मोदी की सुनामी में ऐसे बह गए क्षत्रप, बुआ-बबुआ-दीदी सबकी हालत खराब

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आर के झा

मोदी की सुनामी में बहे ये क्षत्रप।

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों की तस्वीर अब साफ हो गई है। नरेंद्र मोदी प्रचंड बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री नियुक्त हो गये हैं। मोदी नाम की सुनामी की लहरें इतनी तेज थी कि देश के कई हिस्सों में भारतीय जनता पार्टी ने क्लीन स्वीप कर दिया। चोट भले ही कांग्रेस को पहुंची… लेकिन सबसे ज्यादा दर्द क्षत्रपों को हुआ है…बीजेपी ने इस बार वहां वार किया है, जहां टीएमसी, बीजेडी, एनसीपी, सपा, बसपा मजबूत थे और मोदी नाम की आंधी ने इनके किले को ढेर कर दिया है.

बुआ-बबुआ का बिगाड़ा खेल

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सुनामी में बहे ये क्षत्रप: उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी का सामना करने के लिए बड़ी उम्मीदों के साथ मायावती और अखिलेश यादव साथ आए थे। अस्तित्व बचाने की खातिर 25 साल पुरानी दुश्मनी भूलकर एक साथ आए थे… गोरखपुर, फूलपुर और कैराना उपचुनावों में मिली कामयाबी के बाद खूब चहक रहे थे। सपना देखा था कि बीजेपी का हाल बेहाल कर देंगे…उसे सत्ता में नहीं आने देंगे। नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री नहीं बनने देंगे। खुद के प्रधानमंत्री बनने का सपना देखा था। इसके लिए सब कुछ भूलकर मंच साझा किया…सभाएं की….लेकिन सारे अरमान धरे के धरे रह गए…कोई कोशिश काम नहीं आई…न जाति का जोर चला और न ही सेक्युलर होने का दांव काम आया।

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Samajwadi Party leader Akhilesh Yadav with Bahujan Samaj Party leader Mayawati wave at the crowd during the swearing-in ceremony of JD(S)-Congress coalition government, in Bengaluru, on Wednesday. (PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI5_23_2018_000199B)


सुनामी में बहे ये क्षत्रप: नरेंद्र मोदी नाम की सुनामी आई तो उसमें बुआ और बबुआ दोनो बह गए…उनके साथ-साथ उनके उम्मीदवार भी बह गए। नतीजे आए तो चौंक गए…बीजेपी को थोड़ा नुकसान ज़रूर हुआ…लेकिन ये उतना बड़ा नहीं था जिसके दावे किए जा रहे थे। पार्टी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक बार फिर 60 से ज्यादा सीटें जीत ली। बुआ इस बात पर संतोष कर सकती हैं कि पिछली बार तो उनकी पार्टी का खाता तक नहीं खुला था। जबकि इस बार उसने दहाई का आंकड़ा छू लिया। लेकिन यूपी के लड़के को पिछली बार की ही तरह केवल 5 सीटें मिली।

पहली बार दीदी के घर में घुसपैठ

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सुनामी में बहे ये क्षत्रप: चौंकाने वाले नतीजे बंगाल से भी आए…पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यहां केवल दो सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने वादा किया था कि बीजेपी बंगाल में 23+ सीटें लाएगी। पार्टी को 23 सीटें तो नहीं मिली…लेकिन उसने दीदी के किले में बुरी तरह दरार डाल दी…और पार्टी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए बंगाल में 18 सीटें जीतीं। बीजेपी ने यहां लेफ्ट और कांग्रेस को पूरी तरह से मुख्य दौड़ से बाहर कर दिया। दीदी भी बीजेपी से मिल रही चुनौती से अच्छी तरफ वाकिफ थीं। इसलिए उन्होने बीजेपी को रोकने के लिए हर हथियार का इस्तेमाल किया। लेकिन उनकी कोई कोशिश काम नहीं आई। जाहिर है ये दीदी के लिए खतरे की घंटी है….वहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। लिहाजा बीजेपी की नजर अब राज्य की सत्ता पर होगी।

नवीन बाबू के गढ़ में मोदी की सेंध

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सुनामी में बहे ये क्षत्रप: ओडिशा में एकछत्र राज चलाने वाले नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी भले ही विधानसभा चुनाव पूर्ण बहुमत के साथ जीत गई हो…लेकिन देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचने के लिए उसे बीजेपी की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। बीजेपी ने इसकी तैयारी काफी पहले शुरू कर दी थी और निकाय चुनाव में इसकी झलक भी दिखाई दी थी। अब लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने यहां शानदार प्रदर्शन करते हुए 8 सीटें जीती और नवीन बाबू को जोरदार चुनौती दी।

नहीं काम आया शरद पवार का दांव

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विपक्षी नेताओं में शरद पवार ही ऐसे कद के नेता थे, जो अपने दांव पेच से मोदी को टक्कर दे सकते थे. लेकिन महाराष्ट्र में एनसीपी-कांग्रेस की जोड़ी को मुंह की खानी पड़ी. उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा कुल 48 सीटों वाले राज्य में बीजेपी-शिवसेना की जोड़ी ने कमाल का प्रदर्शन किया…गठबंधन को 41 सीटें मिली। जबकि शरद पवार को केवल 4 सीटों से संतोष करना पड़ा।

केजरीवाल का और भी बुरा हाल

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आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल लोकसभा चुनाव से पहले दावे कर रहे थे कि वह 7सीटों पर जीतने वाले हैं. उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन की बात कही थी, लेकिन वो नहीं हो सका। पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। जीतना तो दूर की बात है…उसके पांच उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे। केवल दो उम्मीदवारों को ही दूसरा स्थान मिला। पार्टी को अकेली कामयाबी पंजाब में भगवंत मान ने संगरूर लोकसभा सीट से दिलाई।

बिहार में बुझ गई लालटेन

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बिहार की सबसे बड़ी पार्टी राजद यानी लालू यादव की पार्टी का मोदी की सुनामी में कुछ पता ही नहीं चला। चुनाव से पहले राजद ने एनडीए के ही कुछ दलों को तोड़ और कांग्रेस को साथ लाकर, महागठबंधन बनाया। पांच पार्टियों वाला ये गठबंधन 40 में से केवल एक सीट ला सका। राजद का तो खाता ही नहीं खोला। ये उसका अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन था। तेजस्वी यादव लगातार लालू यादव के नाम पर वोट मांग रहे थे। उन्हें सियासी षडयंत्र का शिकार बता रहे थे। लेकिन जनता ने उनकी बातों पर ऐतबार नहीं किया। पूरा खेल ही पलट गया।

tej pratap yadav lalu son

एक तो पहले ही उनकी पार्टी में रार चल रही थी। उनके भाई तेज प्रताप यादव बागी हो चुके थे…लगातार धमकियां दे रहे थे। लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों की बिजली अब उनपर कहर बनकर टूटी है। पार्टी से इतने बुरे प्रदर्शन की उम्मीद किसी ने नहीं की थी।