मदरसों से निकल रही आतंक की पौध को क्या रोक पाएंगे इमरान …

 डॉ.ब्रह्मदीप अलूने

मदरसों पर कैसे नकेल कस पाएंगे इमरान?

मदरसों से निकल रही आतंक की पौध पर कैसे लगेगी रोक?

मदरसों से निकल रही आतंक की पौध पर रोक लगाना पाकिस्तान के लिये बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। देखा जाये तो पाकिस्तान आंतरिक स्तर पर भी आतंकवाद से खौखला होता जा रहा है। वहीं भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बातचीत की पेशकश की है।दोनों देशों के बीच तनाव का प्रमुख कारण पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद है और स्वयं इमरान खान भी इस बात से वाकिफ है।ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या वे अपने देश में आतंकवाद पर लगाम लगाकर भारत से संबंधों को सामान्य या बेहतर कर सकते हैं।दरअसल आतंकवाद पाकिस्तान की विदेश नीति का अंग है और अब यह उस देश की व्यवस्था में पुख्ता स्थान बना चूका है।अब आतंकवाद की पौध पाकिस्तान के शिक्षा स्थलों से तैयार हो रही है और उन पर सरकारी नियंत्रण रखना मुश्किल नज़र आता है।

मदरसों की भूमिका क्या है

madarasa in pakistan

इस सदी में दुनिया भर में हुए आतंकी हमलों के तार पाकिस्तान से जुड़ने,पाक में आतंकी हमलों के बढ़ने और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते पाक में पिछले कुछ समय से मदरसे सरकार के निशाने पर रहे है।हालांकि पाक में सेना और आईएसआई ने मदरसों को आतंकी केन्द्रों में ढालने में महती भूमिका निभाई है और इसका दुरूपयोग भारत और अफगानिस्तान में कई आतंकी हमलों में भी किया है।जुलाई और अगस्त 2008 में अफगान ख़ुफ़िया सूत्रों ने अमेरिका को जानकारी दी थी कि करजई की हत्या की साजिश रचने वाले पाक प्रशिक्षित तीन आतंकवादियों को आईएसआई के एक नामी अधिकारी ने तैयार किया और उन्हें कराची के जर्ब मोमिन शिविर में प्रशिक्षित किया गया।रिपोर्ट में कहा गया कि हमलावर फिलिस्तीन और अरब थे और वे उस समय करजई पर हमला करना चाहते थे जब वे काबुल की मस्जिद या लक्जरी सेरेना होटल में हो।इसके साथ ही विकिलीक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार गुल समेत आईएसआई के कई मौजूदा और पूर्व अधिकारी पेशावर के पास मदरसों में गए और वहां फिदायीन हमलों के लिए लड़कों को नियुक्त किया था।

मदरसों पर इन देशों की राय

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लगभग दो दशकों से अधिकांश आतंकी हमलों के तार पाकिस्तान से जुड़ते रहे है और हमलावरों ने पाक के मदरसों में ही शिक्षा पाई है।मुंबई हमलों के आतंकी पाक मदरसों से ही निकले थे।इस्ताम्बुल के यहूदी उपासना गृह में हमले के बाद वहां पर पाकिस्तान का पासपोर्ट मिला था। कनाडा ने दर्जनों संदिग्ध बताएं है जिन्हें पाक में ट्रेनिंग मिली है।चीन साफ कर चुका है कि झिनजियांग प्रान्त में मुस्लिम चरमपंथियों के उभरने का कारण पाक के मदरसे है।मलेशिया और इंडोनेशिया इस बात से डरे हुए है की पाक मदरसों से निकलने वाले उनके नागरिक खतरनाक आतंकी वारदातों को अंजाम दे सकते है। उगांडा सरकार ने पाक के मदरसों में पढ़ने आने वाले अपने नागरिकों के प्रति गहरी चिंता जताई है। ब्रिटेन,अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे अनेक देश पाकिस्तानी नागरिकों को वीजा देने में खास एहतियात बरतते रहे हैं।

क्यों निशाना बन रहे हैं पब्लिक स्कूल

Karachi_students_rally againt attack

साल 2001 में अमेरिका पर आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तान पर दबाव पड़ा था  की वह कट्टरपंथ को बढ़ाने वाले केन्द्रों को बंद करें।अमेरिकी हमलों से बचने के लिए परवेज मुशर्रफ से इसकी आधी अधूरी शुरुआत करते हुए कहा था कि जो मदरसा दहशतगर्दी या आतंकवाद सिखाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।देश में कट्टरपंथ के खिलाफ बिखरी हुई यह शुरुआत कारगर नहीं हुई और पाक हुकूमत ने मदरसों के पाठ्यक्रम में सुधार जैसी अतिवाद विरोधी मुहिम के दूसरे पहलुओं में खास कामयाबी हासिल नहीं की।इन मदरसों के प्रभाव में पले बढ़े तालिबान ने सेना की दोहरी भूमिका से उत्तेजित होकर 16 दिसम्बर 2014 को पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल एंड कॉलेज पर हमला करके 132 छात्रों और 9 कर्मचारियों की बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी थी।

मदरसों से निकल रही पौध से खुद डर रहा पाकिस्तान

pakistani madrasa

इसके बाद  पाकिस्तान में स्कूलों पर नए सिरे से आतंकवादी हमलों की साजिश की खबरों के बीच पाकिस्तानी अधिकारियों ने आतंकवाद में कथित रूप से शामिल मदरसों के खिलाफ देशव्यापी अभियान में 182 मदरसों को बंद कर दिया था।पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा के मदरसों को बंद किया गया है,क्योंकि चरमपंथ को बढ़ावा देने में उनकी कथित संलिप्तता थी।पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मदरसों के पंजीकरण की प्रक्रिया के दौरान 50 से 70 के करीब मदरसों को अति संवेदनशील बताया गया है,उन पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।वास्तव में पाकिस्तान के मदरसों के प्रभाव उनके अपने देश को ही बुरी तरह प्रभावित कर रहे है।

मदरसों से निकल रही कट्टरपंथी ताकतों का बढ़ता प्रभाव

दरअसल देश में कट्टरपंथी ताकतों का बढ़ता प्रभाव चिंताजनक है,जिसके चलते पाकिस्तानी समाज संकीर्णता और अस्थिरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।अब पाकिस्तान में देवबंदी जेहादियों का ऐसा समूह बन गया  है जिसे अलकायदा,तालिबान,हरकत उल अंसार और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे कुख्यात आतंकी संगठनों का समर्थन प्राप्त है। देवबंदी विचारधारा के एक बड़े केंद्र बिनोरी की एक मस्जिद के एक मुफ़्ती ने कहा था कि जब देश में इस्लामी कट्टरपंथी सरकार आएगी तो वे देश से हर तरह की कला और मीडिया का उन्मूलन कर देंगे।मदरसों पर गहरा प्रभाव हाफिज सईद का भी है।पाकिस्तान में हाफिज सईद का सामाजिक और राजनीतिक दखल किसी से छुपा नहीं है।

धर्म के नाम पर युवाओं को गुमराह करते हैं कुछ कट्टरपंथी

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खास तौर पर परम्परावादी दल और समाज में इस आतंकी की स्वीकार्यता धर्म गुरु की तरह है। पाकिस्तान में मुस्लिम पंथों की बुनियाद पर कई दल मौजूद हैं, जिनमें अहल-ए-सुन्नतुल जमात, मजलिस-ए-वहदत-अल-मुस्लिमीन, सुन्नी तहरीक़ जैसे दल शामिल हैं.इसी तरह जमीयत -उलेमा -इस्लाम देवबंद पंथ का दल समझा जाता है। हाफिज़ सईद का जमात-उद-दावा न केवल अहल-ए-हदीस पंथ का  पैरोकार है बल्कि पाकिस्तान के कट्टरपंथी दलों ,निम्न और मध्यमवर्गीय समाज में उसकी गहरी पैठ है।समाज सेवा के नाम पर जमात- उद- दावा  नामक उसका संगठन चुनौती पेश करता रहा है। गरीबों के विकास और शिक्षा के नाम पर काम करने वाला जमात उद दावा  इस्लाम की कथित सुरक्षा के नाम पर खतरनाक हथियार चलाना भी सिखाता है।

मदरसों से निकले आतंकी

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आतंक के अत्‍याधुनिक तौर तरीके, गुरिल्‍ला युद्ध का प्रशिक्षण, आत्‍मघाती हमलावरों के दस्‍ते तैयार करने के लिए दावा का आतंकी रूप लश्‍कर-ए-तैय्यबा कुख्‍यात है और इसका मास्‍टर माइंड हाफिज सईद ही है। इन मदरसों से निकलने वाला एक और खतरनाक आतंकी मसूद अजहर है। जैश-ए-मोहम्मद यानि अल्लाह की फ़ौज का प्रमुख मौलाना मसूद अजहर पाक का एक प्रमुख आतंकी है जिसे अफगानिस्तान के कंधार में भारत के इंडियन एयरलाइन्स के अपह्रत विमान  आई सी 814 के बदले 31 दिसम्बर 1999 को छोड़ा गया था।अजहर छह लाख आतंकियों की भर्ती का दावा करता है जिसमें से हजारों कश्मीर में जिहाद के लिए भर्ती किये गये है.इस आतंकी संगठन का तन्त्र दक्षिण एशिया के साथ पश्चिम एशिया अफ्रीका और यूरोप तक फैला हुआ है।इस संगठन का पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में एक गोपनीय संचार केंद्र भी चलता है ,जिसे “तूबा”के कूटनाम से जाना जाता है।

मौलाना बनकर मज़हबी तकरीर देता है

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अजहर की शिक्षा कराची के एक मदरसे में हुई और 1989 में मजहबी तालीम में अपनी आलिमिया या स्नातकोत्तर पूरी की।वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मदरसों और आतंकी प्रशिक्षण केन्द्रों पर अक्सर प्रशिक्षु जिहादियों को मजहबी तकरीर सुनाने के लिए जाता है।पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के एक जाने माने मदरसे के पूर्व विद्यार्थियों में पूर्व तालिबान प्रमुख मुल्ला उमर और अन्य अफगान तालिबान नेता शामिल हैं।उरी और पुलवामा हमलें को अंजाम देने में जैश-ए-मोहम्मद की भूमिका उजागर हुई है जिससे भारत पाक के बीच इस समय युद्द जैसी स्थिति है।

पाकिस्तान के मदरसों की भूमिका को लेकर विश्वव्यापी चिंता रही है।बहरहाल इमरान खान को अपने देश में आतंकवाद को फलने फूलने से रोकने के लिए मदरसों को कट्टरपंथी ताकतों से बचना होगा और यह इतना आसान नहीं है।

 

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