अपने ही गांव जाने के लिए हरियाणा से पहले जाना पड़ता है यूपी

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  • यमुना किनारे बसा हरियाणा का अंतिम गांव घोड़ों पिपली

अपने ही गांव जाने के लिये हरियाणा के एक गांव के लोगों को पहले यूपी जाना पड़ता है। हरियाणा-उत्तर प्रदेश सीमा पर स्थित है गांव घोड़ों पिपली ( Ghodon pipli)। यह गांव यमुना के किनारे स्थित है। हरियाणा का यह ऐसा अंतिम गांव है, जहां तक पहुंचने के लिए उत्तर प्रदेश से होकर जाना पड़ता है। यमुनानगर के कलानौर के बाद सरसावा से उत्तर प्रदेश की सीमा शुरू हो जाती है और वहीं से उत्तर प्रदेश के आधा दर्जन गांवों को पार करके घोड़ों पीपली तक पहुंचने का रास्ता है।

अपने ही गांव घोड़ों पिपली के लिये नाव से पहले यूपी जाते हैं लोग

गांव के इस तरफ यमुना लगती है। हरियाणा के लोगों को इस गांव में पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के दिनों में यमुना अपने रौद्र रूप में होती है, ऐसे में इस इलाके में हरियाणा से आवाजाही बंद हो जाती है। दिलचस्प बात यह है कि इस गांव के स्कूल में पहुंचने के लिए अध्यापकों को यमुना के रास्ते तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है।

अपने ही गांव में परेशान हैं लोग

 यमुना हर साल इस इलाके में भारी तबाही मचाती है । 1956 में जब यमुना ने अपना रुख बदला तो घोड़ों पिपली गांव को भारी नुकसान हुआ था और यहां की सैकड़ों एकड़ जमीन यमुना में समा गई थी। लोगों को अपने घर छोड़कर ऊपरी इलाकों में जाकर शरण लेनी पड़ी। यह मंजर उसके बाद कई बार नजर आया। जब यमुना उफान पर आती है तो यमुना के किनारे बसे गांव बुरी तरह प्रभावित होते हैं।

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3 हजार है और 1400 से ज़्यादा है आबादी

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गांव की आबादी करीब 3 हजार है और 1400 से ज्यादा वोटर हैं। इस गांव में कोई बैंक नहीं है, जिसके चलते ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर जाकर पैसे का लेनदेन करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी गांव में बैंक उपलब्ध कराने की बात कही है लेकिन अभी तक इस दिशा में जहां कोई कार्रवाई  नजर नहीं आ रही है।

स्कूल पहुंचने के लिए करनी पड़ी है मशक्कत

गांव के  स्कूल में लड़कों की बजाय लड़कियों की संख्या ज्यादा है। जमा दो तक के इस स्कूल में जहां 134 लड़के विभिन्न कक्षाओं में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं वहीं 143 लड़कियां यहां के स्कूल में शिक्षा ग्रहण करती हैं। स्कूल के प्रिंसिपल डॉ नरेश कुमार ने बताया कि स्कूल तक पहुंचना काफी दिक्कत भरा रहता है, क्योंकि यहां तक पहुंचने के लिए 6 से 7 गांव उत्तर प्रदेश के हैं और उसके बाद हरियाणा पीडब्ल्यूडी की सड़क है जो काफी बुरी हालत में है। 

घोड़ों पिपली तक पहुंचने के लिए हरियाणा के लोगों को या तो सड़क के रास्ते उत्तर प्रदेश से होकर आना पड़ता है। इसके अलावा यमुना में से नाव द्वारा भी लोग यहां आते जाते हैं। सरकार द्वारा मछली पालन   के लिए ठेका दिया जाता है। और उसी ठेकेदार को यमुना में नाव चलाने की अनुमति दी गई है। इसी नाव के सहारे लोग यमुना के इस पार से उस पार आते जाते हैं जिनसे 10 रुपए प्रति व्यक्ति लिए जाते हैं।

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इन गांवों का अस्तित्व हो चुका है खत्म 

यमुना में तबाही के चलते जहां घोड़ों पीपली गांव को भारी नुकसान हो चुका है। वहीं यमुना के बहाव में 3 आबादी वाले गांव  जोधपुर, बीड टापू व  जयरामपुर जगीर का अस्तित्व भी खत्म हो चुका है। बार-बार बाढ़ से तबाही के चलते इन गांवों में रह रहे लोगों ने दूसरे गांव में जाकर बस गए थे। घोड़ों पिपली गांव के लोगों के 1971 में लोगों को बिजली उपलब्ध कराई गई थी।

  गलियों में खड़ा रहता है पानी

गांव के सरपंच सुमित चौधरी ने बताया कि यहां सबसे प्रमुख समस्या सीवरेज की है। पानी निकासी न होने के चलते गलियों में पानी खड़ा रहता है। इलाका समतल नहीं है जिसके चलते वर्षा का पानी भी यहां वहां खड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि इसका स्थाई समाधान सीवरेज ही है। इसके लिए वह अपने विधायक घनश्यामदास अरोड़ा के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों से भी मिल चुके हैं। इसके अलावा मोबाइल नेटवर्क की भी काफी परेशानी है।

आने-जाने में होती है काफी परेशानी

  घोड़ों पिपली के पूर्व सरपंच ओंकार सिंह ने बताया कि जो लोग बाहर नौकरियां करने जाते हैं, उन्हें रोजाना काफी परेशानी होती है। यह गांव उत्तर प्रदेश हरियाणा की सीमा पर है, लेकिन यहां जाने के लिए रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। लोग यमुना पर पुल बनाने की मांग कई बार कर चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।

 जल्द तैयार होगा प्रोजेक्ट

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यमुनानगर के विधायक घनश्यामदास अरोड़ा का कहना है कि घोड़ों पिपली में पानी  निकासी की समस्या को लेकर जल्द ही प्रोजेक्ट तैयार करवाया जाएगा। घोड़ों पिपली तक जाने वाली पीडब्ल्यूडी की सड़क बाढ़ और वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हो गई थी उसे भी जल्द बनवाने का प्रयास किया जाएगा।