Bombay Talkies के साथ शुरू हुई थी दिलीप कुमार समेत बॉलीवुड के इन बड़े चेहरों की कहानी

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Bombay Talkies के साथ बॉलीवुड के कई नामी चेहरों ने अपना सफर शुरू किया था। दिलीप कुमार भी उन्हीं अभिनेताओं में एक हैं। हिंदी सिनेमा जगत के दिग्गज दिलीप कुमार का असली नाम युसूफ खान है। फिल्मों में आने के बाद उनका नया नामकरण दिलीप कुमार के तौर पर हुआ। उस दौर में बॉलीवुड में कुमार अभिनेताओं का जलवा था। इनमें अशोक कुमार, मनोज कुमार, संजीव कुमार, राजकुमार जैसे दिग्गज अभिनेता थे। वे खुद कहते रहे हैं हिन्दी सिनेमा में अशोक कुमार का फिल्मी सूरज कभी नहीं डूबा और वह कई साल तक भी बेरोकटोक काम करते रहे और किसी न किसी रूप में हिंदी सिनेमा से जुड़े रहे। यह उस समय की बात है जब भारत स्वाधीन नहीं हुआ था। लिहाजा टेक्नोलॉजी, फोटोग्राफी के आधुनिकतम तौर-तरीकों से नावाकिफ हिंदी सिनेमा का वैसे ही गुजारा चल रहा था जैसे कोई उधार लेकर घी पीने की बात करे ।

Bombay Talkies के साथ शुरू किया सफर

बम्बई टॉकीज फिल्मों या सिनेमा के सफर में शुरू से जुड़ा रहा लेकिन बाद में इनके मालिकों हिमांशु राय और उनकी धर्मपत्नी देविका रानी के बीच खटपट शुरू हो गयी थी । देविका रानी, लीला चिटनिस, अशोक कुमार और दिलीप कुमार जैसे लोगों को हीरो और हीरोइन बनाने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है.

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दिलीप कुमार और अशोक कुमार जैसे चेहरों को ब्रेक दिया था बॉम्बे टॉकीज़ ने

ashok kumar devika rani

लिहाजा हिमांशु राय के मातहत काम करने वालों ने गुपचुप एक गुट बना लिया था, जिस गुट ने बाद में फिल्मीस्तान प्रोडक्शन हाउस को जन्म दिया। इस प्रोडक्शन कंपनी के अग्रणी मालिक तो शशाधर मुखर्जी थे, लेकिन उनके साथ परोक्ष रूप से अशोक कुमार फिल्म के निर्देशक ज्ञान मुखर्जी आदि भी जुड़े थे। यह वही बाम्बे टॉकीज है, जिसने दिलीप कुमार और अशोक कुमार जैसे चेहरों को ब्रेक दिया था। उस समय फिल्म के लिए सितारों को पैसे नहीं मिलते थे जैसे कि आजकल करोड़ों में मिलते हैं । उन्हें बहुत ही कम मेहनताना मिलता था। वह भी मासिक तौर पर रखा जाता था और उन्हें फिल्मों में काम दिया जाता था । फिल्में चल निकलती थीं तो यह प्रोडक्शन कंपनी को फायदा होता था।

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Bombay Talkies के साथ इत्तेफाकन एक्टर बनने का मौका मिला

dilip kumar

40 के दशक में फ़िल्मों में आने से पहले दिलीप कुमार पैसा कमाने का ज़रिया ढूँढ रहे थे. दिलीप कुमार (#Dilip Kumar) को ट्रैजेडी किंग (tragedy king) कहा जाता है, लेकिन असली ज़िंदगी में वो अच्छे ख़ासे प्रैंक्सटर (शरारती इंसान) रहे हैं. म्यूनिख़ में पैदा हुए जर्मन नागरिक विरिंग ने बॉम्बे टॉकिज़ के लिए 17 हिंदी और उर्दू फ़िल्मों में सिनेमाटोग्राफ़र (छायाकार) के तौर पर काम किया. बॉम्बे टॉकीज़ स्टूडियो को प्रसिद्ध फ़िल्मी हस्ती हिमांशु राय और स्टार अभिनेत्री देविका राय ने बनाया था.

Bombay talkies के साथ देवानंद और मधुबाला का सफर

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सितारों को सिर्फ नाम, ख्याति मिलती थी। अशोक कुमार ऐसे ही पापड़ बेलकर दादा साहेब फाल्के पुरस्कार तक पहुंचे थे जो ज्यादा सीनियर बन जाता था, वह जूनियरों को ट्रेनिंग देता था। अशोक कुमार ने ही बाम्बे टॉकीज के जरिए देवानंद को जिद्दी फिल्म से ब्रेक दिया । उन्होंने प्राण को विलेन बनाया । मधुबाला को फिल्म महल बनाकर डेब्यू करवाया । फिल्म आलोचक बीआर चोपड़ा को निर्देशक/प्रोड्यूसर बनाया। बीआर चोपड़ा से पूर्व हिंदी सिनेमा पर बांग्ला बंधुओं का ही वर्चस्व था । ऋषिकेश मुखर्जी, ‘आराधना’ फिल्म बनाने वाले शक्ति सामंत को अशोक कुमार ने ही डेब्यू दिया ।

हीरो के खिलाफ विलेन का रोल अशोक कुमार ने शुरू किया

ashok kumar

अशोक कुमार ने ही हीरो के खिलाफ (एंटी हीरो) रोल करने का रिवाज डाला था । वह सहज-अभिनय के लिए आने वाली पीढ़ी के लिए लकीरें खींच गए । बाम्बे टॉकीज के जरिए ही उन्होंने लता मंगेशकर को स्थापित किया। इससे पूर्व फिल्मों में हीरो-हीरोइनें ही गीत गाते थे । याद करिए कुंदन लाल सहगल का जमाना । स्वयं झूला फिल्म में ही अकेले अशोक कुमार ने कई गाने गाये हैं ।

Bombay talkies के साथ किशोर कुमार

कुमुद लाल गांगुली उनका वास्तविक नाम था, अशोक कुमार फिल्मी । जब अपने आप स्थापित हो गये तब अपने से 14 साल छोटे कल्याण भाई को अनूप कुमार बनाकर सिनेमा जगत से परिचय कराया । सबसे छोटे भाई आभास कुमार को किशोर कुमार के रूप में जाने-माने गायक के रूप में दर्शकों और श्रोताओं के सामने लाये और इस तरह हिंदी सिनेमा को बेहतर प्रोड्यूसर, एक्टर, निर्देशक मिला ।

By- Niroshaa Singh