Omicron is ‘killing people’-who बोला-इसे हल्के में लेने की गलती न करें

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Omicron is ‘killing people’-ओमिक्रॉन वैरिएंट ने दुनिया भर में कोरोना की सुनामी ला दी है। इसकी वजह से दुनिया भर के हेल्थ सिस्टम पर पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ रहा है। WHO चीफ टेड्रोस गेब्रेयेसस ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए दुनिया को चेताया है कि ओमिक्रॉन की वजह से दुनिया भर में लोगों की जान जा रही है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ओमिक्रॉन कोरोना के दूसरे वैरिएंट के मुकाबले कम घातक है।

ओमिक्रॉन दुनियाभर में लोगों की जान ले रहा


WHO चीफ टेड्रोस ने कहा है कि ओमिक्रॉन दुनियाभर में लोगों की जान ले रहा है। वैक्सीनेटेड लोगों के लिए ओमिक्रॉन डेल्टा के मुकाबले कम खतरनाक साबित हो रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे हल्के में लेना चाहिए। पिछले वैरिएंट की तरह ही ओमिक्रॉन लोगों को अस्पताल में भर्ती कर रहा है और मार रहा है।

टेड्रोस ने कहा कि नया वैरिएंट रिकॉर्ड संख्या में लोगों को संक्रमित कर रह है। ये कई देशों में पिछले वैरिएंट डेल्टा से भी तेजी से फैल रहा है। कोरोना मामलों की सुनामी इतनी बड़ी और तेज है कि दुनियाभर के हेल्थ सिस्टम को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

वैक्सीन का सही डिस्ट्रीब्यूशन न होना सबसे बड़ी कमी


WHO चीफ ने वैक्सीन के असमान वितरण को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने वैक्सीन के लिए अमीर देशों के लालच पर कहा- वैक्सीन का सही तरीके से डिस्ट्रीब्यूशन न होना पिछले साल सबसे बड़ी कमी रही। कुछ देशों में जहां जरूरत से ज्यादा हेल्थ सुविधाएं थीं, वहीं कुछ देश कमियों का सामना कर रहे हैं।

WHO चाहता था कि हर देश सितंबर 2021 तक अपनी 10% और दिसंबर 2021 तक 40% आबादी को वैक्सीन दे दे, लेकिन 194 देशों में से 92 देश तय किए गए टारगेट से चूक गए। इसका एक बड़ा कारण वैक्सीन की कमी थी। अब हमारा लक्ष्य है कि 2022 में जून-जुलाई तक हर देश में 70% वैक्सीनेशन कम्प्लीट हो जाए। वैक्सीन रोल-आउट बिगड़ने से 109 देश फिर से इस टारगेट से पीछे रह जाएंगे।

Omicron is ‘killing people’

टेड्रोस ने कहा- वैक्सीन का असमान वितरण लोगों और नौकरियों की हत्या करना है। कुछ देशों में लोगों को बूस्टर डोज देने से महामारी खत्म नहीं होगी, जबकि अरबों लोग अब भी वैक्सीन की पहली खुराक के लिए जूझ रहे हैं।

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WHO में क्लिनिकल मैनेजमेंट की हेड जेनेट डियाज ने कहा है कि शुरुआती रिसर्च से पता चला है कि डेल्टा के मुकाबले ओमिक्रॉन से हॉस्पिटल में एडमिट होने का खतरा कम रहता है। हालांकि ओमिक्रॉन को लेकर अब तक जितना भी रिसर्च डेटा मिला है, वह युवाओं से इकट्ठा किया गया है। बुजुर्गों के लिए यह वैरिएंट कितना खतरनाक है, इस पर और रिसर्च होना है।