जयपुर का प्रदीप अब किन्नर अखाड़े की पीठाधीश पुष्पा माई है..      

   डॉ.ब्रह्मदीप अलूने

 छोटा सा बच्चा जन्मा,आंचल की छांव में, नगाड़े बजे, मिठाई बंटी उस गांव में,

सब कुछ ठीक चल रहा था जीवन की राह में,
दस साल बाद एक घटना घटी गांव में.
लोगों ने कहा ना ये पुरुष है,ना महिला,
बदनामी की सोच से परिवार का मन बहला,
क्योंकि समाज ने उसे नाम दिया था हिजड़ा..

प्रदीप की यह कविता पुष्पा की कही जाती है.वास्तव में प्रदीप से पुष्पा तक के सफर में समाज की संकीर्णता से लड़ने का गजब का जज्बा है, आत्मविश्वास है और साहस हैतमाम परेशानियों से जूझती पुष्पा  रुकने को तैयार नहीं है , समाज के बेहतरी के लिए काम  करने का उसका सफर बदस्तूर जारी हैकिन्नर अखाड़े की पीठाधीश के संघर्षो की ये मार्मिक कथा..

पिंक सिटी जयपुर की रेलवे कॉलोनी के पास स्थित पॉश इलाके( posh colony) बनिपास में रहने वाले नन्हें प्रदीप को नृत्य का बड़ा शौक था।80 के दशक में बाल प्रतिभाओं को निखारने के लिए स्कूलों में बाल सभाएं हुआ करती थी और तीसरे दर्जे में पड़ने वाले प्रदीप का घाघरे चुन्नी में राजस्थान का पारम्परिक  नृत्य खूब पसंद किया जाता था। नन्हें प्रदीप की अपनी बहन के कपड़े पहनने में खास दिलचस्पी होती थी और स्कूल से लौटकर वह माँ की साड़ी शरीर पर लपेटकर कॉलोनी में मस्ती करने चला जाया करता था। कॉलोनी के बच्चें प्रदीप को छेड़ते लेकिन बालपन की हंसी ठिठोली में सब कुछ सामान्य से रहता।पांचवे दर्जे में प्रदीप ने गृह विज्ञान को विषय के रूप में चुना और उसके हाथों का बना खाना इतना स्वादिष्ट और लाजवाब होता की शिक्षक भी वाह करते। प्रदीप अपने खेल टीचर को बहुत पसंद करता था। उसने माँ से जिद की की वो अपने खेल टीचर के यहाँ पढ़ने जायेगा, वास्तव में खेल टीचर का उसको सहलाना बहुत पसंद आता था।एक दिन कॉलोनी के एक लड़के ने जो प्रदीप से तीन चार साल बड़ा था चुपके से प्रदीप को पकड़ लिया और उसके साथ गंदी हरकत की। कॉलोनी के ही एक अन्य लडके ने ये बात प्रदीप के घर आकर बता दी। प्रदीप की बहन ने भाई का बचाव किया लेकिन प्रदीप चुपके से छत पर आकर रोने लगा। उसकी माँ और बहन उसके पास आयी और उसे समझाया। माँ ने कहा जैसा भी हो मेरे जिगर का टुकड़ा है “देशी घी का लड्डू टेड़ा ही सही मेरा तो है।तू हमारा दीप नहीं , घर को महकाने वाला पुष्प है।माँ का अपार स्नेह प्रदीप पर बरस  रहा था लेकिन वो ये जान गयी थी की उनके जिगर का टुकड़ा प्रदीप नहीं पुष्पा है।”

माता- पिता ने स्वीकारा प्रदीप का वजूद 

प्रदीप को परिवार का समर्थन और दुलार में कभी कोई कमी नही आयी । नृत्य का शौकीन वह  बेपरवाह होकर परिवार और रिश्तेदारों के यहाँ शादियों में लड़कियों की ड्रेस में कमाल का डांस करता । 1995 में अपने भाई की शादी में उसने खास लहंगा चुन्नी ली और उसका विशेष मेकअप भी किया गया,पिता के स्नेह और माँ के हमसाये में प्रदीप की शिक्षा तो हो गयी लेकिन उनका साया उठते ही सब कुछ बदल गया। अब प्रदीप का अकेलापन उसे खाने लगा और उसे दोहरी जिंदगी सालने लगी।राजस्थान विश्वविद्यालय से बीए और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संगीत में एमए करने वाले प्रदीप ने साल 2005 में तय कर लिया की अब और नहीं।दोहरे जीवन से परेशान उसने खुलकर समाज का सामना करने का निश्चय किया और समाज में यह घोषणा कर दी की वह किन्नर है और अपने समुदाय की बेहतरी उसके जीवन का लक्ष्य है। पुष्पा का लक्ष्य स्पष्ट था, लेकिन उसे किन्नर समाज के विरोथ का सामना करना पड़ा।कई लोगो  ने पुष्पा पर जबरन किन्नर बनने का आरोप लगाया।पुष्पा को हाई कोर्ट से नोटिस भी मिले, लेकिन उसकी ईमानदारी और सच्चाई ही थी जो अनेक परेशानियों  के बावजूद अपनी एक नई राह बनती चली।”देखो देखो हिजड़ा जा रहा है:,तोहमते लानते और अपमान का घूंट पीते- पीते भी पुष्पा किन्नर समुदाय की बेहतरी के लिए काम करने को  दृढ़ प्रतिज्ञ हैं। पुष्पा ने कई एनजीओ के साथ एक स्वयंसेवक के रुप में काम किया। लेकिन फिर खुद का कुछ करने की ठानी।उसने स्वयं की संस्था  नई भोर की 2007 में शुरुआत की। पुष्पा ने किन्नर समुदाय के स्वास्थ्य पर भी काम किया। 2011 में सरकार के पहचान प्रोजेक्ट से जुड़ी औऱ खुलकर काम किया। नई भोर ने राजस्थान में लगातार बेहतर काम किये है,लेकिन सरकारी मदद अब तक उसे नहीं मिल पाई है  है।जाहिर है एनजीओ के नाम पर पनपे  भ्रष्टाचार से पुष्पा दुखी है और इसीलिये सरकारी मदद से महरूम भी है।

ट्रांसजेंडर के मानव अधिकारों के लिये कर रहे हैं काम

किन्नर समाज के साथ ही समूचे ट्रांसजेंडर कल्याण के लिए प्रतिबद्द पुष्पा ने अपने समुदाय के अधिकारों के लिए लगातार प्रयास करते हुए  4 मई, 2015 को  राजस्थान सरकार से ट्रांसजेंडर के मानव अधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण के लिए एक बोर्ड बनाने की मांग रखी। पुष्पा का प्रयास रंग लाया और18 महीने के लगातार प्रयास के बाद अंततः सरकार ने इसे हरी झंडी दे दी।राजस्थान में ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण के लिए अलग बोर्ड गठित किया गया हैं, ऐसा करने वाला राजस्थान देश का चौथा राज्य है । इससे पहले तमिलनाडु, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में ऐसे बोर्ड गठित किए जा चुके है। राजस्थान में गठित बोर्ड ट्रांसजेडर्स के स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के लिए काम करेगा ।गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने उच्च शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश आवेदन पत्रों में ट्रांसजेंडर्स के लिए अलग कॉलम का प्रावधान किया है और उनके लिए सीटें भी आरक्षित की गई है।लेकिन अभी भी पुष्पा और उनके समुदाय के समक्ष कई चुनौतिया है।क्योंकि इस समुदाय के पास गाने बजाने के अलावा कोई रोजगार का साधन नहीं है।सबसे जरुरी है समाज में इन्हें स्वीकार्यता, इनके साथ होने वाले भेदभाव को दूर करने की एक पहल की जरुरत है।

किन्नरों को क्यों नहीं मिलता पहचान पत्र 

पुष्पा ने इस दर्द को लगातार भोगा कि किन्नरों के पास खुद का कोई पहचान पत्र नहीं होता है, जिसकी वजह से उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन अब राजस्थान में राजस्थान ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड के तहत ट्रांसजेंडर आईडी बनाएं जाएंगे।इस बोर्ड की सदस्य के अनुसार एक किन्नर को पहले शपथपत्र प्रस्तुत करना होगा, जिसे हर जिले के विशेषज्ञ को देना होगा। कमेटी के कार्यकर्ता पहचान पत्र के लिए फॉर्म उपलब्ध कराएंगे।.पुष्पा कहती है की  हम इसके लिए विभिन्न जिलों में  2से 3 दिन के लिए कैम्प भी लगाएंगे, जिससे एक ही छत के नीचे ट्रांसजेंडर परिचय पत्र बनाए जा सकेंगे। ये परिचय पत्र जिला कलेक्टर के हस्ताक्षर  से जारी होंगे और इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मान्य किया जायेगा। ट्रांसजेंडर आईडी मिलने के बाद किन्नरों को बैंक अकाउण्ट खोलने, चिकित्सा सुविधा, और भी कामों में सहूलियत होगी इसके साथ ही  ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड समुदाय से जुड़े अन्य काम जैसे
कम्युनिटी हॉल का निर्माण , आवास योजना, बीपीएल कार्ड योजना, पेंशन योजना, शिक्षा ,प्रौढ़  शिक्षा  , सांस्कृतिक , खेलकूद , बच्चे गोद लेने की प्रकिया का सरल बनाना, स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं , सेक्स सम्बंधी मामले , आदि के लिए भी काम करेगा।हालांकि पुष्पा को इस बात का मलाल रहा  कि राजस्थान में ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष जिस मंत्री  मंत्री को बनाया गया था वह  किन्नर समुदाय से नहीं था।बोर्ड की पहली मीटिंग में पुष्पा ने बड़ी बेबाकी से कहा की बोर्ड का अध्यक्ष भी किन्नर बिरादरी से ही हो।यदि ये और कोई  हमारे अध्यक्ष है तो कुर्सी पर किन्नरों जैसे वस्त्र पहनकर बैठे जिससे किन्नर समाज का अध्यक्ष पर भरोसा कायम हो सके।

मार्च 2015 में प्रख्यात किन्नर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को पुष्पा ने अपना गुरु बनाया। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी अब किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर भी है। पुष्पा माई  कहती है-किन्नर अखाडा ट्रांसजेंडर समुदाय की धार्मिक और सामाजिक स्वीकार्यता के लिए मिल का पत्थर साबित होगा। वे जयपुर में ही कुलदेवी बहुचरा माता का मंदिर बनवाने की इच्छुक हैं, जिसमें बुजुर्ग किन्नरों के लिए एक आश्रम होगा साथ ही एक गौशाला भी होगी। पुष्पा के प्रयास से राजस्थान में पहली बार एलजीबीटी प्राइड वॉक आयोजित हो चुका है, जिसमें पिंक सिटी की सड़कों पर पहली बार लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर लोगो नें अपनी एकता दिखाते हुए एक प्राइड वॉक की। बहरहाल किन्नरों की  सामाजिक न्याय की लड़ाई लम्बी है, लेकिन पुष्पा माई ने मतदाता परिचय पत्र में अपना नाम प्रदीप,पुष्पा दर्ज कराकर किन्नर समुदाय के लिए पहचान के क्रांतिकारी तरीके अपनाएं है  और अपने जज्बे से ये साबित भी  किया है की जमानें को जो चाहे कहने दो,कोशिश करने वालों की हार नही होती।

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