प्यास से मौत- नातिन को लेकर 7 कि.मी पैदल चली नानी, कहीं पानी नहीं मिला, बच्ची की मौत

Girl dies due to thrust

प्यास से मौत- यह हमारे देश का हाल है कि यहां आज भी जाने कितने लोग रोज़ाना भूख और प्यास से दम तोड़ते हैं। राजस्थान के जालौर से दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। 45 डिग्री तपते वीरान धोरों में 7 किलोमीटर तक नानी अपनी नातिन के साथ लॉकडाउन में चलती रही। 9 घंटे तक पानी नहीं मिला और आखिर में प्यास के मारे 6 साल की बच्ची की मौत हो गई।

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जालोर जिले के रानीवाड़ा थाना क्षेत्र में एक वृद्धा अपनी 5 साल की नातिन (दोहिती) के साथ पैदल ही अपने रिश्तेदार के घर मिलने के लिए निकली। करीब 12 किलोमीटर का सफर था। लेकिन दिन चढ़ने के साथ गर्मी तेज हुई। सूनसान कच्चे रास्ते में पानी नहीं मिलने से 5 साल की मासूम की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। वृद्धा भी तेज गर्मी में बेहाल होकर बेहोश हो गई।

प्यास से मौत-राहगीर ने सरपंंच को फोन कर बताया

उधर से गुजर रहे एक युवक की नजर तपती रेत पर इन्हें निढाल पड़े देखा तो सरपंच को फोन किया मौके पर पुलिस पहुंची तथा वृद्धा को अस्पताल ले जाकर भर्ती करवाया। जहां उसका इलाज चल रहा हैं। जानकारी के अनुसार रानीवाड़ा तहसील अंतर्गत डूंगरी निवासी वृद्धासुखीदेवी का सिरोही जिले के मंडार के निकट रायपुर में पीहर है। सुखीदेवी अपनी 5वर्षीय नातिन (GrandDaughter) के साथ पीहर गई थी। रविवार 6 जून को सुबह मौसम ठंडा देखकर 6 वर्षीय नातिन के साथ वह वापस बहन के पास जाने के लिए पैदल ही घर से रवाना हो गई। करीब 10-12 किलोमीटर की दूरी तय कर ली थी, इस दौरान दोपहर में गर्मी तेज हो गई। वृद्धा के पास पानी की बोतल भी नहीं थी और जिस मार्ग से गुजर रही थी, वह रेतीला कच्चा मार्ग था।

गर्मी में बच्ची को डिहाइड्रेशन हो गया

water

तेज गर्मी के कारण और पानी नहीं मिलने से वृद्धा और बच्ची को डिहाइड्रेशन की समस्या हो गई और दोनों बेहोश होकर गिर पड़े। काफी देर बाद वहां उधर से गुजर रहे एक चरवाहे ने महिला को देखा तो सूरजवाड़ा सरपंच कृष्णकुमार पुरोहित को फोन किया। बाद में पुलिस भी मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बच्ची का दम टूट चुका था। महिला को पुलिस ने पानी पिलाया और उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया।

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प्यास से मौत-बरसात की बूंदों ने वृद्धा को तो बचा लिया लेकिन तब तक

महिला ने सरपंच और पुलिस के साथ मीडिया को आपबीती बताते हुए कहा कि तेज गर्मी के कारण दोनों बेहोश होकर गिर गए थे। उसे कुछ नहीं सूझ रहा था, लेकिन काफी देर बाद आसमान हल्की बूंदाबांदी शुरू हुई, जिससे उसकी उखड़ती सांसों को सहारा मिल गया। उसकी तो जान बच गई, लेकिन तब तक उसकी नातिन की मौत हो चुकी थी।

शॉर्टकट रास्ता चुना

लॉकडाउन की वजह से अभी आने-जाने के साधन नहीं हैं। रायपुर से 22 किलोमीटर दूर डूंगरी जाने के लिए सुखीदेवी ने 15 किमी का शॉर्टकट रास्ता चुना। जिस रास्ते से दोनों निकलीं, वह रेतीले धोरों वाला वीरान क्षेत्र है। दूसरी ओर सुंधा माता का पहाड़ी क्षेत्र है। यहां न तो खेती-बाड़ी होती है न रास्ता और न ही और कोई आने-जाने वाला। दोनों सफर तो सुबह 8 बजे शुरू किया, लेकिन दोपहर होते-होते 45 डिग्री की गर्मी में आसमान और रेतीली धरती आग उगलने लगी थी। दोपहर एक बजे तक 7 किमी चलने के बाद दोनों निढाल होकर गिर पड़ीं।

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प्यास से मौत-एक कि.मी और चल पाती तो मिल जाता पानी

इतने लंबे सफर पर पैदल निकलने से पहले साथ में पानी नहीं रखा था। सुबह 8 बजे आखिरी बार पानी पीया था। संभवत: दोनों ने खाना भी नहीं खा रखा था। न छांव न आसरा
इस वीराने इलाके में तेज गर्मी से बचने के लिए कहीं छांव तक नहीं मिली। इक्का-दुक्का झाड़ियां थीं, जो छांव देने लायक नहीं। सात किमी के सफर के दौरान 5 किमी के दायरे में कहीं पानी का इंतजाम नहीं था। घटनास्थल से एक किमी आगे और चल जातीं तो शायद दोनों की जान बच जाती। क्योंकि एक किमी आगे कृषि कुएं हैं और करीब दो किमी दूर छितराई आबादी में मदद मिल सकती थी।