Aaj Ka Panchang 07 मार्च , आज करें सूर्य की पूजा, मान-सम्मान की होगी प्राप्ति

सूर्य की पूजा के साथ सिर्फ ज्योतिष नहीं जुड़ा हुआ। सूर्य के साथ जुड़े हैं अनेक सत्य, जैसे- यह साक्षात भगवान है, इसकी किरणों से स्वचछता का प्रवेश होता है, जब भी उदास हो तो भास्कर को चंद सेकंड देखते ही पाॅजिटिव वाइब्स आते हैं, सेेहत को पुष्ट करती सूरज की तेज़ रोशनी आदि।

सूर्य की पूजा करें रविवार को

रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें। इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है। रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।

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दिन के हर पहर पर पैनी नज़र

विक्रम संवत् – 2077 शर्वरी संवत्सर तदुपरि खिस्ताब्द आंग्ल वर्ष 2021
शक संवत – 1942
कलि संवत – 5122
अयन – उत्तरायण
ऋतु – सौर वसंत ऋतु
मास – फाल्गुन माह
पक्ष – कृष्ण पक्ष
तिथि – नवमी, 16ः47 तक तत्पश्चात दशमी ।
तिथि का स्वामी – नवमी तिथि की स्वामी माँ दुर्गा और दशमी तिथि के स्वामी यमराज जी है ।
नक्षत्र – दृ मूल दृ 20ः59 तक पूर्वाषाढा
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- मूल नक्षत्र के देवता निॠति (राक्षस) एवं स्वामी केतु जी है ।
योग – सिद्धि 15ः52 तक व्यतीपात
प्रथम करण – गर 16ः47 तक
द्वितीय करण – वणिज 04ः13 08 मार्च तक
गुलिक काल – अपराह्न 3ः00 से 4ः30 तक ।
दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
राहुकाल -सायं 4ः30 से 6ः00 तक ।
सूर्योदय -प्रातः 06ः30
सूर्यास्त – सायं 18ः24
अभिजित मुहूर्त – दोपहर 12ः09 से 12ः6 तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06.13 से 06.37 तक
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05.01 से 05.50 तक (8 मार्च)
अमृत काल – दोपहर 02ः46 से 04ः19 तक
यात्रा शकुन – इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।

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आज का मंत्र

आज का मंत्र-ॐ घृणिरू सूर्याय नमरू। आज का उपाय-सूर्य को कुंकुंम मिश्रित जल से अर्घ्य दें। वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं। पर्व व त्यौहार – समर्थ रामदास नवमी, मूल समाप्त, विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इसकी अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। रिक्ता नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल व कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।