? धोनी पर युवराज के पिता ने कितने आरोप लगाये लेकिन धोनी कूल कैप्टन बने रहे और वही युवराज कैंसर से लड़ने के बाद टीम में वापसी कर पाया । कपिल देव ने विश्व कप जीता तो सचिन ने सपना देखा कि मैं भी विश्व विजयी टीम का हिस्सा बनूंगा और सपना पूरा किया ।

बहुत बड़ा कलंक का टीका


यह तो आगे से आगे स्थान देना होता है । हर समय हम हीरो नहीं होते लेकिन दूसरों को हीरो बनने की प्रेरणा जरूर देते हैं और बनते हैं । हीरो आते जाते रहते हैं लेकिन हम विलेन तो नहीं बन जाते ? बहुत बड़ा कलंक का टीका लगा लिया अपने माथे पर सुशील। साबित हो या न हो लेकिन इस षड्यंत्र के पीछे तुम्हारा हाथ होना ही बहुत बड़ा कलंक है । इसे कोई गंगा धो नहीं पायेगी।

लेखक – कमलेश भारतीय, वरिष्ठ पत्रकार