कहां रखा है हैदराबाद के आखिरी निज़ाम का खज़ाना …

nizam_jewellery1
nizam_jewellery1

कहां रखा है हैदराबाद ( HYDERABAD) के निजाम का शाही खज़ाना? यह सवाल कई लोगों के मन को कचोटता है। निज़ाम अपने शाही खजाने के लिए जाने जाते रहे हैं। हैदराबाद के आखिरी निजाम का खजाना आरबीआई ( RBI) के एक वॉल्ट में बंद है। इस खजाने को केवल दो बार ही प्रदर्शनी के लिए रखा गया है। एक बार 2001 और फिर 2006 में निजाम की जूलरी को सालार जंग म्यूजियम ( SALAR JUNG MUSIUM) में कुछ समय के लिए रखा गया था। आखिरी निजाम के वंशज हिमायत अली मिर्जा ( HIMAYAT ALI MIRZA) ने मांग की है कि निजाम के खजाने को रिजर्व बैंक की वॉल्ट से निकाल म्यूजियम में रखा जाए। देखें, क्या है खास खजाने में…

क्या है खजाना?173 दुर्लभ आभूषण, जिनमें से कुछ 184 कैरेट के बिना कटे जैकब डायमंड हैं। इनमें से कुछ दुनिया के 5 सबसे बड़े हीरे से निकले हैं। इस खजाने को लेकर लड़ाई काफी पहले से जारी है।

कहां रखा है जैकब डायमंड …

dimond
dimond

जैकब डायमंड यह निजाम के खजाने का सबसे कीमती गहना है। इसे छठवें निजाम महबूब अली खान ने शिमला के एक हीरा व्यापारी से खरीदा था। उस समय निजाम ने इसे 23 लाख में खरीदा था। अब इस कीमत 400 करोड़ रुपए के आसपास लगाई जा रही है। https://www.indiamoods.com/hyderabad-nizams-unique-hobbies-and-stories-of-autocratic-rule/

nizam wealth
nizam wealth

सबसे पहले जूलरी की कस्टडी निजाम के जूलरी ट्रस्ट को दी गई थी। ट्रस्ट ने 51 दावेदारों की लिस्ट बनाई थी। ऐसा कहा जाता है कि ट्रस्ट इस जूलरी को फंड बढ़ाने के लिए इंटरनैशनल मार्केट में बेचना चाहता था। मामले के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद फैसला सरकार के हक में आया और जूलरी को राष्ट्रीय विरासत माना गया।

कहां रखा है हीरे का पेपरवेट

nizam auction
nizam auction

निजाम पेपरवेट के रूप में एक बेशकीमती हीरे का इस्तेमाल करते थे। निजाम की मौत के बाद उनके बेटे उस्मान अली खान को निजाम के जूतों में करोड़ों की कीमत वाले हीरे मिले थे।

खज़ाने की कीमत

Diamonds-Nizam-jewel-Hyderabad
Diamonds-Nizam-jewel-Hyderabad

1970 में जब ट्रस्ट इस खजाने को बेचना चाहता था तब इसकी कीमत 10 हजार करोड़ आंकी गई थी। भारत सरकार ने खजाने को ट्रस्ट से 1995 में 218 करोड़ रुपए में खरीदा। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस खजाने की कीमत अब 50 हजार करोड़ को पार कर चुकी है।

कोर्ट ने दिया निज़ाम को झटका

Mir_osman_ali_khan
Mir_osman_ali_khan

कोर्ट ने 70 साल पुराने इस केस में पाकिस्तान को झटका देते हुए साफ तौर पर कहा कि इस रकम पर भारत और निजाम के उत्तराधिकारियों का हक है। निजाम के वंशज प्रिंस मुकर्रम जाह और उनके छोटे भाई मुफ्फखम जाह इस मुकदमे में भारत सरकार के साथ थे। देश के विभाजन के दौरान हैदराबाद के 7वें निजाम मीर उस्मान अली खान ने लंदन स्थित नेटवेस्ट बैंक में 1,007,940 पाउंड (करीब 8 करोड़ 87 लाख रुपये) जमा कराए थे।

3 अरब 8 करोड़ 40 लाख की रकम का किस्सा

All-that-glitters-lead-29-may
All-that-glitters-lead-29-may

यह रकम बढ़कर करीब 35 मिलियन पाउंड (करीब 3 अरब 8 करोड़ 40 लाख रुपये) हो चुकी है। इस भारी रकम पर दोनों ही देश अपना हक जताते रहे हैं। लंदन के रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस के जज मार्कस स्मिथ ने अपने फैसले में कहा कि हैदराबाद के 7वें निजाम उस्मान अली खान इस फंड के मालिक थे और फिर उनके बाद उनके वंशज और भारत, इस फंड के दावेदार हैं। बता दें कि हैदराबाद के तत्कालीन निजाम ने 1948 में ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त को ये रकम भेजी थी।