The concept of ‘self-love’- लड़कियों में क्यों बढ़ रहा Sologamy का ट्रेंड

The concept of 'self-love'
The concept of 'self-love'

जिस तरह से समाज में सिंगल पेरेंट बनने का ट्रेंड बढ़ा है। इससे पहले शादी न करने और जिंदगी भर अविवाहित रहने का कॉन्सेप्ट सदियों से समाज में है। वहीं एलजीबीटी क्यू को मान्यता देने और कानून बनने लगे हैं तो सरोगेसी को लेकर
लोगों में और जागरूकता और खुलापन भी दिखा है। आत्मनिर्भर महिलाएं हर क्षेत्र में कदम आगे बढ़ा रही हैं। देर से शादी करने पर वे एग प्रीज़िंग का ऑप्शन लेती हैं तो बच्चों की सेहत के लिये एमलिकल कोर्ड को प्रिजर्व करा लेती हैं। ऐसे हर नये कॉन्सेप्ट
के प्रति वे बहुत जागरूक हैं। इन सबके बीच, बार-बार ब्रेकअप के डर से परेशान और अकेले ही सबकुछ मैनेज करने का साहस रखने वाली महिलाएं जो आत्मनिर्भर हैं, सफल हैं, सेल्फ मैरिज को प्राथमिकता दे रही हैं।
वे किसी पाबंदियों में नहीं बंधती हैं. उन्हें किसी दायरे में बंधना नहीं आता है. अपने पार्टनर की उम्मीदों और प्रत्याशाओं में उन्हें बंधना नहीं है, आजाद रहना है। ऐसे लोगों के लिए सेल्फ मैरिज बेस्ट ऑप्शन है।
दूसरी ओर अगर आप एसेक्सुअल हैं तो भी सेल्फ मैरिज लोग कर लेते हैं।

आपने मोनोगैमी यो पोलिगैमी तो सुना ही होगा, लेकिन क्या आपने कभी सोलोगैमी का नाम सुना है? हालिया दिनों में हर जगह सोलोगैमी (Sologamy) का जिक्र होते साफ देखा जा सकता है. सोलोगैमी के लिए क्षमा बिंदु (Kshama Bindu) नामक महिला भी लगातार खबरों में बनी हुई है. लेकिन, सोलोगैमी होती क्या है और हर तरफ इसकी चर्चा क्यों हो रही है? आइए जानते हैं और साथ ही इस बात से भी वाकिफ होते हैं कि क्यों ज्यादातर महिलाएं सोलोगैमी अपना रही हैं.

What is Sologamy


असल में सोलोगैमी का मतलब है किसी व्यक्ति का खुद से ही शादी कर लेना. सोलोगैमी को ओटोगैमी भी कहते हैं. सोलोगैमी को अपनाने वालों का कहना है कि यह खुद का मूल्य समझने और खुद से प्यार (Self Love) करने की तरफ एक कदम है. इसे सेल्फ मैरिज (Self Marriage) भी कहा जा सकता है.

वैश्विक तौर पर यह ज्यादातर महिलाओं के बीच प्रचलित है जिसका मतलब है कि महिलाएं इसे अपनाने की तरफ ज्यादा प्रमुख नजर आ रही हैं. गुजरात की रहने वाली क्षमा बिंदु 24 साल की हैं और आने वाली 11 जून को खुद से शादी करने जा रही हैं जिसमें वे अपनी मांग में सिंदूर भी भरेंगी और फेरे भी लेंगी. क्षमा का कहना है कि वे कभी किसी लड़के से शादी नहीं करना चाहती थीं लेकिन उन्हें दुल्हन बनना था. क्षमा के लिए सोलोगैमी एक तरह की सेल्फ एक्सेप्टेंस (Self Acceptance) यानी खुद को अपनाने का एक तरीका है जिस चलते वे यह कदम उठाने जा रही हैं.

क्यों अपना रही हैं महिलाएं सोलोगैमी


अब सवाल उठता है कि ज्यादातर महिलाएं ही सोलोगैमी की तरफ क्यों बढ़ रही हैं या खुद से शादी क्यों कर हैं. असल में यह कदम उठाने के एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं.

sologamy को ऐसे समझें..

  • कई महिलाएं सोलोगैमी इस चलते अपनाती हैं क्योंकि वे मानती हैं कि वे खुद के साथ जितनी खुशी महसूस करती हैं कभी किसी पार्टनर के साथ नहीं कर पाएंगी.
  • किसी के लिए सोलोगैमी का अर्थ है कि वह किसी व्यक्ति से नहीं बल्कि जीवन से और खुद से जुड़ाव महसूस करती हैं.
  • ऐसी भी कई लड़कियां हैं जो किसी लड़के से शादी करने की इच्छा नहीं रखतीं, वे भी सोलोगैमी को अपना रही हैं.
  • किसी सही लड़के की तलाश का जब कुछ परिणाम ना निकल रहा हो तब भी खुद से शादी कर कई महिलाएं सुकून की सांस ले सकती हैं.
  • इसमें कोई दोराय नहीं कि महिलाएं सालों से चली आ रही मान्यताओं पर टिके रहने की बजाय आगे बढ़ रही हैं, सोलोगैमी उनके लिए किसी से शादी करके ही सेटल हुआ जा सकता है जैसी बातों से पार पाने का रास्ता हो सकता है.