कोरोना रोकने के लिए पीएम ने निर्णायक कदम उठाने को कहा, पंजाब ने पेशा आधारित वैक्सीनेशन की मांग की

Coronavaccine

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना रोकने के लिए कड़े और निर्णायक कदम उठाने को कहा। पीएम ने देश के कुछ हिस्सों में कोविड-19 के बढ़ते मामलों पर बुधवार को चिंता जताई और इसे फिर से फैलने से रोकने के लिए तीव्र और निर्णायक कदम उठाने का आह्वान किया। कोविड-19 महामारी की वर्तमान स्थिति और देश भर में कोरोना के खिलाफ जारी टीकाकरण के सिलसिले में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से डिजिटल माध्यम से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, पंजाब और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कोरोना के मामले बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि देश के 70 जिलों में पिछले कुछ हफ्तों में कोरोना मामलों की दर में 150 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।

कोरोना रोकने के लिए देशव्यापी कदम उठाने की ज़रूरत-पीएम

उन्होंने कहा, ‘अगर हम इस बढ़ती हुई महामारी को यहीं नहीं रोकेंगे तो देशव्यापी संक्रमण की स्थिति बन सकती है। हमें कोरोना की इस उभरती हुई ‘सेकंड पीक (दूसरी शीर्ष स्थिति)’ को तुरंत रोकना ही होगा। इसके लिए हमें तीव्र ओर निर्णायक कदम उठाने होंगे।’

पंजाब में बढ़ते मामलों पर मुख्यमंत्री ने रखी यह मांग

Punjab Chief Minister Captain Amarinder Singh addresses a press conference in Chandigarh, on May 23, 2019. (Photo: IANS)
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पंजाब में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में वृद्धि के बीच मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बुधवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह कोविड-19 टीकाकरण की अपनी रणनीति की समीक्षा करे और कुछ क्षेत्रों में सभी आयु के लोगों को टीका देने की व्यवस्था करे। टीकाकरण अभियान पर मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की डिजिटल बैठक के दौरान सिंह ने पेशा आधारित टीकाकरण की मांग की। उन्होंने कहा कि स्कूल कालेज के छात्रों और शिक्षकों, न्यायाधीशों, बस चालकों और कंडक्टरों, पंच और सरपंच, महापौर, निकाय प्रमुखों, पार्षदों, विधायकों और सांसदों को टीका दिया जाना चाहिए। सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने अदालतों और स्कूलों को खोलने की वकालत की।

बढ़ रहे हैं मामले, कोरोना रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग

राज्य में उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 12,616 हो गई है और संक्रमण के मामलों की दर बढ़कर पांच प्रतिशत से अधिक हो गई है। प्रधानमंत्री के साथ हुई समीक्षा बैठक के दौरान सिंह ने कहा कि उन क्षेत्रों में जहां साप्ताहिक जांच में संक्रमण की दर दोगुनी हो रही है वहां सभी उम्र के लोगों को टीका दिया जाना चाहिए।

भारत में कोविड-19 टीके की औसतन 6.5 फीसदी खुराक बर्बाद हो रही है

कोरोना रोकने के लिए बने टीके की कुछ खुराकें हो रही हैं बर्बाद

जबकि तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश में यह बर्बादी क्रमश: 17.6 प्रतिशत और 11.6 प्रतिशत है। केंद्र ने उपरोक्त जानकारी देते हुए कोविड-19 टीके की खुराक का किफायती तरीके से इस्तेमाल का आह्वान किया है। संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि अब तक देश में टीके की 3.51 करोड़ खुराक दी गई है जिनमें से 1.38 करोड़ खुराक 45 से 60 साल की उम्र के बीच गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को दी गई है। उन्होंने बताया कि 15 मार्च को दुनिया में कोविड-19 की 83.4 लाख खुराक दी गई जिनमें से 36 प्रतिशत खुराक अकेले भारत में दी गई।

इन राज्यों में टीके की बर्बादी ज़्यादा

भूषण ने बताया कि पांच राज्यों- तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक व जम्मू-कश्मीर में टीके की खुराक की बर्बादी राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा, ‘राज्यों को संदेश दिया गया है कि कोविड-19 के टीके अमूल्य हैं। ये लोगों की सेहत की बेहतरी के लिए है और इसलिए किफायती तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए, टीके की बर्बादी को बड़े पैमाने पर कम करने की जरूरत है। टीके की बर्बादी कम होने का अभिप्राय: है कि आप और अधिक लोगों का टीकाकरण कर सकते हैं और इससे संक्रमण की कड़ी को तोड़ने की अधिक संभावना होगी जो बढ़ रही है।’