अस्पताल में भी काम आते हैं ये Etiquette, आप भी जानें…

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अस्पताल में भी शिष्टाचार यानी Etiquette काम आते हैं। Etiquette का अर्थ है आपका व्यवहार, बोलचाल,स्वच्छता, शालीनता और सांस्कृतिक मानदंड.जिस पर सभ्यता एवं संस्कृति का भवन निर्माण होता है. एक दूसरे के प्रति सदभावना, सहानुभूति व सहयोग आदि शिष्टाचार के मूल आधार है. शिष्टाचार का क्षेत्र बहुत व्यापक है. जहां-जहां भी एक-दूसरे व्यक्ति से संपर्क होता है वहां शिष्टाचार की ज़रूरत होती है. आज हम बात कर रहे हैं अस्पताल में शिष्टाचार की.

एक ऐसा पहलू है जिस पर लोगों का ध्यान कम ही जाता है. जब आपका कोई फैमिली मेंबर दोस्त या कोई और अस्पताल में होता है और आप उससे मिलने जाते हैं तब उस समय आपको किन-किन शिष्टाचारी बातों का ध्यान रखना चाहिए आइए जानते हैं.

नियम को पढ़ें

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हर अस्पताल के मुख्य लॉबी में या उसके पास की वेटिंग लाॅबी में  मुलाकात के नियम होते हैं. अपने मित्र या परिवार के सदस्य को देखने जाने से पहले, उन नियमों को पढ़ें.

अस्पताल में भी बीमार हैं तो न जाएं

यदि आपको  बुखार, खांसी, या किसी अन्य बीमारी के थोड़े से भी लक्षण  है तो घर पर रहें. क्योंकि रोगी को इंफेक्शन हो सकता है. रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है. 

साफ -सफाई का ख्याल रखें

अपने मित्र या परिवार के सदस्य को देखने से पहले और बाद में अपना हाथ धोएं. 

ज्यादा देर न बैठें

आपको  घंटों तक बैठे रहने की ज़रूरत नहीं है. अगर आप मरीज के अटेंडेंट नहीं हैं तो आपको ऐसे में15 या 20 मिनट का समय  पर्याप्त  है. 

अस्पताल में भी प्राइवेसी का ध्यान

मरीज और उसके अटेंडेंट की प्राइवेसी का ध्यान रखें जब भी कमरे में प्रवेश करें  , पहले, दस्तक दें उसके बाद ही  जायें. यदि प्राइवेट रूम है तो पहले नियम पढ़ ले .जो अक्सर लाॅबी या कमरे के बाहर लिखे होते हैं.

उपकरण न छुयें

कमरे में जाने के बाद किसी भी तरह के  चिकित्सा उपकरणों को न छुयें. किसी भी उपकरण को उसी दशा में छुयें, यदि आपको डॉक्टर या सुपरवाइजर से परमिशन मिल गई हो .वरना किसी भी उपकरण के नंबर को रिसेट तक करना सही नहीं. 

अस्पताल में भी शोर न करें

ज़ोर से आवाज़, तेजी से हँसी या सेलफोन बजाने के लिए अस्पताल अच्छा स्थान नहीं है. अपने सेल फोन को साइलेंट या वाइब्रेंट पर रखें . 

परिवार पहले

अस्पतालों के प्रतिक्षा समय तय होते हैं .उस समय में पहले परिवार के सदस्यों को मरीज से मिलने जाने दे.क्योंकि ऐसे समय में एक या दो लोग ही मिल सकते हैं .समय सीमा अवधि कम होने के कारण जल्दबाजी ना करें .परिवार के सदस्यों का मरीज से पहले मिलना जरूरी है.

खुशबू से बचें

अस्पताल में सुगंध या भारी सुगंधित टॉयलेटरीज़ पहन कर न जायें. कुछ रोगियों में एलर्जी हो सकती है, खासकर जब वेंटिलेटर पर हो .

अस्पताल में भी सकारात्मक रहें

जब आप अस्पताल पहुंचें, तो जितना सकारात्मक रहेंगे उतना ही अच्छा है अपने चेहरे पर परेशानी का भावना रखकर मुस्कान रखें मरीज को आपको देखकर सकारात्मकता उपजेगी. पुरानी बातें सांझा कर मरीज को दुखी या परेशान ना करें.

खाली हाथ नहीं

अच्छा हो यदि आप मरीज से मिलते समय उसको काट दिया फूलों का गुलदस्ता भेंट करें मरीज को अच्छा लगेगा. 

अपनी राय न दे

रोगी को बात बात पर अपनी राय ना दें डॉक्टर आपसे बेहतर जानता है. व्यवसाय, राजनीति या किसी भी चीज पर चर्चा करने से बचें.कोई व्यक्ति कोमा में है या बस आराम कर रहा है, कुछ भी मत कहो .

बिस्तर पर नहीं

जब तक मरीज आपको अपनी बगल में बैठने के लिए नहीं कहे तब तक बिस्तर पर न बैठें. अधिकांश अस्पताल के कमरे में कम से कम एक कुर्सी होती है, इसलिए इसपर बैठें.  यदि नहीं है, तो आप  खड़े रह सकते हैं. 

डॉक्टर का सम्मान

 चिकित्सक देखभाल के लिए  है.इसलिए उनका सम्मान करें . जब डॉक्टर या नर्स आयें  तो उनको छोड़ने की पेशकश करें. फिर एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कमरे से बाहर निकलें . या तो दरवाजे या प्रतीक्षा कक्ष में उनकी प्रतीक्षा करें.