हरियाली बढ़ाने के लिये आधी सैलरी खर्च रहा हरियाणा पुलिस का जवान

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 हरियाली बढ़ाने के लिये Haryana Police का एक जवान अपना आधा वेतन खर्च कर देता है। नौकरी के सिलसिले में सोनीपत से चंडीगढ़ आये ठेठ ग्रामीण परिवेश के युवक को यहां की हरियाली ऐसी भा गई कि उसके जीवन का मकसद ही बदल गया। इस हरियाली ने इस युवा के दिलोदिमाग में सवाल खड़ा किया कि क्या उसका घर-आंगन, गलियारा और शहर ऐसा हरा-भरा नहीं हो सकता है। अगर हो सकता है, तो इसके लिए आज तक किसी ने पहल क्यों नहीं की। इसी तरह के सवालों से जूझते एक पुलिस जवान ने यह तय किया कि कोई कुछ करे या न करे, वह हरियाली के लिए पहल जरूर करेगा।

हरियाली बढ़ाने के लिये बन गया पर्यावरण मित्र

इसी का नतीजा है कि आज यह युवा चंडीगढ़ पुलिस के जवान की हैसियत से नहीं, बल्कि पूरे इलाके और आसपास में पर्यावरण मित्र के नाम से जाना जाता है। ललक और चाह ऐसी कि सबसे पहले खुद पर सारे नियम लागू किए। मोटरसाइकिल छोड़ कर साइकिल का हैंडल संभाला, तो अपनी नेक कमाई का आधा हिस्सा हरियाली के नाम कर दिया। एक आदमी से शुरू हुआ यह सिलसिला सोनीपत में कारवां बन चुका है।

हरियाली बढ़ाने के लिये गांव में जगा रहा अलख

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हजारों पर्यावरण मित्र गांव-गांव घर में हरियाली की न केवल अलख जगा रहे हैं, बल्कि पेड़ को वृक्ष बनाकर पर्यावरण को संचित कर रहे हैं। यहां हम बात कर रहे हैं कि सोनीपत जिले के गांव जागसी और चंडीगढ़ पुलिस में तैनात सिपाही देवेंद्र सूरा (पर्यावरण मित्र) की। इस युवा के हौसले का कमाल है कि गांव-गांव पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाई जा रही है और इसकी अगुवाई कर रही है युवा पीढ़ी।

दरअसल, चंडीगढ़ पुलिस का यह जवान बीते आठ साल में हरियाणा में कहीं वृक्ष मित्र, कहीं पेड़ मित्र, तो कहीं पर पर्यावरण मित्र के नाम से विख्यात हो गया है। एक छोटी सी घटना ने इस युवा को ऐसा झकझोरा कि उसने अपने शहर और गांव को भी हरा-भरा करने की ठान ली।

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हरियाली बढ़ाने के लिये ऐसे शुरू हुआ मिशन

    पुलिस में भर्ती होते ही इस युवा ने तय किया कि वह हर माह अपने वेतन का आधा हिस्सा पर्यावरण संरक्षण के लिए खर्च करेगा। इसके लिए उसने अलग से एक एकाउंट भी बनाया और वेतन आते ही इसमें आधा पैसा जमा करने लगा। अब जरूरी था कि इस मिशन को पूरा कैसे किया जाए। इसके लिए सबसे पहले एक गांव बिंधल को देवेंद्र ने गोद लिया। यहां स्कूल के अतिरिक्त श्मशानघाट, तालाब, गौशाला, पशु अस्पताल और चौपाल को उसने टारगेट किया और ग्रामीणों की मदद से यहां पौधरोपण करना शुरू किया।

   2.25 लाख बन गए 85 हजार पेड़

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  इस युवा के हौसले ने कई गांव में ऐसे क्लब गठित कर दिए हैं, जो पर्यावरण के लिए काम कर रहे हैं। गांव और शहर को मिलाकर करीब 10 हजार लोग इस अभियान का फिलहाल हिस्सा हैं। 288 गांव ऐसे हैं, जहां पर्यावरण क्लब काम कर रहे हैं और यहां टीम गठित करके पौधों को पेड़ बनाने का सफर जारी है। इस अनूठे मिशन में देवेंद्र अब तक 200 स्कूल-कॉलेजों में पौधरोपण कर चुके हैं। इनमें सरकारी और गैर सरकारी स्कूल हैं। पिछले 8 साल में करीब सवा दो लाख पौधे देवेंद्र रोपित करा चुके है और इन्हें संरक्षित भी कर रहा है, ताकि देश और प्रदेश की आबोहवा शुद्ध रहे।

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2 एकड़ में  खुद की नर्सरी

देवेंद्र को पौध तैयार करने के लिए नर्सरी की जगह चाहिए थी। इसके लिए एक साथी ने मदद की और करीब 2 एकड़ जमीन उसे नर्सरी के लिए दे दी। इस नर्सरी में अब त्रिवेणी (बरगद, पीपल और नीम) के अलावा आंवला, बडेहरा, अरहडे, जामुन, बमरूद, आम जैसे फलों के पौधे भी मिलते हैं। खास बात यह है कि कोई भी कहीं से आकर गोहाना रोड पर बनी इस नर्सरी से किसी भी समय पौधा ले जा सकता है।  पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पेड़ मित्र देवेंद्र सूरा ने सबसे पहले जन्मदिन, शादी की सालगिरह को अपना मुख्य हिस्सा बनाया।

हरियाली बढ़ाने के लिये मिल चुका है पेड़ मित्र सम्मान

देवेंद्र के इस अनूठे मिशन के लिए इसी साल 15 अगस्त पर उन्हें पेड़ मित्र सम्मान से प्रशासन की ओर से नवाजा गया है। सीएम मनोहर लाल खट्टर से लेकर देश की कई नामी हस्तियों को देवेंद्र सूरा का मिशन भाया है और इस युवा के हौसले और जज्बे को सबने सराहा। वह जहां भी जाते हैं, एक ही उपहार लेकर जाते हैं, वह है पौधा। इसके साथ-साथ परिवार का पूरा सहयोग उन्हें मिलता है।

 पुरुषोत्तम शर्मा/सोनीपत