औरतें बेवफाई के लिए क्यों हो जाती हैं मजबूर, जानिए यह है सच

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यूं कोई बेवफा नहीं होता

उम्र में अन्तर होना

औरतें बेवफाई के लिए क्यों मजबूर होती हैं? दरअसल भारतीय समाज में पति अपनी पत्नी से पांच से लेकर पंद्रह साल तक बड़ा होता है. किसी भी लड़की की शादी समान उम्र के लड़के से न करना एक बहुत बड़ी समस्या है. उम्र के इस फासले के चलते लड़की अपने मन की बात, ख्वाहिश या विचार पति से शेयर नहीं पाती. इस हिचकिचाहट के चलते सेक्स सम्बन्ध बनाते वक्त पति को तो संतुष्टि मिल जाती है, लेकिन स्त्री को नहीं मिलती और यही वजह उसे अन्य किसी हमउम्र लड़के की ओर आकर्षित करती है.

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आमतौर पर देखा गया है कि यदि पति उम्र में पत्नी से छोटा है तो वहां स्त्री सेक्स सम्बन्धों में काफी खुश रहती है क्योंकि वहां उसे अपनी बात रखने में कोई हिचकिचाहट नहीं होती और वह अपनी ख्वाहिशों को खुल कर पति के सामने प्रकट कर देती है. ऐसे में दोनों के बीच किसी तीसरे के आने की कोई सम्भावना नहीं होती है.

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पैसे की भूख

हर औरत चाहती है कि उसका पति अच्छी कमाई करे और उसे जेवर-कपड़े से लाद दे. भारतीय समाज में ‘दिखावे’ की परम्परा ने अधिकांश घरों को बर्बाद किया है. ऐसे में जब औरत की अपनी जरूरतें या घरेलू जरूरतें पति की कमाई से पूरी नहीं होती हैं तो पैसे चाह में महिलाएं किसी अमीर शख्स से नाजायज सम्बन्ध बनाने के लिए तैयार हो जाती हैं. पति द्वारा उनकी इच्छाएं पूरी न कर पाना, कम आय की वजह से ऐशोआराम की जिन्दगी न मिल पाना, बच्चों की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी न हो पाना किसी महिलाएं को अन्य पुरुष से सम्बन्ध बनाने को मजबूर करती है.

आपसी मतभेद

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हर पति-पत्नी में लड़ाई होती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा लड़ाई रिश्ते को खराब करने में अहम भूमिका निभाती है. एक दूसरे की भावनाओं को न समझ पाना कई बार बड़े झगड़े का कारण बन जाता है और आपसी रिश्ते खराब होने लगते हैं. आपसी मन मुटाव में एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश में सम्बन्ध इतने बिगड़ जाते हैं कि दोनों एक बिस्तर पर होते हुए भी शारीरिक सम्बन्धों से दूर हो जाते हैं. यदि दोनों की आपस में बिल्कुल नहीं बनती है तो ऐसी हालत में पुरुष ही नहीं, महिलाएं भी इस कमी को बाहर पूरी करती हैं. इससे उनके अहम् को भी संतुष्टि मिलती है और शरीर को भी सुख मिलता है.

पति का पास न रहना

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Happy Couple Sitting On Couch

कई बार पति के साथ नहीं होने के कारण महिला अकेलापन महसूस करती हैं. कई बार पार्टनर काम के सिलसिले में देश से बाहर होते हैं. मुस्लिम परिवारों में अधिकतर पुरुष अरब देशों में कमाने चले जाते हैं. वे छह महीने या साल में पन्द्रह दिन या एक महीने की छुट्टी पर ही पत्नी के पास वापस आते हैं, ऐसे में अकेलेपन को दूर करने के लिए महिलाएं बाहर सहारा ढूंढती हैं या परिवार के अन्य मर्दों से सम्बन्ध बना लेती हैं. जिन लोगों की जॉब में टूरिंग ज्यादा होती है, उनकी पत्नियां भी पर-पुरुष से सम्बन्ध बना लेती हैं. वहीं पति भी टूर के दौरान बाहरी महिलाओं से रिश्ता जोड़ लेते हैं, आखिर सति-सावित्री या पत्नीव्रता बन कर शारीरिक जरूरतों को कब तक नजरअंदाज किया जा सकता है?

वैचारिक मतभेद

कई बार पुरुष-स्त्री के विचारों में मतभेद होता है. यह मतभेद धार्मिक विचारों में भी हो सकता है और सामाजिक व घरेलू परिस्थितियों के कारण भी हो सकता है. मान लीजिए कोई स्त्री कलात्मक प्रवृत्ति की है, उसे ड्रॉइंग, पेंटिंग, गाने या नाचने का शौक है, मगर उसके पति को यह सब पसन्द नहीं है अथवा उसके ससुराल में इन चीजों पर पाबन्दी है, तो यह बातें उसके अन्दर कुंठा पैदा करती हैं. ऐसे में वह एक ऐसे साथी को ढूंढने लगती है जो उसकी कला की कद्र करे. ऐसा पुरुष उसे भावनात्मक रूप से संतुष्टि प्रदान करता है, तो वह भी उस पर अपना सबकुछ वार देती है. धार्मिक विचारों में मतभेद होने पर भी ऐसी ही स्थिति पैदा होती है.

पत्नी के माता-पिता का अपमान या अनदेखी

रिश्तों में दरार का सबसे बड़ा कारण है बात-बात पर पत्नी को अपमानित करना। उसके माता-पिता, सगे संबंधी या भाई-बहन के लिये भद्दे और गंदे शब्दों का इस्तेमाल करना। देखा गया है कि जब पुरुष अपनी पत्नी के घरवालों के प्रति सज्जनता या अपनत्व नहीं दिखाता है, या उसके मायके जाने पर प्रतिबन्ध लगाता है, अथवा उसके मायके वालों को उलटा-सीधा बोलता है, तो यह बातें भी वैचारिक कुंठाएं, घृणा और दूरी पैदा करती हैं। अब यह बहुत मुमकिन है कि मजबूरन स्त्री एक ऐसे साथी की तलाश करने लगती है, जो उसको मानसिक और भावनात्मक स्तर पर सहारा दे. एक बार किसी बाहरी पुरुष से भावनात्मक नजदीकी पैदा हो गयी, तो शारीरिक रूप से करीब आने में देर नहीं लगती.

पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव

आजकल महानगरों में जिस तरह लोगों के पास पैसा बढ़ रहा है, आमोद-प्रमोद के साधन, शराब, ड्रग्स का का चलन भी उसी तेजी से बढ़ रहा है. आये-दिन पार्टियां, नाइट क्लब, डिस्को थेक जैसी चीजों ने मौके उपलब्ध कराये हैं कि पुरुष और स्त्री खुल कर अपनी इच्छाओं को पूरा कर सकें. इन इच्छाओं में सेक्स प्रमुख है. कई बार ऐसे रिश्ते औफिस में प्रमोशन या बिजनेस में बड़े फायदे पहुंचाने लगते हैं. कभी-कभी पुरुष अपनी पत्नियों को अपने बिजनेस पार्टनरों से सम्बन्ध बनाने के लिए खुद ही मजबूर करते हैं, तो कई बार वाइफ स्वैपिंग के जरिये अतिरिक्त आनन्द प्राप्त करने की कोशिशें होती हैं. आर्थिक फायदे के लिए अपनी स्त्री को पराये मर्द को सौंपने की कहानियां भारत के ग्रामीण अंचलों से लेकर महानगरों तक खूब सुनायी देती हैं.

गर्भ निरोधक चीजों का बढ़ता इस्तेमाल

पहले जहां गर्भ ठहरने के डर से औरत किसी गैरमर्द से शारीरिक सम्बन्ध बनाने से हिचकती थी, वहीं अब गर्भ निरोधक गोलियों ने यह हिचक दूर कर दी है. ऐसे इंजेक्शन भी आ गये हैं जिन्हें छह महीने में एक बार लगवा लो, तो गर्भ ठहरने का कोई डर नहीं होता है. वहीं पुरुषों में कंडोम के इस्तेमाल ने उन्हें घर से बाहर शारीरिक सम्बन्ध कायम करने को आसान बना दिया है. कंडोम का इस्तेमाल इस डर को भी खत्म कर देता है कि पराई स्त्री से सम्बन्ध स्वास्थ्य की दृष्टि सुरक्षित नहीं है. अब उन्हें एड्स या यौनजनित रोगों का भय नहीं होता है.

पति का किसी और से अफेयर

कई बार पति का अफेयर शादी से पहले या बाद में किसी और महिला के साथ होता है, जिसकी वजह से वह अपनी पत्नी को कभी दिल से स्वीकार नहीं कर पाता है. ऐसे में महिला खुद को टूटा हुआ या छला हुआ महसूस करती है. पति से बदला लेने की भावना उसे पराये मर्द से सम्बन्ध बनाने के लिए उकसाती है. जिस व्यक्ति से भी उसे प्यार पाने की उम्मीद होती है वह उसके साथ शारीरिक रिश्ता जोड़ लेती है.