OPS in Himachal elections- हिमाचल चुनाव में कितना बड़ा मुद्दा है ओपीएस ? पढ़ें रिपोर्ट

OPS in Himachal elections
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OPS in Himachal elections – हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) बीजेपी के गले की फांस बन गया है जबकि यह विपक्ष के हाथ में बड़ा हथियार बन गया है। विधानसभा चुनाव में प्रदेश के कर्मचारी अहम भूमिका अदा करते हैं। करीब पौने तीन लाख कर्मचारी और उनके परिवारों के वोट की अगर बात करें तो यह करीब 8 से 9 लाख मतदाताओं का आंकड़ा तैयार करते हैं। ऐसे में हर एक विधानसभा क्षेत्र में इनकी भूमिका काफी अहम हो जाती है। अब जब सत्तारूढ़ बीजेपी पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करने पर फैसला नहीं ले पाई तो विपक्ष ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना लिया है।
ओपीएस की मांग को लेकर पहले से ही धरना -प्रदर्शन चल रहे थे, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने इस आग में घी डालने का काम कर दिया, और इसमें कोई संशय नहीं है कि कांग्रेस इसका फायदा भी उठा ले जाये।


अब आपको बताते हैं आखिर ओपीएस है क्या?


ओपीएस में पेंशनर्स को कर्मचारी के रूप में अंत में ड्रॉ किए वेतन का 50 फीसदी ही मिलता है। आसान शब्दों में समझें कि अगर किसी कर्मचारी की आखिरी सैलरी 2 लाख रुपये है तो उसे एक लाख रुपये महीना पेंशन के तौर पर मिलते रहेंगे।
यह है पुरानी पेंशन स्कीम की व्यवस्था। इसके ठीक दूसरी तरफ एनपीएस एक कंट्रीब्यूटरी स्कीम है। इसमें कर्मचारियों को अपने वेतन का दस प्रतिशत हिस्सा देना होता है। सरकार कर्मचारी के एनपीएस खाते में 14 प्रतिशत की भागीदारी डालती है। आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में साल 2004 से पहले नियुक्त 1,90,000 कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन स्कीम का लाभ मिल रहा है। आंकड़ों में थोड़ा उतार-चढ़ाव हो सकता है। जबकि इसके बाद नियुक्त करीब 1.5 लाख कर्मचारियों को एनपीएस के तहत ही पेंशन मिलेगी। इसीलिये यह डेढ लाख कर्मचारी पुरानी पेंशन स्कीम की मांग कर रहे हैं। जबकि सरकार का कहना है कि ओपीएस से सरकारी खजाने पर करीब 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सालाना बोझ पड़ेगा।

बीजेपी कांग्रेस को ठहरा रही जिम्मेदार

ओपीएस (OPS in Himachal elections) की बहाली नहीं करने को कांग्रेस बड़ा मुद्दा बना चुकी है। यह तक ऐलान कर चुकी है कि सत्ता में आती है तो पहली कैबिनेट बैठक में ही इसे बहाल कर देगी। जयराम सरकार ने इस पर खूब मंथन किया, मगर सरकार प्रदेश की आर्थिक तंगहाली के बीच इस पर फैसला नहीं ले सकी। पेंशनरों की संयुक्त सलाहकार समिति (जेसीसी) बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। बीजेपी नई पेंशन स्कीम लागू करने के कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रही है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का कहना है कि यह स्कीम जब हटाई गई, तब राज्य में कांग्रेस ( वीरभद्र सिंह) की ही सरकार थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को हिमाचल सरकार के कर्मचारियों से माफी मांगनी चाहिए।
हालांकि, जयराम सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर न्यू पेंशन स्कीम में कई अन्य लाभ जोड़ने की बात की।