आखिर क्यों छिन गया रावत से ताज और अब किसके सिर पर सजेगा उत्तराखंड का ताज

Rawat resigns

उत्तराखंड के सीएम पद से त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस्तीफा दे दिया है, आखिर क्यों छिन गया रावत से ताज? दो दिन पहले वे दिल्ली में शाह से मिले थे। आज मीडिया के पूछे जाने पर वे कारण नहीं बता पाये लेकिन दर्द झलककर सामने आ गया और रावत ने कह दिया कि -मैने इस्तीफा क्यों दिया, यह जानने के लिये आपको दिल्ली जाना पड़ेगा। साफ है कि हाईकमान के आदेश पर रावत का इस्तीफा हुआ है , लेकिन क्यों और आखिर वे कौन से कारण थे जिनकी बदौलत रावत को कुर्सी गंवानी पड़ी। आईए आपको विस्तार से बताते हैं…

प्रदेश बीजेपी की अंदरूनी कलह बनी कारण

भाजपा के कई विधायक और मंत्री रावत से नाराज चल रहे थे जिसके कारण उनकी कुर्सी पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। पार्टी के पर्यवेक्षकों ने भी अपनी रिपोर्ट में सीएम बदलने की बात कही थी। ऐसे में पार्टी आलाकमान ने अपने फैसले से रावत को अवगत करवा दिया था।

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छिन गया रावत से ताज, 4 साल भी पूरे नहीं कर पाये

उत्तराखंड में भाजपा की सरकार को 18 मार्च को चार साल पूरे होने वाले हैं। इससे चंद दिन पहले ही राज्य के मुख्यमंत्री पद से त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस्तीफा दे दिया है। सीएम के खिलाफ पिछले कुछ समय से पार्टी और विधानमंडल दल में बगावत जैसा संकट गहरा रहा था। इसे भांपते हुए बीजेपी ने पर्यवेक्षक के तौर पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और दुष्यंत कुमार गौतम को सभी की राय जानने के लिए देहरादून भेजा। इन दोनों नेताओं ने सभी विधायकों के साथ बैठक करने के बाद अपनी रिपोर्ट आलाकमान को सौंपी।

पर्यवेक्षक के सामने बीजेपी विधायकों का क्या था कहना

trivendra rawat

केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ देहरादून में हुई बातचीत में बीजेपी विधायकों ने दो टूक कहा कि यदि त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा जाता है तो पार्टी को जीत मिलना मुश्किल है। इसके बाद पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट में सीएम को बदले जाने की बात कही। इसके बाद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने रावत को कुर्सी छोड़ने का आदेश दिया। राज्य के नए मुख्यमंत्री के लिए कल सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक होगी। जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगने की पूरी संभावना है। इसके बाद जल्द ही राज्य के नए मुख्यमंत्री को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी।

छिन गया रावत से ताज, पर्यवेक्षक जुटा रहे थे आंकड़े, विधायकों का नाराजगी ने ले ली कुर्सी

दरअसल, केंद्रीय पर्यवेक्षकों द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को अचानक सोमवार को दिल्ली तलब किया था। रावत ने दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, बीएल संतोष और राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी से मुलाकात की थी। हालांकि सोमवार को बीजेपी विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने सीएम बदलने की अटकलों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि सीएम रावत को पार्टी का पूरा समर्थन प्राप्त है। लेकिन रावत के देहरादून पहुंचते ही सियासी घटनाक्रम काफी तेजी से बदला और उन्होंने राजभवन जाकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

कल उत्तराखंड का नया सरताज तय हो जाएगा, लेकिन क्या 2022 की वेतरणी बीजेपी उसके सहारे पार लगा पाएगी, यह बड़ा सवाल है, वहीं कांग्रेस बीजेपी पर हमलावर है।