क्या था पोलो ऑपरेशन, जानें हैदराबाद-दक्कन रियासत की बातें

nizam sons
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क्या था पोलो ऑपरेशन..जानें..विलय से पहले अकेले हैदराबाद रियासत का क्षेत्रफल था 82 हज़ार 698 वर्ग मील. 1893 में प्रकाशित सर रोपर लेथब्रिज़ की पुस्तक, ‘द गोल्डन बुक ऑफ इंडिया’ में जानकारी मिली कि आसिफ जाही डायनेस्टी की जड़ें तुर्की में थी। सेंट्रल एशिया में सूफी संत शिहाबुद्दीन सोहरावर्दी इन्हीं के पूर्वजों में से एक थे। आबिद ख़ान इनके आदि पुरुष थे, जो समरकंद होते हुए 17वीं सदी में हिन्दुस्तान आये थे।

दक्कन में प्रभाव जमाये रखने के लिए औरंगज़ेब ने आबिद ख़ान का इस्तेमाल किया था। 1714 में मुग़ल बादशाह फारूखस्यार ने आबिद ख़ान की चौथी पीढ़ी आसफ जाह को हैदराबाद-दक्कन का पहला निज़ाम नियुक्त किया।

nizam wife
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1769 में हैदराबाद निज़ाम की राजधानी बनी

1769 में हैदराबाद निज़ाम की राजधानी बनी। उससे पहले ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक समझौते के तहत मछलीपट्टम समेत आंध्र के तटीय इलाके पर अपना आधिपत्य जमा लिया था। 1798 तक सिकंदराबाद अंग्रेजों के हाथों में था। उसकी रक्षा के वास्ते ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी निज़ाम से रकम वसूलने लगी। 1941 में जो जनगणना हुई, उस समय हैदराबाद-दक्कन रियासत की आबादी थी 1 करोड़ 63 लाख 40 हज़ार।

क्या था पोलो ऑपरेशन-40 % जागीरदार मुसलमान थे

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उस आबादी में हिंदुओं की संख्या थी 85 प्रतिशत। बावज़ूद इसके, रियासत की सेना और पुलिस में मुसलमान अफसरों की संख्या 1765 थी और 421 हिंदू अफसर थे। 121 अफसरों में ईसाई, सिख, पारसी सभी शामिल थे। सबसे टाॅप लेवल पर 59 मुस्लिम, 5 हिंदू और 38 दूसरे धर्मों के अफसरान तैनात थे। लगभग सारे कोतवाल, कमिश्नर मुसलमान थे।

India-won-Hyderabad-Nizam-case-against-Pakistan
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हैदराबाद रियासत की अपनी टेली कम्युनिकेशंस, पोस्टल सेवा, रेल, करेंसी, ब्राडकाॅस्टिंग सर्विस तक थी। निज़ाम ने जिन जागीरदारों को ज़मीनें दे रखी थीं, उनमें 40 फीसद मुसलमान थे। रियासत की सालाना आय नौ करोड़ से ऊपर थी।

क्या था ऑपरेशन पोलो -जब 565 रजवाड़ों में से मात्र तीन बचे

mahboob ali pasha
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निज़ामशाही का सूर्य सामान्य प्रकिया से अस्त नहीं हुआ था। 1947 में देश आज़ाद होने के आगे-पीछे 565 रजवाड़ों में से मात्र तीन थे, जो न भारत में मिलना चाहते थे, न पाकिस्तान में। ये तीन थे गुजरात का जूनागढ़, कश्मीर, और हैदराबाद।

सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान क्या चाहते थे

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सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान ने बाकायदा हैदराबाद को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया, जिसे भारत सरकार ने स्वीकार करने से मना कर दिया था। हैदराबाद को हासिल करने के लिए सरकार ने ‘ऑपरेशन पोलो’ नामक एक ऑपरेशन तैयार किया। उन दिनों पोलो के खेल के वास्ते यह रियासत प्रसिद्ध थी।

Mahboo Regelia
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खेल के मैदान भी सैकड़ों की संख्या में थे। उसे ध्यान में रखकर इस सैन्य अभियान का नाम ‘ऑपरेशन पोलो’ रखा गया। केंद्र सरकार के प्रशिक्षित सैनिकों को इस रियासत पर कब्ज़ा करने में सिर्फ पांच दिन लगे थे। हैदराबाद निज़ाम की सेना के अलावा उस समय दो लाख की संख्या में रज़ाकार इस रियासत में थे। इस ऑपरेशन से पहले हुए दंगों में इन रजाकारों द्वारा सितम की कहानियां भी चर्चा में थी।https://www.indiamoods.com/hyderabad-nizams-unique-hobbies-and-stories-of-autocratic-rule/

AsafJahVIII-Dürrühshehvar
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पंडित नेहरू के समय इसकी जांच के लिए ‘सुंदरलाल कमेटी’ बनी थी। 2014 में ‘सुंदरलाल कमेटी’ की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, जिसमें पता चला कि ‘ऑपरेशन पोलो’ में 30 से 40 हज़ार जानें गई थीं। कुछ जानकार मरने वालों की संख्या दो लाख तक बताते हैं।

हैदराबाद रियासत के जो भी निज़ाम फौत हुए, समय-समय पर सभी को चारमीनार के पास मक्का मस्जिद में दफन किया गया, सिवा आखि़री निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान के, जिनकी मृत्यु 24 फरवरी 1967 को हुई। मीर उस्मान अली ख़ान को उनकी इच्छा के अनुरूप हैदराबाद के किंग कोठी पैलेस की जुदी मस्जि़द में उनकी मां की कब्र की बगल में दफन किया गया!https://www.indiamoods.com/where-is-the-treasure-of-the-last-nizam-of-hyderabad/