बाबा बसैवन की महिमा, दूध से होता है अभिषेक

बाबा बसैवन की महिमा अपरम्पार है। बिहार के हाजीपुर से 12 किलोमीटर की दूरी पर पानापुर लंगा गाँव में बाबा बसावन का भव्य मंदिर है लेकिन इस मंदिर की खासियत और बाबा बसावन की महिमा ऐसी है कि श्रद्धालुओं का हुजूम दूध का पात्र लिए सुबह से ही मंदिर प्रांगण में लाइन लगाकर खड़ा नज़र आता है । सबको इंतजार है मंदिर के गर्भ गृह में पहुँचने का। मंदिर में बाबा बसावन का अभिषेक दूध से कर के भक्त अपने को धन्य मानते हैं । यही वजह है कि गर्भ गृह में दूध की नदी बहती है। पहले यहाँ चढ़ाया गया दूध बर्बाद हो जाया करता था। बाद में चैनल बना कर इस दूध को संग्रहीत किया जाना शुरू हुआ। अब यह दूध प्रसाद के तौर पर गांव वालों में बंटता है।

ऐसे एकत्र करते हैं दूध

बा बसैवन पर चढ़ने वाले दूध को एक बड़े टैंक में इकठ्ठा किया जाता है। उस टैंक से नल के जरिये बड़े पात्रों में भर दिया जाता है। यहाँ से दूध को भक्तों में प्रसाद के तौर पर वितरित किया जाता है। दूध को प्रसाद के तौर पर भक्तों में भेंट स्वरुप काफी कम कीमत ली जाती है। कम मात्रा में दूध को कम कीमत पर दिया जाता है जबकिर ज्यादा दूध लेने पर भारी कीमत देनी होती है। 5 लीटर तक दूध प्रसाद के रूप में लेने पर 10 रूपए प्रति लीटर और इससे ज्यादा दूध लेने पर 20 रुपये प्रति लीटर दूध भक्तों को दिया जाता है। इसके लिए एक रसीद काटी जाती है और कतार लगाकर भक्त प्रसाद के लिए अपनी बारी का इंतजार करते हैं।

गांव की भलाई में खर्च होता है पैसा

इस दूध रूपी प्रसाद से जो आमद होती है उसे समाज के कल्याणकारी कार्यों में लगाया जाता है। इसी पैसे से बाबा का विहंगम मंदिर बना है। मंदिर के विस्तार के साथ गाँव में सामाजिक कार्यों को भी नया आयाम दिया जा रहा है। बाबा बसैवन पर चढ़ने वाले दूध के पैसे से बाबा बसैवन विद्यालय खुला है जहां आठवीं तक की पढ़ाई होती है। गाँव के साढ़े तीन सौ बच्चे इस विद्यालय में पढ़ते है। स्कूल के संचालन से लेकर शिक्षकों के वेतन तक सभी खर्च बाबा बसावन की महिमा से ही चलता है।
गाँव में सभी बच्चों को दूध मिलता है और यह यहाँ की सबसे अच्छी बात है। आर्थिक रूप से कमजोर घरों के बच्चों को भी पर्याप्त दूध पीने को मिलता है। यानी 10 रुपये लीटर शुद्ध दूध गांव के लोगों को उपलब्ध है। ऐसे में इस गाँव में कोई भी कुपोषण के शिकार नहीं है।

baba basawan temple

मानर की थाप पर झूमते हैं श्रद्धालु

मानर की थाप और बाबा बसैवन के जयकार उद्घोष के बीच संगत झूमती है। इसी ध्वनि के बीच दूध चढ़ाने का सिलसिला पूरे दिन चलता है। बाबा बसैवन ट्रस्ट बनाकर गाँव के लोग समाज कार्य को गति देने में जुटे हैं। यहां के कन्या उच्च विद्यालय में भी इस मंदिर से सहायता राशि जाती है। जिससे बेटी पढ़ाओ अभियान को गति मिली है।

baba basawain

गांव में कमजोर वर्ग के लोगो को न सिर्फ आर्थिक मदद दी जाती है बल्कि कमजोर तबके के लोगों को सप्ताह में 5 लीटर दूध निशुल्क दिया जाता है इसके साथ ही उन्हें चावल और आटा भी निशुल्क मुहैया कराया जाता है। कमजोर तबके के लोगो के यहां शादी -विवाह से लेकर बीमारी तक में आर्थिक मदद की जाती है।

विवाद निपटाने के लिये है मंच

इस दूध से समाज कल्याणकारी कार्य तो हो ही रहे हैं यहां वाद विवाद निपटारा मंच भी खोला गया है,जिससे यदि गाँव में जमीं -जायदाद या किसी अन्य कारण को लेकर कोई मनमुटाव हो तो उसे यहाँ ही दूर कर लिया जाता है। स्थानीय लोगों में बाबा बसावन ट्रस्ट के अध्यक्ष और सचिव का रुतबा काफी ऊंचा है।

 

 

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