नये साझीदार की तलाश में जुटी कांग्रेस, सोनिया फिर गठबंधन की कवायद में जुटीं

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कांग्रेस अब नये साझीदार की तलाश में जुट गई है। लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले कांग्रेस और गांधी परिवार एक बार फिर गठबंधन और पीएम पद के उम्मीदवार पर विचार कर रहे हैं। आज की गई घोषणा से साफ दिखता है कि कांग्रेस पर अब तैयार है कि वह एक ईमानदार बिचौलिये की भूमिका निभाए, ताकि 23 मई के बाद बिखरे हुए विपक्ष का एकजुट होकर सरकार गठन की दिशा में काम कर पाना सुनिश्चित किया जा सके, बशर्ते BJP और उसके सहयोगी दल स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर पाएं.

क्षेत्रीय दलों से बात

alliance

विपक्ष की राजनीति के इस दौर में नए साझीदार तलाशने के लिए उठाया गया यह पहला कदम है, और काफी अहम है, क्योंकि हाल ही में दक्षिण भारत की राजनीति के मज़बूत चेहरे और तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) प्रमुख एम.के. स्टालिन से मुलाकात की, ताकि यह चर्चा की जा सके कि एक हफ्ते में ही घोषित होने जा रहे चुनाव परिणाम के बाद कौन किसके साथ गठबंधन करेगा. बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती जैसे अन्य विपक्षी नेताओं ने तो देश के प्रशासन के शीर्ष पद पर विराजने की अपनी महत्वाकांक्षाओं को ज़ाहिर करने में कतई संकोच भी नहीं किया है.

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sonia in power play

मायावती ने तो उस संसदीय निर्वाचन क्षेत्र तक के बारे में बात कर ली, जिससे वह प्रधानमंत्री बनने की स्थिति आने पर चुनाव लड़ने का इरादा रखती हैं. ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) बार-बार कहते रहे हैं कि उन्हें स्टालिन का राहुल गांधी को प्रधानमंत्री कबूल करने का प्रस्ताव कभी स्वीकार नहीं हुआ. और अब, जब KCR संभवतः स्टालिन को कांग्रेस के साथ हुए गठबंधन से अलग खींचकर तीसरे मोर्चे में ले जाने की कोशिश करते दिखे, तो शायद कांग्रेस को समझ आ गया है कि उनका पुनरुद्धार, जिसके लिए दोनों भाई-बहन उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, इंतज़ार कर सकता है, क्योंकि अगर कांग्रेस ने ‘मोदी के तूफान’ को रोकने में अपनी भूमिका निभाने में कोताही बरती, तो पुनरुद्धार ही दांव पर लग जाएगा. यह भी पढ़ें:http://दीदी की दादागीरी, कहा- ‘दिल्ली में बीजेपी दफ्तर कब्ज़ा सकती हूं’

पूरे चुनाव के दौरान लगभग नदारद रहीं सोनिया गांधी भी आखिरकार सामने आईं, ताकि विपक्षी नेताओं के अहम की तुष्टि कर सकें. पिछले 15 दिनों में उन्होंने फोन पर लगभग हर विपक्षी नेता से पहुंच बनाने की कोशिश की है. उन्होंने एम.के. स्टालिन तथा अन्य कई नेताओं को खत भी लिखे हैं, और उन्हें मुलाकात के लिए न्योता दिया है.

पटनायक से बात की

इनके अलावा, ओडिशा के ‘गुट-निरपेक्ष’ माने जाने वाले मुख्यमंत्री नवीन पटनायक तथा तेलंगाना में सूपड़ा साफ कर देने की भविष्यवाणी की वजह से मज़बूत दिख रहे KCR को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने फोन किया है, और उन्हें दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात के लिए आमंत्रित किया है.

सहपाठी रहे हैं कमलनाथ और पटनायक

एक ओर कमलनाथ अपने स्कूली दिनों के साथी नवीन पटनायक (दोनों दून स्कूल में पढ़ा करते थे) से बात कर रहे हैं, दूसरी ओर DMK के सूत्रों ने मुझे बताया है कि KCR से सोमवार को हुई मुलाकात में स्टालिन ने साफ-साफ चेता दिया है कि वह कांग्रेस को धोखा नहीं देंगे, और उन्होंने तो KCR को सुझाव दे डाला है कि वह फेडरल मोर्चे के ख्वाब को भूल जाएं, और ऐसे गुट में शामिल हो जाएं, जिसकी धुरी कांग्रेस हो… यह ऐसा सुझाव था, जिसे अब तक KCR असंभव बताते रहे हैं.
साभार- स्वाति चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार