शाकाहारी खाने की पहचान हैं मेनारिया रसोइये, अंबानी, हिन्दुजा का भी किचन इन्हीं के हवाले

Most of the menarars, especially Brahmin chefs,carry Menaria in front of their names. They only cook vegetarian food. Following the special tradition, they live in joint families. People of Manar village are brave too. They believe that their elders supported Maharana Pratap in the fight with the Mughals.

राजस्थानी खाने की बात ही कुछ और है। तभी तो देश के कोने-कोने में राजस्थान के खाने की खुश्बू और स्वाद बरबस खींचता है हमें…खासकर यह खबर उन लोगों के लिये हैं जो शुद्ध शाकाहारी हैं और वेजीटेरियन स्वाद की गलियों में फेरे लगाते हैं। यहां हम बात कर रहे हैं उदयपुर के मेनार और उसके आसपास ( mennar, surrounding villages of Udaipur) के गांव कलवल, करजाली, बाठेड़ा खुर्द, खरसान, रुंडेडा, इंटाली, बांसड़ा गाव के ‘मेनारिया ब्राह्मण समुदाय’ ( ‘Menaria Brahmin community’) की दो पीढ़ियों की ..ये दो पीढ़ियां ( Two generations) शाकाहारी खाना ( vegetarian food) बनाने में ना केवल देश में बल्कि विदेश में भी अपने समाज, राज्य और देश का नाम रोशन कर रही हैं।


देश के बड़े उद्योगपतियों और घरानों की बात करें तो उनके पास भी मेनारिया रसोइए मिलेंगे। अंबानी ( AMBANI)  के रसोइए भी मेनार से आते हैं। सफ़ेद कुर्ता, धोती, जूती, सिर पर लाल साफा और हाथ में छोटा सा डंडा यह है इनका पहनावा और मेनार ( MENNAR)  की पहचान।

9वीं पास यशवंत मेनारिया ( YASHWANT MENNARIA) 28 साल के हैं और हिंदुजा भाइयों ( HINDUJA BROTHERS) – श्रीचंद और गोपीचंद- के घर पर लंदन में पिछले तीन साल से रसोइये का काम करते हैं। उनकी महीने की आमदनी 1.20 लाख रूपये है।

मेनारिया समाज ( Menaria society) के करजाली निवासी रसोइये भंवरलाल मांगीलाल मेनारिया ( BHANWARLAL MANGILAL MENARIA) को हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की, जापान की राजधानी टोक्यो (tokyo)  की यात्रा के दौरान भोजन की व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मांगीलाल टोक्यो के एक होटल में शेफ हैं। मांगीलाल ने मुंबई के विले पार्ले स्थित हिना ट्यूर एंड ट्रैवल ( HINA TOUR AND TRAVEL) से बतौर शेफ ( CHEF) अपने करिअर की शुरूआत की थी।

इस कंपनी के मालिक प्रभुलाल जोशी कहते हैं कि उनके यहां चित्तौड़गढ़, नाथद्वारा, मेनार के करीब 400 लोग काम कर रहे हैं। ‘हमारे यहां रसोइये को लज़ीज़ शुद्ध शाकाहारी खाना ( delicious vegetarian curry) बनाने का प्रशिक्षण उदयपुर के डबोक में दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद परीक्षा ली जाती है जिसमें पास होने वालों को आगे की तैयारी कराई जाती है।’


उन्होंने बताया ‘हम ताजा शुद्व शाकाहारी भोजन परोसते हैं। यूरोप में हम किचन केयर वैन चलाते हैं। मिनी बस जैसी किचन केयर वैन में खाने की पूरी व्यवस्था होती है और किसी भी होटल का डाइनिंग हाल बुक कर हमारी किचन केयर वैन में बनाया गया खाना परोसा जाता है।’
35 वर्षों से शेफ जोशी ने बताया कि मुंबई की पुरानी मिलों के मालिकों, अडाणी, अंबानी जैसे कारोबारी दिग्गजों के घरों में भी मेनारिया रसोइये काम कर चुके हैं।
67 वर्षीय जोशी ने बताया कि उदयपुर—चित्तौड़गढ़ राजमार्ग पर स्थित मेनार गांव की आबादी करीब 10 हजार है। गांव में कई रसोइये अब उम्र बढ़ने की वजह से खुद काम छोड़ कर अपने बेटों को पाक कला में सिद्धहस्त बना चुके हैं। कम पढे़ लिखे युवा भी इस धंधे में अच्छा पैसा कमा लेते हैं।
उन्होंने बताया ’देश विदेश में लजीज शाकाहारी खाना बनाने में हमारे समाज की मोनोपॅली है। मेनारिया समाज के रसोइये भारत, भूटान, नेपाल के साथ साथ अन्य देशों में भी स्वादिष्ट भारतीय भोजन पका रहे हैं। समाज के करीब 50 रसोइये हमारी कंपनी में हैं और कई अन्य फ्री लॉन्सर भी हैं।’
मेनार गांव के निवासी उमेश पुंडरोत कहते हैं कि उनके गांव के रहने वाले पूनमचंद प्राथमिक कक्षाओं के बाद कभी विद्यालय नहीं गए बल्कि रसोइये का पेशा अपना लिया। ऐसे और भी जाने कितने लोग हैं जो इस पेशे से जुड़े हैं।

नोट...मेनार के खासकर ब्राह्मण ज़्यादातर रसोइये हैं अपने नाम के पीछे मेनारिया लगाते हैं। ये केवल शाकाहारी खाना पकाते हैं। खास परंपरा का पालन करते हुए संयुक्त परिवारों में रहते हैं। मेनार गांव के लोग बहादुर भी हैं। इनका मानना है कि इनके बड़ों ने मुगलों के साथ लड़ाई में महाराणा प्रताप का साथ दिया था।
input-pti

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