श्रीलंका में शांति सेना भेजने की यह थी राजीव गांधी की मजबूरी

डॉ.ब्रह्मदीप अलूने

80 के दशक में श्रीलंका में तमिलों पर अत्याचारों का अंतहीन सिलसिला चल रहा था और उसे वहां की सिंहली समर्थित सरकार (Sinhalese-backed government) का समर्थन प्राप्त था। ये तमिल भारत के दक्षिण राज्य तमिलनाडू  ( TAMILNADU) ) में रहने वाले लोगों के रिश्तेदार थे। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ( RAJIV GANDHI) के मन में श्रीलंका में रहने वाले तमिलों ( TAMIL) के वैधानिक अधिकारों को  लेकर बड़ी सहानुभूति थी ।

भारत की समझाइश के बाद भी जब श्रीलंकाई सरकार ने तमिलों के अधिकारों के प्रति गंभीरता नही दिखाई तो राजीव गांधी ने भारत की साफ्ट नीति को बदल कर श्रीलंका को उन्हीं की भाषा में जवाब देना आरम्भ किया। जनवरी 1985 में  श्रीलंका की एक गश्ती नौका ने भारतीय जल सीमा में प्रवेश कर मछुआरों पर हमला किया जिसमे दो मछुआरे मारे गये।भारतीय नौसेना ने श्रीलंका की एक सशस्त्र नौका दल को पकड़ लिया श्रीलंका को कड़ा संदेश दिया।

श्रीलंका में बसने वाले तमिल ( tamil) मूलतः भारतीय और हिन्दू धर्म ( hindu) को मानने वाले हैं, इन 20 लाख तमिलों में असुरक्षा,अविश्वास और आतंक की भावना विद्यमान थी। तमिलों की सुरक्षा के लिए तमिल आन्दोलन जोरों पर था वहीं फरवरी 1986 में श्रीलंका के राष्ट्र प्रमुख जयवर्धने ( jaiwardhane) ने एक साल के भीतर तमिल आन्दोलन को कुचलने की घोषणा कर दी। इस दौरान पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आई. एस.आई,इस्राएल की मोसाद और अमेरिका की सी. आई. ए. की श्रीलंका में मौजूदगी के संकेत से दक्षिण की और भारत की सुरक्षा खतरे में पड़ गयी। जाफना प्रायद्वीप में तमिलों की बदतर स्थिति पर गंभीर चिंता प्रकट करते हुए भारत ने श्रीलंका से तुरंत युद्द विराम करने और तमिलों को सहायता देने को कहा। जब श्रीलंका ने इसे अनसुना कर दिया तो  भारत ने श्रीलंका को चेतावनी देते हुए अपने विमानों से जाफना में घुसकर भोजन पैकेट गिराए। अपनी सीमा में भारतीय विमानों के घुसने से सदमे में आये श्रीलंका ने भारत को चेतावनी भी दी। श्रीलंकाई सरकार की चेतावनी और विरोध को दरकिनार कर भारत ने उसे यह एहसास कराया की भारत अपनी और अपने नागरिकों की  सुरक्षा के लिए किसी भी देश में प्रवेश कर सकता है।भारत की इस कार्यवाही के कारण ही श्रीलंका सरकार ने भारत के समक्ष घुटने टेके और तमिलों पर सैनिक कार्यवाही उसे बंद करनी पड़ी।

उस दौर में श्रीलंका सरकार ( srilanka government) तमिलों को दबाने और भारत को नीचा दिखाने के लिए पाकिस्तान की सेना का सहयोग लेना चाहती थी और इससे भारत को सुरक्षा के नये खतरों से जूझना पड़ता। भारत को यह अंदेशा था की इस इलाके में पाकिस्तान और अमेरिका के घुसने से भारत की दक्षिण दिशा में नई सुरक्षा चुनौतियों से भारत को जूझना पड़ सकता है। प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देश की सुरक्षा के लिए आक्रामक नीति का सहारा लेकर तमिल समस्या के समाधान के लिए भारतीय सेना को श्रीलंका भेजने से भी गुरेज नही किया।हालांकि राजीव गांधी का यह कदम आत्मघाती साबित हुआ और इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।लेकिन देश की सरहदों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाना चाहिए,यह राजीव गाँधी ने एहसास कराया।

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