MilkhaSinghJi और जीव मिल्खा- खेल जगत में इकलौती बाप-बेटे की जोड़ी, जिसे पद्मश्री सम्मान मिला

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MilkhaSinghJi और जीव मिल्खा की जोड़ी के नाम भी एक रिकॉर्ड दर्ज है। देश में पद्मश्री पाने वाले खिलाड़ियों में मिल्खा सिंह और उनके बेटे जीव मिल्खा सिंह इकलौती ऐसी बाप बेटे की जोड़ी थी, जिन्हें उनकी खेल उपलब्धियों के पद्मश्री अवार्ड मिला है। जीव मिल्खा सिंह ( Jeev Milkha Singh) इंटरनेशनल स्तर के गोल्फर ही नहीं बल्कि देश के इकलौते गोल्फर हैं, जिन्होंने दो बार 2006 और 2008 में एशियन टूर आर्डर ऑफ मेरिट जीता है। वह यूरोपियन टूर, जापान टूर और एशियन टूर में खिताब जीत चुके हैं। जीव मिल्खा सिंह अपने करियर में 28वीं विश्व रैंकिंग हासिल की थी, इसके ऊपर अभी तक किसी भारतीय गोल्फर की वर्ल्ड रैंकिंग नहीं रही है। उनकी इन्हीं खेल उपलब्धियों के लिए भारत सरकार उन्हें भी पद्मश्री सम्मान दे चुकी है।

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पूर्व भारतीय महिला वॉलीबॉल कप्तान रह चुकी हैं मिल्खा की पत्नी निर्मल कौर

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मिल्खा सिंह का पूरा परिवार खेल को समर्पित रहा है। उनकी पत्नी निर्मल कौर पूर्व भारतीय महिला वॉलीबॉल कप्तान रह चुकी है। उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है। जीव मिल्खा सिंह इंटरनेशनल स्तर के गोल्फर हैं। मिल्खा सिंह की बेटी सोनिया ने लिखी उनकी आत्मकथा द रेस ऑफ माई लाइफ लिखी है।

MilkhaSinghJi ने एथलीट हिमा दास को दिये थे टिप्स

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मिल्खा सिंह ने पहले देश के लिए मेडल जीते और फिर अलग-अलग मंचों से जुड़कर खेल व खिलाड़ियों को प्रमोट किया। इतना ही नहीं मिल्खा सिंह ने कुछ ही महीने पहले एथलीट हिमादास को टोक्यो ओलंपिक -2021 में मेडल जीतने के टिप्स दिए थे। मिल्खा सिंह ने उस वक्बत कई मीडिया हाउसेज़ को अपने इंटरव्यू में बताया था कि मैं खुद 400 मीटर रेस का धावक रहा हूं, इसीलिए मैंने हिमादास फोन पर तैयारी के टिप्स दिए हैं।

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खिलाड़ियों को बेहतरीन कोचिंग की वकालत करते थे

मिल्खा सिंह ने बताया कि उन्होंने हिमादास के कोच से बात कर उन्हें भी बताया है कि वह कैसे उनकी ओलंपिक के लिए तैयारी करवाएं। मिल्खा बताते थे कि आज देश में बेहतर खेल सुविधाएं हैं, हमारे जमाने में इतने अच्छे खेल मैदान तो दूर खेलमंत्री तक नहीं होता था, बावजूद इसके हमने बेहतरीन कोशिश की। अब सब सुविधाएं मिल रही हैं तो खिलाड़ियों से मेडल की उम्मीद की जा सकती है।