जारी रखिये सेहत की कदमताल/ Walk For life


ज़िन्दगी की भागमभाग में सेहत की संभाल कहीं पीछे छूट गयी है । ऐसे में निर्धारित दिनचर्या के अनुसार कसरत करना और खानपान का संयम रखना सबके लिए मुमकिन नहीं । कई सारी जिम्मेदारियां हैं जो ऐसे तयशुदा नियमों के आड़े आती हैं । नतीजा ये होता है कि सेहत खराब होती जाती है । इन हालातों में एक उपाय है जो कई समस्याओं से बचा सकता है । वो है पैदल चलना। ज़रूरी है कि प्राकृतिक तरीकों पर फिर से गौर करें, थोड़ी देर के लिये ही सही, गाड़ी की सवारी को दरकिनार करें, और सेहत के साथ कदमताल करें। नतीजतन सेहत तो सुधरेगी ही, मुफ्त में मिलेंगे उम्र के कुछ और साल, जो शायद कोई बड़ा डॉक्टर या हेल्थ एक्सपर्ट भी न दिला पाये।

 


बढ़ता तनाव, भागदौड़, काम के तयशुदा घंटे न होना, कम वेतन, घरेलू कलह जाने कितनी समस्याएं हैं जिनसे हमारी हर पीढ़ी हर वक्त दो -चार होती रहती है। क्योंकि हमारा आज का लाइफस्टाइल कुछ ऐसा है इसीलिये कम उम्र में ही कई स्वास्थ्य समस्याएं घेरने लगी हैं ।  आज की जद्दोज़हद में खुद को बीमारियों से बचाना है तो पैदल चलना बेहद ज़रूरी है । तेज़ रफ्तार जिंदगी ने गाड़ी पकड़ ली है और पैदल चलने की आदत ही छूट गयी है ।

इम्यून सिस्टम सुधरेगा

पैदल चलना यानी शारीरिक रूप से सक्रिय रहना। सक्रिय रहने से ना केवल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है बल्कि सर्दी जुकाम जैसी बीमारियों का खतरा तो 50 फीसदी तक कम हो जाता है | इतना ही नहीं आज के तनाव भरे जीवन में मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल सबसे अहम है । हफ्ते में दो घंटे पैदल चलने से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा 30 फीसदी कम हो जाता है । दिमागी सेहत के लिए इतना मुफीद होने बावजूद आजकल सभी पैदल चलने से कतराते हैं । सुबह-शाम की नियमित सैर करने से शरीर सक्रिय और मन प्रफुल्लित रहता है। नतीजतन बीमारियों की गिरफ्त में आने की आशंका कम होती है । पैदल चलने से कई तरह के टॉक्सीन बाहर निकलते हैं । विशषज्ञ मानते हैं कि एक अकेले सैर करने से ही कसरत के 90 फीसदी फायदे मिल जाते हैं। डिप्रेशन व चिड़चिड़ापन कम होता है। अध्ययन बताते हैं कि जो महिलाएं नियमित सैर करती हैं उनमें कोलेन कैंसर की आशंका व्यायाम या सैर न करने वाली महिलाओं की तुलना में 31 प्रतिशत कम हो जाती है। इसीलिए कहा जाता है कि पैदल चलने का कोई विकल्प नहीं । अवसाद और तनाव पर विजय पाने का सबसे सरल तरीक़ा है वॉकिंग । जो हमें कुदरत के भी करीब लाता है । नियमित सैर करने से सकारात्मक भावनाओं का संचार होता है । जो हमारी सीधे सीधे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है ।

नहीं सताएगा हड्डियों का रोग

आज के दौर में हड्डियां कमज़ोर होना, गठिया या अर्थराइटिस जैसी समस्याएं होना तो बहुत आम हो गया है। कारण है कि हम न तो हवा में वक्त बिताते हैं और न ही धूप में शरीर को तपाते हैं। ऐसे में जब हम सैर पर निकलेंगे तो पैदल चलने से  न केवल स्फूर्ति आएगी बल्कि शरीर की हड्डियों को मजबूती भी मिलेगी। हेल्थ विशेषज्ञों की माने तो  हफ्ते में चार घंटे चलने से हिप फ्रैक्चर का खतरा 43 प्रतिशत कम हो जाता है । इतना ही नहीं हड्डियों और मांसपेशियों में तकलीफ होने पर भी पैदल चलना एक कारगर उपाय है। बॉडी के जॉइंट्स जाम नहीं होते । जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है और शरीर की कार्यप्रणाली में भी सुधार होता है । वजन कंट्रोल में रहता है।

दिमाग को तेज़ बनाती है सैर 

जब भी कुछ कदम चलने का मौका मिले उसे टालें नहीं । हो सके तो सुबह या शाम की सैर के लिए समय ज़रूर निकालें । क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि हफ्ते में तीन बार 40-40 मिनट की चहलकदमी से दिमाग तेज़ होता है और यादाश्त बढ़ती है । इसीलिए शरीर और मन दोनों को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए चलना ज़रूरी है । खासकर सुबह की सैर सबसे अच्छी होती है क्योंकि उस समय पैदल चलने वाले ताज़ी हवा में सांस लेते हैं । जो मानसिक तनाव कम करने और शरीर को फिट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । यह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से यादाश्त को बढ़ाता है । एक शोध के अनुसार जो लोग नियमित रूप से पैदल चलते हैं उनमें बढ़ती उम्र के साथ याददाश्त कम होने और नींद ना आने जैसी समस्याओं की आशंका कम हो जाती है। साथ ही कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर पर काबू पाने में भी मदद मिलती है। पैदल चलना वाकई पूरी तरह कायाकल्प कर सकता है। वाकिंग करते समय खुली हवा में साँस लेने से शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है, जो मस्तिष्क की सोचने और विश्लेषण करने की क्षमता बढ़ाती है। इसमें कोई शक ही नहीं कि शारीरिक सक्रियता से दिमाग़ भी सक्रिय रहता है । जो हमारी बौद्धिक क्षमता को बनाये रखने में अहम भूमिका निभाता है । आज के दौर में शारीरिक श्रम की कमी ने हमें जाने अनजाने कई बीमारियों का शिकार बना दिया है । ऐसे में हर दिन पैदल चलना सक्रिय रहने का सबसे आसान तरीका है । जिसके अनगिनत लाभ भी मिलते हैं । अमेरिका के पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक हर सप्ताह औसतन 8 किलोमीटर आराम से पैदल चलने या खुली हवा में रहने वाले लोगों की मस्तिष्क की कोशिकाओं का जीवनकाल लंबा होता है । जिसके चलते उनकी याददाश्त लंबे समय तक बनी रहती है।

नहीं घेरेगा तनाव

वॉक करने के कई फायदे हम सुनते हैं, इंटरनेट पर अक्सर पढ़ते हैं। किसी भी बीमारी के लिये डॉक्टर के पास जाएं तो उनसे यह सलाह भी लेते हैं, लेकिन क्या प्रैक्टिकल रूप से हम उसे अपनाते हैं? नहीं न? क्योंकि हम इसके अप्रत्यक्ष फायदों से अनजान होते हैं। सैर करने से प्रत्यक्ष रूप से या अपरोक्ष रूप से हमारी याद्दाश्त बढ़ती है। यकीन नहीं आता तो हमारी पुरानी पीढ़ी की देख लें, जिन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा पड़ाव पैदल चलने और प्रकृति के करीब रहने में गुज़ारा हो और वे आज भी फिट दिखते हैं। ऐसा इसलिये क्योंकि सैर करने या पैदल चलने का असर केवल शरीर पर ही नहीं बल्कि मन पर भी पड़ता है । शोध बताते हैं कि दिन में 30 मिनिट की कदमताल से डिप्रेशन का खतरा 36 फीसदी नीचे आ जाता है । आज के भागमभाग भरे समय में हर कोई तनाव और अवसाद से जूझ रहा है । ऐसे में कुछ कदम चलना अगर तनाव से मुक्ति दिलाये तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है ? पैदल चलने से शरीर की भीतरी और बाहरी नकारात्मकता का खात्मा होता है । यानि तन और मन दोनों को स्वस्थ रखता है वाकिंग । विशेषज्ञ मानते भी हैं कि स्वस्थ एवं तनावरहित रहने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को रोज कुल मिलाकर कम से कम 30 मिनट तेज गति से टहलना ही चाहिए। तो फिर चलें सुबह की सैर पर……

 

NIROSHA SINGH ( BASED ON CONVERSATION WITH OUR HEALTH EXPERTS)

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