गर्मी में निरोग रखेंगे ये योग, जानें इन्हें करने की विधि के बारे में…

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निरोग रखेंगे ये योग: गर्मी दूर भगाने के लिए क्या-क्या नहीं करते हम। फिर भी सुस्ती, बीमारी जैसी परेशानियां घेर ही लेती हैं। खाने पीने के रूटीन में बदलाव ज़रूरी है ही साथ ही कई योग आसन भी गर्मी की समस्याओं से निजात दिला सकते हैं।

निरोग रखेंगे ये योग: हलासन

निरोग रखेंगे ये योग: गर्मियों में पेट संबंधी रोग बहुत परेशान करते हैं। ऐसे में हलासन योग करने से कई तकलीफों का उपचार हो सकता है। इसे सुबह-सुबह करें। फर्श पर योग मैट या चटाई बिछा लें। चटाई पर पीठ के बल सीधे सुकून और आराम से लेटें। दोनों हाथों को पैरों की सीध में सीधे रखें। धीरे-धीरे फेफडों में सांस भरें। अब पैरों और हिप्स को ऊपर उठाएं (चित्र के अनुसार)। पैर सिर की ओर ऐसे ले जाएं कि पंजे ज़मीन को छू सकें। डेढ-दो मिनट तक इसी अवस्था में रहें और फिर धीरे-धीरे सांस छोडते हुए पूर्व स्थिति में वापस आएं। हलासन से एसिडिटी और गैस जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।

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निरोग रखेंगे ये योग: नौकासन

गर्मियों में सुस्ती, बेचैनी और आलस्य भी बहुत घेरता है। ऐसे में सुबह-सुबह नौकासन करने से पूरे दिन के लिए ऊर्जा मिलती है। यह शरीर के पूरे सिस्टम को ऐक्टिव करने में कारगर है। इसे बोट पोज़ भी कहते हैं। ज़मीन पर चटाई बिछा कर लेटें। सांस अंदर खींचें। दोनों पैरों को सीधा मिला कर रखें। हाथों को पैरों की सीध में घुटने से मिला कर रखें। अब धीरे-धीरे अपने सिर और पैरों को एक साथ ऊपर की ओर उठाएं। पैर इतने उठें कि 45 डिग्री का कोण बने। सिर को भी ऊपर की तरफ उठाएं। अब धीरे-धीरे सांस छोडें और पूर्व अवस्था में लौटें। नौकासन से पेट की मांसपेशियों पर खिंचाव पडता है। इसे पांच से दस बार तक करें।

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पवनमुक्तासन

पीठ के बल सीधे लेट जाएं। दोनों घुटनों को मोडते हुए पेट के पास तक लाएं और अपने दोनों हाथों से घुटनों को दबाव देते हुए इस तरह पकडें कि पेट पर दबाव पडे। अब सिर उठाएं और अपनी ठोडी को घुटनों तक लाने की कोशिश करें। सांस को सामान्य गति से चलने दें। इस आसन से गैस व एसिडिटी की समस्या दूर होती है और फेफडे मज्ाबूत होते हैं। यदि पहली बार कर रहे हों तो सिर को उतना ही ऊपर तक उठाएं, जितना आसानी से हो सके।

सर्वांगासन

जैसा कि नाम से ही ज्ााहिर है, इस आसन से शरीर के लगभग हर हिस्से का व्यायाम होता है। पीठ के बल सीधे लेट जाएं। हाथों को सीधे पैरों से स्पर्श करते हुए रखें। सांस भीतर भरें। अब हाथों की सहायता से अपने पैरों को धीरे-धीरे पहले 30 डिग्री, फिर 45 और अंत में 90 डिग्री कोण तक ले जाएं। हाथों से कमर पकड लें। अब धीरे-धीरे पैरों को वापस लेकर आएं। हाथों को कमर से हटा कर सीधा कर लें। सर्वांगासन के बाद शवासन ज्ारूर करें।

भुजंगासन

पेट के बल लेटें। दोनों पैरों, एडिय़ों एवं पंजों को आपस में मिलाएं और फर्श पर पैर सीधे रखें। हाथों को कंधे के सामने ज्ामीन पर रखें। हाथों के बल नाभि से ऊपर शरीर को जितना संभव हो, ऊपर की ओर उठाएं। सिर सीधा और ऊपर की ओर रहे। इसे पांच से दस बार तक दोहराएं। इस आसन से कब्ज्ा, गैस और अपच दूर होता है। स्त्रियों के लिए यह अत्यंत लाभदायक आसन है। पीरियड्स संबंधी गडबडिय़ों के अलावा यह वज्ान को नियंत्रित रखता है। कमर दर्द में भी यह राहत प्रदान करता है।

प्राणायाम

गर्मी में शीतली और शीतकारी प्राणायाम शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं। सुबह शुद्ध हवा में इन क्रियाओं को करने से शरीर में ऑक्सीजन जाती है और फेफडों और पेट को गर्मी के प्रकोप से मुक्ति मिलती है। प्राणायाम के दौरान सांस गहरी और खुल कर आनी चाहिए। मुद्रा आराम वाली रहे। आमतौर पर पालथी की स्थिति में इसे करना चाहिए, लेकिन जिन लोगों को कमर या पीठ का दर्द है या जो पालथी मार कर नहीं बैठ सकते, वे कुर्सी पर बैठ कर भी प्राणायाम की क्रियाएं कर सकते हैं।

शीतली

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ध्यान की स्थिति में बैठें। पीठ को सीधा रखें। हाथों को घुटनों पर रखें और शरीर को ढीला छोड दें। अब अपनी जीभ बाहर निकालें। जीभ को दोनों ओर से इस तरह मोडें कि नाव सी बन जाए। अब इस नाव या ट्यूब के ज्ारिये सांस भीतर खींचें। हवा जीभ से अंदर जाकर मुंह व तालू को ठंडक पहुंचाएगी। अब जीभ को अंदर करें और सांस को नियंत्रित करते हुए धीरे-धीरे नाक के ज्ारिये बाहर निकालें। शुरू में इस क्रिया को 10 बार तक दोहराएं। धीरे-धीरे इसे बढा सकते हैं और दिन में कभी भी इसे ज्ारूरत व इच्छा के अनुसार कर सकते हैं।

शीतकारी

पालथी मारकर या वज्रासन में बैठें। अपनी दोनों दंत-पंक्तियों को आपस में मिलाएं। जीभ को मोड कर तालू से चिपका लें और अपने होंठ खोल लें, ताकि दांतों की दोनों पंक्तियां दिखाई दें। मुंह से इस तरह सांस अंदर खींचें कि वह दांतों के बीच से होकर गुज्ारे। इससे मुंह और फेफडों के भीतर तक ठंडक का अनुभव होगा। सांस को पूरा भरने के बाद मुंह बंद कर लें और धीरे-धीरे नाक से सांस बाहर निकालें। इस अभ्यास को 10 बार तक करें और ज्ारूरत पडऩे पर दिन में दो-तीन बार कर सकते हैं।

उज्जाई

इसके लिए पद्मासन में बैठें। सांस भीतर खींचें और अपने फेफडों को जितनी देर हो सके, भर लें। अब अपनी दायीं नासिका को अपने अंगूठे से बंद करें और बायीं नासिका से धीरे-धीरे सांस बाहर करें। अब इसी प्रक्रिया को बायीं नासिका से भी दोहराएं। गर्मी में होने वाली सांस संंबंधी तकलीफों और घबराहट में यह प्राणायाम विधि बहुत काम आती है।

सर्दियों में शीतली और शीतकारी क्रियाएं न करें, क्योंकि ये शरीर को ठंडक प्रदान करती हैं।