अंग्रेज़ों ने की थी फूलों की घाटी की खोज, The British Had Discovered The Valley of flower

पहाड़ी प्रदेश उत्तराखंड में Valley of flower की खोज अंग्रेज़ों ने की थी। यूं तो कई दर्शनीय स्थल हैं। देवभूमि के हर कोने में भगवान ही नहीं प्रकृति का भी वास है। शांत, सौम्य रमणीय इस प्रदेश में ट्रैकिंग के लिये हर साल भारी तादाद में लोग आते हैं। उनमें बहुत से पर्यटक ( tourist) चमोली ज़िले का रुख़ करते हैं। इस ज़िले में प्रकृति का अनुपम सौंदर्य बिखरा है। खासकर गर्मियों में लोग पहाड़ों की सैर पर निकलते हैं लेकिन सितंबर से लेकर अक्तूबर और नवंबर के पहले हफ्ते तक भी कई पर्यटक इस valley of flower को देखने पहुंचते हैं।

 वैली ऑफ फ्लावर आज भले ही यूनेस्को ने धरोहरों में शामिल कर दी है लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि आखिर इस घाटी में इतने सारे रंग बिरंग फूल बिना लगाये कैसे उग आते हैं। ये रहस्य है, रोमांच है और इसका लुत्फ उठाने के लिये हमें चलना होगा valley of flowers की सैर पर…….

सबसे पहले ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक एस स्मिथ ( Frank S Smith) और उनके साथी आर एल होल्डसवर्थ  (R.L.Holdsworth) ने लगाया था, जो संयोग से 1931 में अपने कामेट पर्वत के अभियान से लौट रहे थे। Valley of Flowers की बेइंतहा खूबसूरती से प्रभावित होकर स्मिथ 1937 में इस घाटी में वापस आये और, 1938 में “वैली ऑफ फ्लॉवर्स” (Valley of Flowers ) नाम से एक किताब प्रकाशित करवायी।

Valley of flower की पौराणिक गाथा

ऐसी मान्यता है कि त्रेता युग में राम-रावण युद्ध में घायल लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी खोजते हुए हनुमान यहीं आए थे। लक्ष्मण को मूर्छा से जगाने के लिए हनुमान को संजीवनी बूटी इन्हीं पहाड़ियों से मिली थी।

यहां स्थित है फूलों की घाटी

फूलों की घाटी को यूनेस्को (UNESCO) ने विश्व धरोहर घोषित किया है। यह गोविंदघाट ( GOVINDGHAT) के ज़रिये हेमकुंड साहिब ( HEMKUND SAHIB)जाने के रास्ते में पड़ती है। हिमालय की गोद में बसी फूलों की घाटी चारों तरफ बर्फ से ढकी पहाड़ियों से घिरी है। यहां करीब 300 से अधिक किस्म के फूल हैं। फूलों के साथ ही काला हिमालयन भालू, कस्तूरी मृग, बर्फीले तेंदुए (SNOW LEOPARD) देखने भी पर्यटक यहां आते हैं। और जहां फूल होते हैं वहां तितलियां कैसे न हों। तो यहां आपको दुर्लभ प्रजाति की कई तितलियां भी देखने को मिलेंगी। करीब 87 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली फूलों की घाटी को 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था।

Valley of flower में कब आएं सैर पर

हिमालय की घाटी में होने की वजह से दिसंबर से मई तक यहां बर्फ़ की सफेद चादर बिछी होती है। अक्तूबर- नवंबर तक तक घाटी पर्यटकों के लिए खुली रहती है। उस समय यहां तमाम रंग के फूल देखने को मिलेंगे। यकीन मानिए ऐसे फूल आपने पहले कभी न देखे होंगे। जुलाई-अगस्त बारिशों का मौसम है। रास्ते में मुश्किलें आ सकती है। लेकिन उस दौरान घाटी का सौंदर्य चरम पर होता है।

मंज़िल आसान नहीं

दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से यहां आना आसान नहीं होता। इसलिए शारीरिक रूप से स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। यहां आने के लिए यातायात साधन या विश्रामगृह बहुत नहीं मिलते। इसलिए गढ़वाल मंडल विकास निगम का पैकेज टूर सबसे बढ़िया है। आप इनके पर्यटक विश्रामगृह में ठहर सकते हैं या फिर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के विश्रामगृह की शरण भी ले सकते हैं। रात में ठहरने के लिए जोशीमठ या फिर गोविंदघाट है।

Valley of flower का रास्ता कहां से चढ़ें

अगर आप ऋषिकेश (RISHIKESH)  के रास्ते फूलों की घाटी पहुंच रहे हैं तो रास्ते में देवप्रयाग ( DEVPRAYAG) , श्रीनगर (SRINAGAR) , रुद्रप्रयाग (RUDRAPRAYAG), कर्णप्रयाग (KARANPRAYAG) और चमोली ( CHAMOLI) जैसी प्रमुख जगहें पड़ेंगी। इन सब जगहों पर कुदरत का सौंदर्य देखा जा सकता है इसके साथ ही ये दुर्गम पहाड़ी इलाके अपनी बसावट के चलते दुरूह भी हैं।

जोशीमठ तक आने के लिए आपको बस और जीप आसानी से मिल जाएंगे। जोशीमठ से गोविंदघाट जाना होता है। सुबह जितना जल्दी निकलें उतना अच्छा। चूंकि यहां सिखों का प्रमुख तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब है। इसलिए कुछ जरूरी सुविधाएं भी मिल जाती हैं। जैसे आप हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे में अपना जरूरी सामान लॉकर में रख सकते हैं। इससे आगे के सफ़र में खच्चरों का साथ भी लेना पड़ता है इसलिए आपके पास जितना कम सामान हो उतना ही अच्छा रहेगा।

13 किलोमीटर के इस सफ़र में लगते हैं 5 से 8 घंटे 

जोशीमठ से घांघरिया गांव (जहां फूलों की घाटी है) का सफ़र थोड़ा मुश्किल है। 13 किलोमीटर के इस सफ़र में आपको 5 से 8 घंटे लग सकते हैं। घांघरिया में भी रात को ठहरने की व्यवस्था है। यहां गढ़वाल मंडल विकास निगम का पर्यटक विश्राम गृह है। घांघरिया से करीब एक किलोमीटर आगे फूलों की घाटी पड़ती है। संरक्षित क्षेत्र होने की वजह से यहां खच्चरों का प्रवेश वर्जित है। ऐसे रोमांचक और साहसी सफ़र का भी अपना ही लुत्फ है। करीब 8 किलोमीटर के विस्तार में आप फूलों की घाटी की सैर कर सकते हैं। ज़मीन पर कहीं बैंगनी फूलों की चादर बिछी होगी तो कहीं पीली बहार छायी होगी। हालांकि एक बार की यात्रा में आप यहां के सारे फूल नहीं देख सकते। क्योंकि फूल अपने मौसम के मुताबिक ही तो खिलेंगे।

Valley of flower के ब्रह्मकमल देखे हैं?

ब्रह्मकमल यहां का दुर्लभ पुष्प है जो सितंबर के महीने में खिलता है। इसे उत्तराखंड के राज्य पुष्प का दर्जा हासिल है। और कौन कहता है कि कमल जल में ही खिलता है। पत्थरों के बीच श्वेतरंग के कमल को देखकर एक दिव्य सी अनुभूति होती है। इसकी हलक सुगंध आध्यात्मिक तृप्ति का एहसास कराती है। ब्रह्मकमल देखना हो तो सितंबर के आस पास का समय सही रहेगा।

इसके अलावा गुलाब, गुल्दावदी, सिल्पाड़ा, जंगली गुलाब, जूही, चंपास बेला, ऑर्किड, कंथीड समेत कई फूल हैं जिनके नाम याद रखना उतना ही मुश्किल है जितना आसान उसकी महक को स्मृतियों की पोटली में सहेजना। फिर चारों तरफ बिखरे बुरांश के सौंदर्य का तो क्या ही कहना।

साभार-ट्रिब्यून-वर्षा सिंह

 

1 COMMENT

  1. फूलों की घाटी ने मन मोह लिया। आपके इस लेख ने मुझे प्रेरित किया है धरती के इस स्वर्ग की सैर को। …प्रतीक्षा रहेगी और भी लेखों की।।

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