बच्चों को तनाव भरे माहौल से बचाएं, शारीरिक और मानसिक पोषण दें

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बच्चों को तनाव से बचाने के लिये पेरेंटस को मौजूदा दौर में सज़ग रहना बेहद ज़रूरी है। आज की भागमभाग वाली लाइफ में उन्हें स्ट्रेस, एंग्जाइटी से बचाना बड़ी चुनौती है। घर के माहौल का असर बच्चों पर बहुत ज्यादा होता है। ऐसे में उन्हें खुशनुमा माहौल में जीने दें। माता-पिता का प्यार -दुलार और प्रेमभरी समझाइश उन्हें मानसिक पोषण देती है।
ऐसा इसलिये क्योंकि हमारे जीवन के तौर-तरीक़ों में आए बदलावों के चलते इन दिनों बच्चे शारीरिक समस्याओं के साथ-साथ मानसिक प्रॉब्लम्स का भी सामना कर रहे हैं. एन्ज़ाइटी (चिंता), मूड स्विंग, डिप्रेशन, ईटिंग डिस्ऑर्डर, अटेंशन ‌डेफ़िसिट हाइपरऐक्टिविटी डिस्ऑर्डर (एडीएचडी) जैसी समस्याएं बच्चों में आम होती जा रही हैं. पियर प्रेशर, जेनिटिकल और बायोलॉजिकल कारण इन समस्याओं के मूल हैं. तनाव भरे माहौल में रहने वाले बच्चे जल्द ही इसका आसान शिकार बन जाते हैं. तो यह आपकी ज़िम्मेदारी है कि बच्चों को स्वस्थ और तनावरहित माहौल दें.

अगर दिखें लक्षण

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बच्चे में अगर तनाव चिंता और अवसाद के लक्षण दिखने लगें तो जल्द से जल्द ट्रीटमेंट शुरू करा दें, ऐसा करके आप उसे आधुनिक जीवनशैली की इस सबसे बड़ी समस्या से बचा सकेंगे. बच्चों से संवाद की डोर टूटने न दें. ख़ासकर यदि आपका बच्चा कुछ ज़्यादा ही संवेदनशील हो. उन्हें बहुत प्यार से हैंडल करने की ज़रूरत होती है.  माता-पिता का प्यार भरा रवैया बच्चों के सही विकास में अहम योगदान देता है।

शारीरिक पोषण का रखें ख्याल

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बच्चों के सही विकास के लिए सबसे ज़रूरी पोषक तत्वों में एक है-आयरन. 7 से 12 महीने के बच्चे को रोज़ाना 11 एमजी, 1 से 3 साल के बच्चों को 7 एमजी, 4 से 8 साल तक के बच्चों को 10 एमजी और 9 से 13 साल के बच्चों को 8 एमजी आयरन की ज़रूरत होती है. वहीं 14 से 18 साल के लड़कों और लड़कियों को क्रमश: 11 और 15 एमजी आयरन की आवश्यकता होती है. खानपान में इस पोषक तत्व की कमी के चलते बच्चे जल्द थकान का अनुभव करते हैं. उनका शारीरिक विकास भी ठीक से नहीं हो पाता. कम भूख लगना, सांसों का तेज़ चलना, चिड़चिड़ापन और बार-बार इन्फ़ेक्शन होना जैसी समस्याएं उन्हें परेशान कर सकती हैं.

डॉक्टर की सलाह से दें सप्लीमेंटस

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बच्चे के शरीर में आयरन और विटामिन्स की कमी न होने पाये इसके लिये उनको चार महीने की उम्र से आयरन सप्लिमेंट देना शुरू करें. ऐसा तब तक जारी रखें, जब वह दिन में दो बार आयरन से भरपूर खाना न खाना शुरू करें। एक साल से पांच साल के बच्चों को रोज़ाना 710 एमएल से अधिक दूध न पीने दें. उनकी डायट में विटामिन सी की अधिकता वाली चीज़ें शामिल करें. खट्टे-मीठे फल इस काम में आपकी मदद कर सकते हैं. विटामिन सी डायटरी आयरन के अवशोषण में मदद करता है.  उन्हें नींबू, संतरा और प्लम, खुमानी और अमरूद जैसे सीज़नल फ्रूटस खिलाएं।