कश्मीर में आतंकी भेजने की आईएसआई की योजना को ख़ारिज करने वाली एकमात्र पाकिस्तानी प्रधानमंत्री…

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 डॉब्रह्मदीप अलूने

कश्मीर में आतंकी भेजने की आईएसआई की योजना को ख़ारिज करने वाली एकमात्र पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनके प्रयासों की चर्चा आज भी होती है। 80 के दशक में पाकिस्तान ने ऑपरेशन जिब्राल्टर ( Operation Gibraltar) की नीति शुरू की थी जिसका उद्देश्य भारत में आतंकवाद और पृथकतावाद  को बढ़ावा देना था।इस समय पंजाब में खालिस्तान की आग भड़का कर हिन्दुओं और सिखों के बीच दूरी बनाने का प्रयास किया गया था।वहीं कश्मीर में भाड़े के आतंकियों को भेज कर कश्मीरी पंडितों की हत्या से साम्प्रदायिक सद्भाव भंग करने की कोशिशे की गई थी।यह दुनिया में शीत युद्द का दौर था और अमेरिका के इशारें पर पाकिस्तान की खुफियां एजेंसी आईएसआई ने अफगानिस्तान में रूस के खिलाफ जिहाद के नाम पर आतंकवाद को खूब बढ़ावा दिया था।

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पाकिस्तान की खुफियां एजेंसी पूरी दुनिया से जिहादियों को इकट्ठा करना,फ़ौजी प्रशिक्षण देना और नियमित तनख्वाह पर अत्याधुनिक हथियारों से लैस कर कश्मीर और अफगानिस्तान में अशांति फैला रही थी। सैन्य तानाशाह जिया-उल-हक के दौर में भारत पाकिस्तान के संबंध बेहद नाजुक बने हुए थे और कश्मीर में हिंसा का एक नया दौर शुरू हो चुका था। 17 अगस्त 1988  को सैन्य तानाशाह जिया-उल-हक की एक हवाई दुर्घटना में रहस्यमय मौत हो गई और उसके बाद पाकिस्तान की कमान देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने संभाली।

बेनज़ीर का कबूलनामा

भारत के कश्मीर में आतंकवाद फ़ैलाने के पाकिस्तान पर लगने वाले आरोपों को उन्होंने बाद में उन्होंने साफगोई से स्वीकार कर लिया। बेनजीर भुट्टो ने अपनी जीवनी में लिखा है “मेरे पास 1990 में आईएसआई के दफ्तर से यह संदेश आया कि अरब, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के एक लाख से ज्यादा मुजाहिदीन इस बात के लिये तैयार हैं कि वह कश्मीर में घुसकर कश्मीरियों की आज़ादी की लड़ाई में मदद करें। वह सारे बहादुर और प्रशिक्षित है और हिंदुस्तान की फौजों से बड़ी आसानी से लोहा ले सकते है।“

बेनज़ीर भुट्टो

बेनजीर ने लिखा “यह जानते हुए कि इस तरह की हस्तक्षेप पूर्ण गतिविधि कश्मीर के लोगों को नुकसान ही पहुंचाएगा, मैंने इस योजना पर अपना विरोध जता दिया।मैंने फौज और आईएसआई दोनों को आदेश दिया कि वह नियंत्रण रेखा पर फौजें तैनात करें और इस बात का ध्यान रखें कि कोई भी अफगानी मुजाहिदीन पाकिस्तान के रास्ते कश्मीर में न दाखिल हो पाए।”

बेनजीर अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनके पहले और उनके बाद के सभी सिपहसालार कश्मीर में आतंक फैलाते रहे हैं।इस समय कश्मीर घाटी में पाक परस्त अलगाववादियों की अवैधानिक सत्ता  गहराई तक पसरी हुई है।जाहिर है पाकिस्तानी हुक्मरानों की आतंक को प्रश्रय की नीति से ही कश्मीर घाटी लहूलुहान है।