बच्चों की तस्करी के लिए दुनिया का सबसे बड़ा ठिकाना है दिल्ली..

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         डॉ.ब्रह्मदीप अलूने

बच्चों की तस्करी: इस साल जनवरी में उड़ीसा में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य के पुलिस महानिदेशक ने कहा था कि गरीब तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चे मानव तस्करी का शिकार हो रहे हैं। बचपन बचाओ आंदोलन के लिए नोबल पुरस्कार जितने वाले कैलाश सत्यार्थी भी बाल तस्करी को रोकने में अपनी बेबसी का अक्सर इजहार करते रहे हैं। साल 2017 में उन्होंने कन्याकुमारी से नई दिल्ली तक एक जागरूकता यात्रा निकली थी जिसे उन्होंने  सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भारत का नाम दिया था। इस अभियान की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा था कि “मैं बाल यौन उत्पीड़न और बाल तस्करी के खिलाफ युद्ध की घोषणा करता हूं। आज मैं इतिहास के सबसे बड़े सामाजिक जागरूकता आंदोलन की घोषणा करता हूं।“

मानव तस्करी के लिये कुख्यात भारत!

भारत मानव तस्करी के लिए दुनिया भर में कुख्यात है। संयुक्त राष्ट्र ने इसकी अधिकारिक पुष्टि करते हुए अपनी एक रिपोर्ट में भारत को मानव तस्करी का एक प्रमुख केंद्र बताया गया है जबकि दिल्ली को इसके व्यवसाय के लिए सुरक्षित ठिकाना माना गया है।

बच्चों की तस्करी और बाल मज़दूरी का सच

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बच्चों की तस्करी

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में साल 2014 में एक पुलिस अधिकारी धर्मेद्र यादव ने बाल बंधुआ मजदूरों को रिहा करने का एक अभियान चलाया था और इसमें जो हकीकत सामने आई वह हैरान करने वाली थी। बाल बंधुआ मजदूरों के बीच बाल तस्करी का खौफनाक सच सामने आया और उन्होंने पूरे जिले में ऑपरेशन स्माइल चलाकर गाजियाबाद के विभिन्न थानों में दर्ज बच्चों की गुमशुदगी की एप्लीकेशंस का बारीकी से निरीक्षण करने के उपरांत 127 एप्लीकेशन को छांटा गया। इन बच्चों की तलाश के लिये 38 पुलिस टीमों का गठन किया गया। इन टीमों में 150 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को लगाया गया। एक महीने तक चली ताबड़तोड़ तलाश के बाद 227 बच्चों को सकुशल बरामद किया। बरामद बच्चों में 147 बच्चे देश के अन्य जिलों के रहने वाले थे।

बच्चों से भीख मंगवाने का चलन

दरअसल शहरों में बढ़ती जनसंख्या की अधिकता ने रोज़गार के अवसरों को बेहद कम किया है और भीख मांगने का गोरख धंधा बखूबी फल फूल गया है। स्लम एरिया शहर में किसी भी स्थान पर मिल जाते है और चौराहों पर बच्चे अक्सर भीख मांगते देखे जा सकते है। इसमें महिलाओं के हाथों में भी नन्हें मासूम होते है और इसे भीख लेने का सबसे कारगर तरीका माना जाता है।  देश में यह भयावह तथ्य भी सामने आई है कि कई बच्चों का अपहरण भीख मंगवाने के लिए किया जाता है और इसके लिए बकायदा कई गिरोह मिलकर काम करते है।

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बच्चों की तस्करी बड़ी समस्या। दिल्ली सबसे कुख्यात।

बच्चों को चुराने वाले गिरोह अक्सर गरीब बच्चों को आसान शिकार बना लेते हैं क्योंकि गरीब माता पिता आर्थिक अभाव में अपने बच्चों को ढूंढ नहीं पाते और न ही पुलिस उनकी सहायता करती है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस को फटकार लगाई थी कि वो सिर्फ़ अमीरों के बच्चे तलाश करती है। http://इन योजनाओं ने जीता वोटर्स का दिल, इसलिए हुई मोदी की…

क्यों नहीं मिलते गुमशुदा बच्चे

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की एक रिपोर्ट कहती है कि 80 प्रतिशत पुलिस वाले ग़ायब होने वाले बच्चों की तलाश में कोई रुचि नहीं दिखाते। आयोग के अनुसार भारत में हर साल लगभग 45 हज़ार बच्चे ग़ायब होते हैं और इनमें से 11 हज़ार बच्चे कभी नहीं मिलते। बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था,कैम्पेन अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफलिंग ने मानव तस्करी के कारणों का खुलासा करते हुए साफ किया है कि भारत की भौगोलिक और सामाजिक विविधता मानव तस्करी के लिए बेहद मुफीद है।

नेपाल के बच्चे, मेघालय में काम करते हुए मिल जायेंगे, हरियाणा में लिंगानुपात बेहद कम होने और लड़कियों की संख्या बेहद घटने से असम की लड़कियाँ यहां दुल्हन के रूप में मिल जाएगी। गोवा के स्पा सेंटर में काम करने वाली कमसिन लडकियां और बच्चे मानव तस्करी के जरिए उत्तर पूर्व और दक्षिण भारत से यहां लाये जाते हैं। http://जलेबी का ज़ायका और मप्र की सियासी ज़मीन पर जीतू पटवारी..

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मानव तस्करी एक बड़ा व्यापार

पूर्वोत्तर के राज्यों में एंटी ह्युमन ट्रेफलिंग स्क्वाड असम,अरुणाचल और मणिपुर में काम करती है,यहां मानव तस्करी एक बड़ा व्यापार है। भारत में नेपाल और बंगलादेश से मानव तस्करी सबसे ज्यादा हो रही है और भारत इसे रोकने के लिए बंगलादेश के साथ लगातार काम भी कर रहा है। पश्चिम बंगाल विविधता और गरीबी के कारण मानव तस्करी से सबसे ज्यादा प्रभावित है।पिछलें सालों में पश्चिम बंगाल में मानव तस्करी के सबसे ज्यादा मामलें दर्ज हुए।साल 2016 में यह आंकड़ा 3576 था। बाल विवाह के लिए बदनाम राजस्थान इसके बाद दूसरे और तीसरे नंबर पर फिर कथित विकसित राज्य गुजरात आता है।

बच्चों की तस्करी बड़ा मुद्दा: सत्यार्थी

कैलाश सत्यार्थी कहते है कि “हमारे बच्चे जो झेल रहे हैं वह कोई मामूली अपराध नहीं है।यह एक नैतिक महामारी है जिससे हमारे देश के साथ ही पूरी दुनिया भी परेशान है।हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते। हमें अपनी चुप्पी तोड़नी होगी।हमें अपनी आवाज उठानी होगी और एक राष्ट्र के रूप में एकजुट होना होगा।“

भारत में तस्करी के गंभीर रूपों में जबरन मज़दूरी,भीख मांगना,समय से पहले जवान करने के लिए किसी व्यक्ति को इंजेक्शन या हॉर्मोन देना,विवाह या विवाह के लिए छल या विवाह के बाद महिलाओं तथा बच्चों की तस्करी शामिल है। जाहिर है देश में कड़े कानून होने के बाद भी मानव तस्करी बदस्तूर जारी है और यह लगातार त्रासदी के रूप में सामने आ रही है।