मेडिसिनल मशरुम कीड़ा जड़ी की खेती से बदलेगी मालवा की तस्वीर, एक कमरे में खेती और करोड़ों का मुनाफा

डॉ. ब्रहमदीप अलूने

मेडिसिनल मशरुम कीड़ा जड़ी (Medicinal Mushroom Worm Studded) मध्यप्रदेश के मालवा की तस्वीर बदलने वाली है। एक छोटे से कमरे में खेती और उससे करोड़ों का मुनाफा। उज्जैन की गैर सरकारी संस्था आदित्य निर्मल सोसायटी ने मालवा में खेती को लेकर व्यापक ट्रेनिंग की योजना बनाई है। इस ट्रेनिंग का असर व्यापक हो सकता है और आने वाले समय में मालवा सोयाबीन के बाद अन्य क्षेत्र का भी हब बन सकता है।

डॉ. क्षितिज गुप्ता ने मेडिसिनल मशरुम कीड़ा जड़ी की खेती का स्टार्ट अप शुरू किया

दरअसल उज्जैन निवासी और सूक्ष्म जीवविज्ञान (Microbiology) के एक प्राध्यापक डॉ. क्षितिज गुप्ता ने मेडिसिनल मशरुम कीड़ा जड़ी की खेती का स्टार्ट अप शुरू किया है और इसे व्यापक रूप देने के लिए आदित्य निर्मल सोसायटी आगे आई है। सोसायटी के निदेशक मधुसूदन दूबे मालवा के विभिन्न इलाकों में इस खेती को बढ़ावा देने के लिए बेहद उत्साहित है। मशरूम कीड़ा जड़ी की खेती के लिए बहुत कम जगह की जरूरत होती है।

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मेडिसिनल मशरुम कीड़ा जड़ी कैंसर समेत कई रोगों के इलाज में कारगर

डॉ क्षितिज गुप्ता

इस मशरुम को स्वास्थ्य की दृष्टि से बहु उपयोगी समझा जाता है। यह कैंसर, अस्थमा, कोलेस्ट्रॉल, किडनी और लीवर की बीमारी से निपटने के लिए राम बाण माना जाता है। यह इम्युनिटी बूस्टर यानी रोग प्रतिरोधक भी है। डॉ. क्षितिज गुप्ता ने इसके उत्पादन के लिए  10*10 के कमरे को एक लैब में तब्दील कर दिया है और इसे विभिन्न सेक्शन में अलग अलग करके इसका उत्पादन का कार्य शुरू किया है।

Parasite fungal है यार्सागुम्बा

कीड़ाजड़ी एक परजीवी फफूंद (Parasite fungal) है जो कैटरपिलर (Caterpillar) पर हमला करता है और मिट्टी के नीचे उसकी ममी बना देता है। बाद में मरे हुए कैटरपिलर के सिर से एक फफूंदी उगती है जिसे यार्सागुम्बा (Yarsagumba) कहते हैं,तिब्बती भाषा में इसे कहते है गर्मियों की घास। यह फफूंदी हिमालयन रीजन में बहुतायत मात्रा में उगती है। चीन,जापान, मलेशिया, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों में मेडिसिनल मशरुम कीड़ा जड़ी की खेती  को तेजी से अपनाया गया है और इससे वहां के किसानों को भरपूर मुनाफा हो रहा है।

Madhusudan dubey

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मेडिसिनल मशरुम कीड़ा जड़ी की खेती है मुनाफे का सौदा

डॉ गुप्ता का कहना है इस स्टार्टअप को आगे बढ़ाकर अन्य विदेशी दुर्लभ मशरुम की खेती एवं अन्य माइक्रोबायोलॉजी आधारित स्टार्टअप भविष्य में भारत की खेती की दशा और दिशा बदल सकता है और मालवा में इसका असर कुछ ही सालों बाद देखने को मिलेगा। खास कर किसान परिवारों के उच्च शिक्षित युवा मशरुम कीड़ा जड़ी की खेती कर अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए आगे आ रहे है।