एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम क्या है? जानें चमकी बुखार के लक्षण, उपचार

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एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (चमकी बुखार) शरीर के नर्वस सिस्टम पर सीधा असर करता है. तेज बुखार के साथ इसकी शुरुआत होती है. इसके बाद यह बुखार शरीर के न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर असर करता है जिससे शरीर में छटपटाहट और मानसिक असंतुलन तक की स्थिति बन जाती है। यह बीमारी अमूमन मानसून के समय (जून से अक्टूबर) के महीने में ही होती है। हालांकि, अप्रैल और जून के महीने में भी इसे देखा गया है।

कैसे होता है एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम

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एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (चमकी बुखार) वायरस, बैक्टेरिया, फंगी जैसी चीजों से हो सकता है। यह सबसे ज्यादा जापानी इंसेफ्लाइटिस वायरस से होता है। हालांकि, एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (चमकी बुखार) डेंगू, निपाह वायरस, जीका वायरस, स्क्रब टाइफस जैसे वायरसों से भी होता है।

ये हैं कारण

एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (चमकी बुखार) तेज गर्मी और कुपोषण की समस्या वाले बच्चों में तेजी से फैलता है। डॉक्टरों की माने तो यह बीमारी जून से अक्टूबर के बीच देखने को मिलती है।
-शुरुआत तेज बुखार से होती है
-फिर शरीर में ऐंठन महसूस होती है
-इसके बाद शरीर के तंत्रिका संबंधी कार्यों में रुकावट आने लगती है
-मानसिक भटकाव महसूस होता है
-बच्चा बेहोश हो जाता है
-दौरे पड़ने लगते हैं
-घबराहट महसूस होती है
-कुछ केस में तो पीड़ित व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है
-अगर समय पर इलाज न मिले तो पीड़ित की मौत हो जाती है।

कारण क्या हैं

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डॉक्टर्स इस बुखार के कारणों का पूरी तरह से पता नहीं लगा पाये हैं। इसे लेकर तरह-तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
सावधानी
चमकी बुखार के कारणों का ही ठीक से पता नहीं है तो ऐसे में इससे बचाव का कोई सटीक उपाय भी नहीं है। हालांकि, कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए।
-बच्चे को धूप और गर्मी से बचाकर रखें। पोषक आहार खिलाएं और शरीर में पानी की कमी न होने दें।
-खाली पेट लीची या दूसरे कटे हुए या सड़े हुए फल बिल्कुल न खाएं। अगर सुबह उठकर बच्चे को चक्कर आएं या कमजोरी महसूस हो तो उसे तुरंत ग्लूकोज या चीनी घोलकर पिला दें।
-किसी भी तरह के बुखार या अन्य बीमारी को नजरअंदाज न करें। बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।