जाने कहां गुम हुई संगीत की मिठास

old is gold

संगीत की मिठास जाने कहां गुम हो गई है। वो गाने जो आद भी हर दिल अजीज़ हैं, वह गाने जो हमने बचपन में सुने, हमारे बच्चे भी पसंद कर रहे हैं या हमारी पिछली पीढ़ी के भी फेवरेट थे, वह कहां गुम हो गए हैं। कहां खो गया वह मधुर संगीत जो कानों मं मिश्री घोलता था। जहां न तो एंस्ट्रूमेंटस का शोर था और न हीं बहुत तेज़ धूम धड़ाका। गूंजती थी तो केवल मधुर आवाज़, लाइट सा म्यूज़िक, पार्टी हो या फंक्शन। देशभक्ति हो या भजन, हर तरह का संगीत कर्णप्रिय था। अब म्यूज़िक की वह मस्ती और मादकता जाने कहां गुम हो गये।

क्या कहते हैं संगीतकार

हिट फिल्मों के संगीतकार-इधर ए.आर.रहमान ,प्रीतम ,विशाल शेखर ,सलीम- सुलेमान ,हिमेश रेशमिया साजिद-वाजिद , शंकर-एहशान-लॉय कहते हैं कि वे वही परोसते हैं जो दर्शकों और श्रोताओं को पसंद आता है। ऐसे में राम लक्ष्मण ,आनंद-मिलिंद ,रवींद्र जैन ,बप्पी लाहिडी ,उत्तम सिंह ,दिलीप सेन समीर सेन ,उषा खन्ना ,कुलदीप सिंह ,इस्माइल दरबार ,जतिन-ललित आदि कई संगीतकारों की याद अक्सर शिद्दत से आती है। क्योंकि इनमें से ज्यादातर संगीतकार एकदम शांत नहीं बैठे है। आनंद-मिलिंद से लेकर बुजुर्ग संगीतकार कुलदीप सिंह तक बराबर सक्रिय है। बस,फिल्मों ने उन्हें भुला दिया है। उनसे संगीत तैयार नहीं करवाया जाता।

गायकों की कमी भी खलती है

फिल्मी गायकी में एक शून्यता साफ नजर आती है। गीता दत्त , हेमंत कुमार, तलत महमूद ,मुकेश ,लता मंगेशकर ,आशा भोसले,किशोर ,रफी ,मन्ना डे ,महेंद्र कपूर , जगजीत सिंह के गाने आज भी युवा पसंद करते हैं। इन्हीं के कई रिमिक्स गाने अभी भी हिट हो रहे हैं। लेकिन मुश्किल यह ह कि इन महान गायकों की परंपरा में कोई नया नाम जुड़ता नजर नहीं आ रहा है।

हाशिये पर ये कलाकार

बीच में भूपेंद्र , हरिहरन , एस.पी. बाल सुब्रमण्यम, यशुदास ,कविता कृष्णमूर्ति ,सुरेश वाडकर ,शैलेंद्र सिंह ,साधना सरगम , अनुराधा पौडवाल, अलका यागनिक उदित नारायण,कुमार शानू आदि कई प्रतिभाशाली गायक कलाकार सामने आये और उन्होंने अच्छा काम भी किया ,मगर नये दौर के संगीतकारों की राजनीति ने धीरे-धीरे इन्हें हाशिए में धकेल दिया। इनमें सोनू निगम मंझे हुए कलाकार बनकर उभरे हैं लेकिन उन्हें भी फिल्मों में कम ही गाने को मिलता है।

क्या कहते हैं संगीत प्रेमी

संगीत प्रेमी मानते है कि सहज धुन में पिरोये गये दिल की भावनाओं को छू लेनेवाले गाने न के बराबर आ रहे है। प्रसिद्ध शायर जावेद अख्तर जो फिल्मों के लिए कई सार्थक गीत लिख चुके हैं , वे कहते हैं कि गाने वही आज भी पसलंद किये जाते हैं जिनमें संगीत की मिठास बची है।