तो यह है साल का सबसे पवित्र दिन …

डॉ.ब्रह्मदीप अलूने

काम , क्रोध, मद , मोह , लोभ , अभिमान,  ईर्ष्या , मन,  बुद्धि, और अहंकार के बीच झूलते हुए कार्तवीर्य अर्जुन ने बाणों से समुद्र को त्रस्त कर किसी परम वीर के विषय में पूछा। समुद्र ने उसे परशुराम से लड़ने को कहा।शक्ति के अहंकार में डूबे अर्जुन ने भगवान परशुराम को उसने अपने व्यवहार से बहुत रुष्ट कर दिया। अतः परशुराम ने उसकी हज़ार भुजाएँ काट डालीं,यहीं नहीं अन्याय और मानव धर्म की स्थापना के लिए ही  भगवान परशुराम ने इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन कर डाला।

मर्यादा पुरुषोत्तम राम ( SHREE RAM) ने परशुराम को दिव्य दृष्टि दी थी और अपने यथार्थ स्वरूप के दर्शन भी दिए थे। वे भी राम ( SRI RAM) के प्रतिरूप ही थे किन्तु शिव के द्वारा प्रदत्त अमोघ परशु को सदैव धारण किये रहने के कारण ये ‘परशुराम’ कहलाते थे।

परशुराम शिव जी के बड़े भक्त थे। शिव भक्ति से प्रसन्न होकर ही शिव ने उन्हें दैत्यों का हनन करने की आज्ञा दी थी। परशुराम ने शत्रुओं से युद्ध किया तथा उनका वध भी किया।किंतु इस प्रक्रिया में परशुराम का शरीर क्षत-विक्षत हो गया। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर कहा कि शरीर पर जितने प्रहार हुए हैं, उतना ही अधिक देवदत्व उन्हें प्राप्त होगा। इसी कारण परशुराम युगों युगों से जग को प्रकाशित कर रहे है।

पृथ्वी में खुशहाली लाने के लिए ही उन्होंने पर्वत काट कर कुण्ड से एक धारा निकाली, जिसका नाम, ब्रह्मकुण्ड से निकलने के कारण, ब्रह्मपुत्र हुआ। जहाँ ब्रह्मपुत्र नदी पर्वत से पृथ्वी पर अवतीर्ण होती है,वहाँ आज भी परशुराम-कुण्ड मौजूद है, जो हिन्दुओं को परम पवित्र तीर्थ माना जाता है।

भगवान विष्णु के छठे अवतार श्री परशुराम ( shree parhuram) की जन्मतिथि को सबसे श्रेष्ठ दिन माना जाता है। मुक्तिवाहिनी गंगा का धरती पर आगमन अक्षय तृतीया ( akshay tritiya) पर ही हुआ था। मान्‍यता है कि आखा तीज वाले दिन से ही वेद व्यास और श्रीगणेश द्वारा महाभारत ग्रन्थ के लेखन का प्रारंभ हुआ था।चार युगों की शुरुआत अक्षय तृतीया से मानी गई है।इसी दिन से सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ बताया जाता है।अक्षय तृतीया के दिन ही महाभारत के युद्ध का समापन भी हुआ था और इसी दिन ही द्वापर युग का समापन माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को कहा था कि सम्पूर्ण दिवसों से अक्षय तृतीया श्रेष्ठ है और इस दिन जो भी रचनात्मक या सांसारिक कार्य करोगे,उसका पुण्य मिलेगा।

 

 

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