उत्तराखंड की 12,250 फीट ऊंची चोटी पर फतह कर लौटीं चंडीगढ़ की नूपुर

विकास शर्मा

चंडीगढ़ की पर्वतारोही नूपुर ढींगरा (Chandigarh Mountaineer Nupur Dhingra) ने उत्तराखंड ( UTTARAKHAND) की 12250 फीट ऊंची बह्मताल पीक (Brahmatal Peak) को फतेह किया है। सेक्टर -42 में रहने वाली नूपुर ने बताया कि उसे बचपन से बर्फ से ढ़की चोटियां अपनी और आकर्षित करती थी, लेकिन वह पर्वतारोहण करेंगी, इसके बारे में उन्होंने सोचा नहीं था। पिछले साल उन्होंने यू ट्यूब पर पहली भारतीय दिव्यांग महिला अरुणिमा सिन्हा के एवरेस्ट फतेह करने के अनुभवों को देखा, तो वह पर्वतारोहण और उसके रोमांच को महसूस करने के लिए बैचेन हो गई। सबसे पहले उन्होंने हिमाचल के धर्मशाला में ट्रेकिंग की और अब उत्तराखंड के बह्मताल पीक को फतेह किया।

महीनों की प्रैक्टिस ने दिलाई जीत ( PRACTICE FOR SEVERAL MONTHS)

पर्वतारोही नूपुर ढींगरा ने बताया कि बह्मताल पीक की ट्रेकिंग से पहले ही मैंने खुद को इस चोटी पर चढ़ने के लिए तैयार करना शुरू कर दिया था। तीन महीने पहले ही मैं रोजाना लंबी सैर करती, कम खाना खाती ताकि इस लंबे सफर में मुझे कोई दिक्कत न आए। पांच दिन के इस ट्रेकिंग कैंप में गाइड रोजाना सुबह हमें वार्मअप एक्सरसाइज (warmup exercise) व योगा करवाते। सफर के दौरान एनर्जी कम न हो और सांस लेने में दिक्कत न हो इसके लिए उन्हें हर तीस मिनट चलने के बाद हम आराम करते। नूपुर ने बताया कि इन सबके बावजूद बह्मताल को फतेह करना मेरे लिए आसान नहीं था।

मौसम ने रोका BAD WHEATHER STOPPED HER

नूपुर ने बताया कि उन्होंने 6 जनवरी दोपहर को लोहाजंग बेसकैंप (Lohajang basecamp) से अपने गाइड की मौजूदगी में 8 अन्य पवर्तारोहियों के ट्रेकिंग ( TREKKING)  शुरू की थी। बेसकैंप से ही चढ़ाई काफी कठिन थी, और वह चार घंटे चलने के बाद सिर्फ 4 किलोमीटर का सफर तय कर पाए और शाम को बेकलताल में पहले दिन का पड़ाव रहा। दूसरे दिन हमनें साढ़े 7 किलोमीटर सफर तय किया और वह शाम को बह्मताल पर रूके। तीसरे दिन मौसम खराब हो गया, जबकि उस पड़ाव से बह्मताल पीक साढ़े 5 किलोमीटर दूर थी। हमनें रूक-रूक सफर में आगे बढ़ना शुरू किया और शाम तक हमनें बह्मताल फतेह कर लिया था। बह्मताल फतेह करना सब पर्वतारोहियों के लिए एक सपने के पूरे होने जैसा था, रात का हमारा पड़ाव वहीं पर था, सुबह हमने बह्मताल से ही सूर्यादय देखा इस शानदार ट्रेकिंग सफर को यादगार बनाया। इसके बाद वापसी का सफर शुरू हुआ और हम 12 जनवरी को वापस बेसकैंप लोहागंज पहुंचे।

अगला टारगेट है रूपकुंड और उसके बाद माउंट एवरेस्ट ( NEXT TARGET ROOPKUND AND THEN MOUNT EVEREST)

नूपुर ढींगरा ने बताया कि बह्मताल पीक को फतेह करने के बाद उनका हौसला बुलंद है। अब वह अपने इसी शौक और रोमांच को अगले दौर में ले जाना चाहती हैं। अब मेरी प्लानिंग उत्तराखंड के चमौली में स्थित रूपकुंड पीक को फतेह करने का है। इस पीक की ऊंचाई 16,499 फीट ऊंचा है।

गलेश्यिरों के बीच यह चोटी अपने कठिन ट्रेक के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। नुपूर ने बताया कि रूपकुंड कंकाल झील भी कहा जाता है, इस झील के किनारे सेकेंडो नर कंकाल है, इसलिए वह इस ट्रके पर जाने के लिए खासी उत्साहित हैं।

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