Why is the Panjshir Valley invincible? 3 हज़ार मीटर ऊंची पहाड़ियां करती हैं सुरक्षा का काम

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Why is the Panjshir Valley invincible?-पंजशीर घाटी में तालिबानी लड़ाके गेट के बाहर ही खड़े हैं। नॉदर्न एलाएंस के सैनिक उन्हें अंदर नहीं घुसने दे रहे। तालिबान के लिये यह घाटी अजेय रही है। इसके बारे में एक दिलचस्प कहानी कही जाती है। सबसे पहले बात करते हैं कि घाटी का नाम के बारे में। कहा जाता है कि 10वीं शताब्दी में, पांच भाई बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने में कामयाब रहे थे। उन्होंने गजनी के सुल्तान महमूद के लिए एक बांध बनाया। इसी के बाद से इसे पंजशीर घाटी कहा जाता है। लंबी, गहरी और धूल भरी यह घाटी राजधानी काबुल के उत्तर में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व तक करीब 120 किमी में फैली है। इसके चारों ओर घाटी के तल से करीब 3000 मीटर ऊंची पहाड़ों की चोटियां हैं। ये बर्फीले, ऊंचे और दुर्गम रास्तों वाले पहाड़ वहां रहने वालों के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करते हैं।

Why is the Panjshir Valley invincible? यहीं से आया था तैमूर और सिकंदर

panjshir valley
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रिपोर्ट के मुताबिक पंजशीर घाटी ( Panjshir valley) में केवल एक संकरी सड़क है जो बड़े चट्टानों और घुमावदार पंजशीर नदी के बीच अपना रास्ता बनाकर निकलती है। यह महज एक घाटी नहीं है, यहां कम से कम और 21 उप-घाटियां आपस में एक-दूसरे से जुड़ी मिलती हैं। इतिहास में भी पंजशीर घाटी की गजब भूमिका है। मुख्य घाटी के एक छोर पर एक लंबी पगडंडी है जो अंजुमन दर्रे तक जाती है, वह आगे पूर्व में हिंदूकुश के पहाड़ों में पहुंच जाती है। सिकंदर और तैमूरलंग की सेनाएं, दोनों इसी रास्ते से गुजरी थीं।
तालिबान की हार के बाद 2001 में पंजशीर घाटी को एक प्रांत का दर्जा दे दिया गया। पंजशीर घाटी में 1.5 से 2 लाख लोग रहते हैं। यहां के अधिकांश लोग ‘दारी’ भाषा बोलते हैं। ताजिक मूल की यह भाषा अफगानिस्तान की मुख्य भाषाओं में से एक है। माना जा रहा है कि वर्तमान समय में पंजशीर घाटी में हथियारों का बहुत बड़ा भंडार भी है। ये हथियार पुराने तालिबान के समय के भी हैं।

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Why is the Panjshir Valley invincible?

पुराने विद्रोही नेता अहमद शाह मसूद के बेटे 32 साल के अहमद मसूद पंजशीर घाटी में तालिबान विरोधी बल का नेतृत्व कर रहे हैं। अहमद मसूद के पिता अहमद शाह मसूद को ‘पंजशीर का शेर’ कहकर बुलाया जाता था। दिलचस्प बात ये भी है कि 1978 में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ अफगानिस्तान के सत्ता में आने और उसके एक साल बाद सोवियत रूस की सेना के प्रवेश के बाद अहमद शाह मसूद के चलते ही पंजशीर घाटी कम्युनिस्ट विरोधी ‘प्रतिरोध का केंद्र’ बन गई थी। 1980 और 1985 के बीच सोवियत संघ ने पंजशीर घाटी पर कम से कम आधा दर्जन हमले किए थे। लेकिन रूसी लड़ाकों को इलाके का बहुत कम अनुभव था और वे अपने ही जाल में फंस गए थे।

2001 में की गई थी पंजशीर के शेर की हत्या


अहमद शाह मसूद की हत्या 2001 में 9/11 की घटना के दो दिन पहले 9 सितंबर को अलकायदा के आतंकियों ने कर दी थी। अहमद मसूद तब 12 साल के ही थे जब उनके पिता की मौत हुई थी। अहमद मसूद ने लंदन में अध्ययन किया है और सैंडहर्स्ट में रॉयल मिलिट्री एकेडमी में एक साल तक प्रशिक्षण भी लिया है। अब अहमद मसूद ही पंजशीर में झंडा बुलंद किए हुए हैं। हाल ही में अहमद मसूद की तरफ से कहा गया है कि वो काबुल प्रशासन का हिस्सा तब ही बनेंगे जब एक समावेशी सरकार को लेकर समझौता होगा। हालांकि अभी तक तालिबान से कोई समझौता नहीं हुआ है और बातचीत जारी है।

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Why is the Panjshir Valley invincible?

फिलहाल अहमद मसूद की अगुवाई में नॉर्दर्न एलायंस ने तालिबान को पंजशीर के बाहर ही रोक रखा है। अहमद मसूद अभी पंजशीर वैली में ही मौजूद हैं और उनके साथ पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह भी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्तमान में पंजशीर वैली के आस-पास की सड़कों पर अहमद मसूद के लड़ाके मौजूद हैं। इस गुट में वैसे लड़ाके शामिल हैं जो सैनिक और पूर्व जेहादी कमांडर रह चुके हैं। इस गुट ने साफ किया है कि उन्हें तालिबान की गुलामी मंजूर नहीं और वो समावेशी सिस्टम चाहते हैं। इनका कहना है कि अगर तालिबान जंग चाहेगा तो जंग भी लड़ी जाएगी लेकिन पंजशीर घाटी पर तालिबान का कब्जा नहीं होने दिया जाएगा।