एक अंधविश्वास ने पूरे गांव को बना दिया नरभक्षी

 

खबर जितनी घिनौनी है, उतनी ही हैरान कर देने वाली और इन्सानी मानसिकता के विकृत हो जाने की कहानी बताने वाली है। एक ऐसा गांव जहां के लोग सिर्फ एक अंधविश्वास की खातिर, कब्रें खोदकर शवों का मांस खाने लगते हैं। जी हां…यह किसी किस्से, कहानी या फेंटसी फिल्मों की बात नहीं है, बल्कि 21वीं सदी के पढ़े-लिखे आधुनिक इन्सानों की करतूत है। पढ़िये..पूरी खबर…

Men accused of cannibalism leave court where they face charges of murder and attempted murder in Escourt, South Africa, October 12, 2017. REUTERS/Rogan Ward

नरभक्षी इंसानों या जनजातियों के बारे में आपने सुना ही होगा, जो इंसानों का मांस खाते हैं। दक्षिण अफ्रीका में ऐसे ही दो नरभक्षियों ने जब पुलिस के पास पहुंचकर आत्मसमर्पण किया तो नरभक्षियों के एक गांव का चौंकाने वाला सच सामने आया। पुलिस के सामने सरेंडर करने के दौरान इन दोनों नरभक्षियों का कहना था कि वे इन्सनी मांस खाकर थक चुके हैं ( tired of eating human flesh) इसलिये पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर रहे हैं। इनकी कहानी सुनकर पुलिस के भी होश उड़ गए। दोनों नरभक्षियों को उनके जुर्म के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाला नरभक्षी निनो मबाथा (Nino Mbatha) (33) और लुंगिसानी मगुबेन ( Lungisani Magubane) (32) हैं। दोनों को 24 वर्षीय जेनले ह्लात्श्वेव ( Zanele Hlatshwayo ) नाम की एक युवती की निर्मम हत्या के जुर्म में गिरफ्तार किया गया। इनमें से निनो मबाथा पारंपरिक चिकित्सक ( Traditional medical practitioner)   है। सबसे पहले उसी ने दक्षिण अफ्रीका ( south africa) के क्वाजुलु-नताला शहर के ईस्टकोर्ट पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण किया था। इस नरभक्षी के पास पुलिस को इंसानी हाथ-पैर वाला बैग बरामद हुआ था।

यह है अंधविश्वास की जड़( cannibal case)

कुछ अफ्रीकी देशों में लोगों की जान मुथि नाम की अंधविश्वासी परंपराओं की वजह काफी खतरे में है। अंधविश्वास है कि मुथि परंपरा के बाद इंसानी मांस खाने वाले लोगों को शक्ति और स्वास्थ्य प्राप्त होता है। ( muti — a South African term for traditional medicine — to help him attain good fortune.) जुलाई माह में भी पुलिस ने यहां एक व्यक्ति को उसके बैग में इंसानी सिर के साथ गिरफ्तार किया था।

पूरा गांव नरभक्षी हो चुका है

जांच में पुलिस को पता चला कि एसिगोदल्वेनी नाम के इस गांव के 971 घरों में नरभक्षियों द्वारा एक बैठक की गई थी। इसके बाद गांव की ज्यादातर आबादी अनजान लाशों के लिए कब्र खोद रही थी या सौभाग्य प्राप्ति की अंधविश्वासी रीति-रिवाज में फंसकर इंसानी मांस खा रही थी। इन लोगों ने पुलिस को बताया वह लोग ऐसा मबाथा के कहने पर कर रहे थे ताकि वह उसे सौभाग्य प्राप्ति के लिए होने वाले ‘मुथि’ रिवाज के लिए ज्यादा से ज्यादा मात्रा में मानव हड्डियां दे सकें। जांच के दौरान पुलिस को एक कटोरे से आठ इंसानी कान भी मिले।

कोर्ट ने सबसे क्रूर अपराध करार दिया ( the most heinous crime)

पीटरमैरिट्सबर्ग हाईकोर्ट के जज पीटर ओल्सेन ने इस मामले को सबसे क्रूर अपराध करार देते हुए दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट को पता चला कि आरोपियों ने जेनले ह्लात्श्वेव नाम की महिला को मबाथा ने मगुबेन की मदद से मौत के घाट उतारा। इसके बाद दक्षिणी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में पारंपरिक दवा ( Traditional medicine) के लिए प्रयोग होने वाली एक विधि ‘मुथि के जरिए सौभाग्य प्राप्ति के लिए इन लोगों ने जेनले ह्लात्श्वेव के मृत शरीर से आंतरिक अंग, हाथ व पैरों को निकालकर अलग कर दिया।

सौभाग्य प्राप्ति के लिए दुष्कर्म कर खाया मांस

इसके बाद मबाथा ने मगुबेन को निर्देश दिया कि वह सौभाग्य प्राप्ति के लिए जेनले ह्लात्श्वेव का मांस खाए। इससे पहले भी आरोपी कई बार इंसानी मांस खा चुके थे। पुलिस ने इस केस में कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक आरोपी सिथेमबिसो सिथोल (31) ने आरोप तय होने के बाद सजा के लिए चल रहे ट्रायल के दौरान जेल में ही खुद को मौत के घाट उतार लिया था। आसपास के घरों में तलाशी के दौरान भी पुलिस को मानव अंग मिले थे, जिसके बाद चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इनसे पूछताछ में पता चला कि महिला जेनले ह्लात्श्वेव की हत्या करने से पहले उसके साथ दुष्कर्म भी किया गया था। मामला 2017 में सामने आया था, लेकिन 13 दिसंबर 2018 को दोषियों को सज़ा सुनाई गई है। (cannibal case men get life sentences)

लोगों ने कोर्ट के बाहर किया था प्रदर्शन

दक्षिण अफ्रीका में नरभक्षण के खिलाफ कोई कानून नहीं है। हालांकि मस्तिष्क को विचलित करना और मानव अंग की बरामदगी अपराध की श्रेणी में आता है। इस केस से नाराज लोगों ने कोर्ट के बाहर आरोपियों को सख्त सजा देने के लिए प्रदर्शन भी किया था। (Pietermaritzburg High Court judge Peter Olsen)  ने आरोपियों को सज़ा सुनाई है।

curtesy reuters

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