5 मुद्दों पर ध्यान देती तो बहुमत में आती बीजेपी, नहीं चला जादू

haryana-chief-minister-manohar
haryana-chief-minister-manohar

वे ज़मीनी हकीकत क्या है, जिसे बीजेपी नज़रअंदाज़ कर गई? हरियाणा जैसे राज्य, जहां बड़ी संख्या में लोग सेना और सुरक्षाबलों में हैं, वहां पर वह अनुच्छेद 370 और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर एकतरफा लड़ाई जीत जाएगी. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही थी. कांग्रेस के नेताओं को भी इसका अंदाजा नहीं रहा होगा कि वह बिना किसी रणनीति और बगावत को झेलते हुए बीजेपी को 50-50 लड़ाई लड़ने पर मजबूर कर देगी.

जानकारी के अनुसार अब पार्टी जेजेपी के दुष्यंत चौटाला के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश कर रही है. 25 अक्‍टूबर को दिल्ली में जेजेपी की बैठक है जिसमें इस मुद्दे पर फैसला लिया जाएगा. हरियाणा में बीजेपी की सत्‍ता से दूर रहने के ये 5 बड़े कारण हो सकते हैं।https://www.indiamoods.com/bjp-is-expected-to-win-big-in-haryana-know-congresss-condition/

वे ज़मीनी हकीकत जिन्हें देख नहीं पाया खट्टर और मंत्रियों का बड़बोलापन

असम में जिस तरीके से एनआरसी लागू की जा रही है ठीक उसी तरीके से हरियाणा में भी लागू की जाएगी. यह बात हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कही थी. साथ ही इसका भी जिक्र किया था कि परिवार पहचान पत्र पर हरियाणा सरकार तेजी से कार्य कर रही है. इसके आंकड़ों का उपयोग राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में भी किया जाएगा. कुछ बयान अनुच्‍छेद 370 को लेकर भी आया था. बयान के कुछ अंश को लेकर काफी बवाल मचा था. उनके मंत्रियों के बयान भी कई बार पार्टी के बड़े नेताओं को परेशानी में डाल देते थें और बीजेपी को सफाई देनी पड़ती थी. 

वे ज़मीनी हकीकत जो कहती है महिलाओं के साथ अपराध बढ़े

बीते 5 सालों में हरियाणा में महिलाओं के लेकर अपराध की कई घटनाएं हुई हैं और आंकड़े भी बताते हैं कि हरियाणा में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं. इन घटनाओं के लेकर सरकार के मंत्रियों का रवैया भी ठीक नहीं रहता था.

वे ज़मीनी हकीकत जहां हुआ मंदी का भी असर

देश में आर्थिक मंदी की बात की जाती रही है. इसका असर ऑटो, टेक्‍सटाइल, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर समेत कई अन्‍य सेक्‍टर में भी देखने को मिल रहा है. राज्‍य में भी इसका असर हुआ. गुड़गांव, फरीदाबाद जैसे शहरों में कई ऑटो शो रूम से कर्मचारियों को निकाले गए. छोटे-छोटे उद्योग धंधे पर इसका काफी असर हुआ. पानीपत में कंबल उद्योग से जुड़े व्यापारी अपनी परेशानी बताते रहे हैं. इन सबका असर भी चुनाव में देखने को मिला. 

बेरोजगारी

एक और मंदी की वजह निजी क्षेत्र में नौकरियां जा रही हैं तो दूसरी ओर हरियाणा में बेरोजगारी के मामले में नंबर वन पर पहुंच गया है. खट्टर सरकार के कार्यकाल में राज्य में निवेश भी नहीं हुआ जिससे नौकरियों के अवसर बढ़ते.