Lakhimpur Kheri violence and politics- ग़म, ग़ुस्सा और आंसू के भयावह मंज़र का दर्द कब समझेंगे चंद राजनेता !

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Lakhimpur Kheri violence- नीचे लिखी अपनी चंद पंक्तियों के माध्यम से देश में बार-बार नफरत की सियासत करने वाले चंद राजनेता व चंद लोगों से कहना चाहता हूं—दीपक कुमार त्यागी

लखीमपुर प्रकरण पर पढ़िये विस्तृत रिपोर्ट

“गांधी के देश में सियासत ये कैसे-कैसे गुल खिला रही है,
बीज नफरत के बोकर के समाजसेवा बता रही है,
अपने चमन को खुद के हाथों से बेखौफ आग लगवाकर,
जानें क्यों सियासत आज विकास बताकर गर्व से इठला रही है।।

Lakhimpur Kheri violence and politics

आज दुनिया भारत को इक्कीसवीं सदी के एक ताकतवर देश के रूप में उम्मीद के साथ देख रही है। देश के ईमानदार मेहनतकश लोग भी दिन-रात मेहनत करके भारत को विश्वगुरु का दर्जा दिलवाने के प्रयास में लगे हुए हैं। कुछ लोग उस मेहनत को अपने सियासी मंसूबों को पूरा करने के लिए ओछी हरकतों से बर्बाद करने कि कोशिश ना करें, कम से कम यह चंद लोग अब तो ओछी व नफरत से भरी राजनीति को छोड़कर देश की एकता अखंडता अमन चैन को कायम रखने के लिए कार्य करना शुरू करें। अपने मर्यादित आचरण व व्यवहार से स्थिति ऐसी बनाओं की लोगों को अपने देश के सभी राजनेताओं पर दुनिया भर दिल से गर्व महसूस होना चाहिए ना कि शर्मिंदगी महसूस होनी चाहिए।

अन्नदाता किसानों के लिए अचानक से अथाह प्रेम क्यों उमड़ रहा

जब से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किसानों पर गाड़ी चढ़ाने का मानवता को शर्मसार करने वाला जघन्य हिंसा कांड घटित हुआ है, तब से देश के पक्ष-विपक्ष के सभी राजनीतिक दलों में हमारे प्यारे अन्नदाता किसानों के लिए अचानक से अथाह प्रेम उमड़ आया है, देश में दशकों से परेशान किसानों का हर दल हर नेता अपने आपको सबसे बड़ा व सच्चा हितेषी साबित करने में तुला हुआ है। लेकिन क्या कभी पक्ष-विपक्ष के इन चंद राजनेताओं ने यह भी सोचा है कि उनकी नफरत भरी सियासत व बार-बार बोलें जाने वालें जहरीले बोल के चलते आज एक बार फिर से देश के एक दूरदराज के जनपद में कई परिवारों के चिराग बुझ गये हैं। अब समय आ गया जब हम लोगों को विचार करना होगा कि आखिरकार हमारे देश के चंद नफरती राजनेता ग़म, ग़ुस्सा और आंसू के भयावह मंज़र का दर्द कभी समझेंगे या नहीं।

Lakhimpur Kheri violence and politics-हंगामा व नफ़रत की आग

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आज नियम कायदे कानून पसंद जनता के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिस ढंग से अपने क्षणिक राजनीतिक स्वार्थ के लिए देश को आये दिन बेखौफ होकर हंगामा व नफरत की आग में कुछ सियासतदान झोंक देते हैं, आखिर यह सब देश में कब तक चलेगा। क्योंकि ऐसे गलत लोगों को चुनने के लिए कहीं ना कहीं उनको वोट देने वाली सम्मानित जनता भी दोषी है, उसको देशहित में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर ईमानदार व देशभक्त लोगों का चुनाव समय रहते जल्द से जल्द करना होगा।

निर्दोष लोगों की मौत का ज़िम्मेदार कौन?

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लखीमपुर खीरी कांड में सबसे बड़ी शर्मनाक बात यह है कि इस घटना से मात्र एक दिन पहले ही एक तरफ तो देश के अधिकांश राजनेता व जनता ने 2 अक्टूबर को सत्य अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी जी व ‘जय जवान जय किसान’ का नारा देने वाले देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती धूमधाम से मनायी थी, उनके दिखाये मार्ग पर चलने की कसमें खाईं थी। लेकिन उसके मात्र एक दिन बाद 3 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद में सड़कों पर जमकर खूनी तांडव मचाया गया, जिसको कानून व्यवस्था पसंद देश में पक्ष या विपक्ष किसी के भी नजरिए से बिल्कुल भी उचित नहीं ठहराया जा सकता है। दुखद बात यह है कि इस घटना में जहां एक तरफ तो प्रदर्शकारी चार किसानों की अनमोल जान चली गयी है, वहीं दूसरी तरफ हिंसक झड़प में तीन भाजपा के कार्यकर्ताओं व एक ड्राइवर की भी जान चली गयी हैं।

Lakhimpur Kheri violence and politics-निशाने पर पत्रकार क्यों? पत्रकार के परिवार का क्या होगा?

सबसे बड़ी दुखद बात यह है कि इस घटना ने एक टीवी न्यूज़ चैनल के युवा पत्रकार ‘रमन कश्यप’ को भी मौत के आगोश में पहुंचा दिया है, मेरा उत्तर प्रदेश सरकार से निवेदन है कि वह ‘रमन कश्यप’ के परिजनों को एक करोड़ रुपये की मुआवजा धनराशि प्रदान करें, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दें व बच्चों की पढ़ाई का खर्च ताउम्र सरकार वहन करें और सभी लोगों की मौत के लिए दोषियों को सख्त सजा देने का कार्य करें। वैसे यहां मेरा एक सवाल देश के सिस्टम से भी है कि आखिर किसी कार्यक्रम की कवरेज कर रहे पत्रकार को बार-बार निशाना क्यों बनाया जाता है, सरकार इसके लिए सख्त कानून बनाकर उसकों धरातल पर अमल में क्यों नहीं लाती है, एक युवा पत्रकार की मौत पर सरकार किसान नेता या राजनेता कोई जवाब देगा कि पत्रकार को आखिर क्यों मारा गया?

राजनीतिक रोटियां सेंकने में जुटे सियासी दल

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इस घटना के बाद देश के राजनेता, नियम कायदे कानून पसंद जनता व बुद्धिजीवी लोग इस इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना पर दुख जताते हुए कह रहे हैं कि इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं भविष्य में बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए। सरकार को इस घटनाक्रम के लिए दोषी लोगों को जल्द से जल्द सख्त सजा देकर के समाज के सामने एक नजीर पेश करनी चाहिए। भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो उसके लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाने चाहिए। वहीं देश में इस बेहद ज्वंलत मसले पर राजनीति अपने पूर्ण चरम पर है, हर कोई घटनास्थल पर जाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना व उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए चुनावी बिसात बिछाना चाहता है। ऐसी स्थिति में किसान नेताओं व किसानों के लिए यह वक्त बेहद चुनौती पूर्ण है कि वह किस तरह से स्थिति में सामंजस्य करके हालात को नियंत्रण में रखें और पूर्व की भांति शांतिपूर्वक गांधीवादी ढंग से अपने प्रदर्शन को जारी रखें।

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Lakhimpur Kheri violence and politics-डिप्टी सीएम के कार्यक्रम में बदलाव के बाद ….

यहां आपको बता दें कि 3 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश सरकार के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लखीमपुर खीरी जनपद के बनबीरपुर गांव जा रहे थे। जिसकी सूचना मिलते ही जनपद में कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने जिस स्थल पर केशव प्रसाद मौर्य का हेलीकॉप्टर उतरना था, उस महाराजा अग्रसेन स्पोर्ट्स ग्राउंड में हेलीपेड साइट पर कब्जा कर लिया। इसके चलते केशव प्रसाद मौर्य के कार्यक्रम में तत्काल बदलाव किया गया और उनको लखनऊ से सड़क मार्ग के द्वारा लखीमपुर खीरी आना पड़ा। इसके बाद प्रदर्शकारी किसानों ने विरोधस्वरूप तिकुनिया में केशव प्रसाद मौर्य के स्वागत में लगे होडिंर्ग्स उखाड़ दिए और क्षेत्र के कई गांवों से किसान केशव प्रसाद मौर्य को विरोधस्वरूप काला झंडा दिखाने के लिए स्थल पर पहुंच गए।

Lakhimpur Kheri violence and politics-नफरत भरी राजनीति के पीछे कौन?

बाद में किसानों की यह भीड़ केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को काले झंडे दिखाने के लिए तिकुनिया-बनबीरपुर मोड़ पर इंतजार में खड़ी हो गयी थी। लेकिन किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि रविवार 3 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी जनपद अचानक देश व दुनिया की मीडिया में ओछी सियासत के चलते सुर्खियों में आ जायेगा, सियासतदानों के द्वारा की गयी नफरत भरी राजनीति से कई लोगों के घरों के चिराग असमय ही दर्दनाक ढंग से बुझ जायेंगे।

कहीं किसी साज़िश की आशंका

मौके पर ( LAKHIMPUR KHEERI) उपस्थित लोगों में किसी को भी अंदेशा नहीं था कि किसानों का एक सामान्य माने जाना वाले विरोधस्वरूप धरना प्रदर्शन अगले चंद पलों में भयानक धधकते ज्वालामुखी वाले मंज़र में बदल जायेगा, एक काले रंग की जीप से कुछ किसानों की मौत के बाद रात होने तक उस क्षेत्र का माहौल कुछ ऐसा बदलेगा कि सरकारी मशीनरी व सत्ता पक्ष व विपक्ष सभी को सड़कों पर अचानक आना पड़ गया, स्थिति यह हुई कि पूरा जनपद सुरक्षा व्यवस्था को मद्देनजर रखते हुए हाई अलर्ट पर चला गया, क्षेत्र में धारा 144 लगा दी गयी है, भारी तनाव को देखते हुए जनपद में केंद्रीय बल और पीएसी की अतरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं, एहतियात के तौर पर इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। वहीं इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गयी है, घटना के कारणों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अफसरों की एक विशेष टीम भी घटनास्थल पर भेजी है।

नफरती सियासत कब तक?

वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पल-पल नज़र रखें हुए हैं, उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील है कि वह घरों में रहें और किसी के भी बहकावे में न आएं। मौके पर शांति व्यवस्था कायम रखने में अपना योगदान दें। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मौके पर हो रही जांच और कार्रवाई का इंतजार करें। उन्होंने आश्वस्त किया है कि सरकार इस घटना के कारणों की तह में जाएगी और घटना में शामिल सभी तत्वों को बेनकाब कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। खैर जो भी हो नफरती सियासत कई घरों के चिराग छीनकर एक फिर अपने नापाक मंसूबों में कामयाब रही है, लेकिन अब समय आ गया है कि देश की जनता को देश व समाज के हित के मद्देनजर सजग रहना होगा और चुनावों के समय नफरत फैलाने वालें चंद सौदागरों को चुनावों में बुरी तरह से हराकर अच्छे ईमानदार व देशभक्त लोगों का चयन करना होगा, तब ही भविष्य में देश की एकता अखंडता कायम रह सकेगी और भारत का विश्वगुरु बनने का सपना पूरा हो पायेगा, मैं अपनी चंद पक्तियों के माध्यम से कहना चाहता हूं –

सियासत की दो ज़ुबां

“सुना था सियासत की भी एक अलग जुबां होती है,
नफरत फैलाना आज की सियासत में बेहतरीन कला होती है,
बांध लेता है जो जहरीले मोहपाश में जनता को राजनेता,
उसके कदमों में आजकल कामयाबी क्यों होती है।।”

अब देश में वह समय आ गया है कि जनता मेरी उपरोक्त पंक्तियों पर विचार करें और सभी देशभक्त देशवासी देश के बाहर व अंदर छुपे हुए दुश्मनों की पहचान करके उनके सफाये का कार्य करें।

दीपक कुमार त्यागी (हस्तक्षेप), स्वतंत्र पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक