आखिर क्या है लो अर्थ ऑर्बिट, मिशन शक्ति के बारे में जानें सबकुछ

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लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) यानी पृथ्वी के केंद्र से 2000 किलोमीटर या 1200 मील की परिधि।

अंतरिक्ष में लाइव सैटेलाइट को मार गिराने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है। अभी यह क्षमता अमेरिका, रूस और चीन के पास थी लेकिन लो अर्थ ऑर्बिट में (एलईओ) (LEO) में एंटी सेटैलाइट मिसाइल से लाइव सैटेलाइट को गिराकर भारत भी अब महाशक्तियों के समूह में शामिल हो गया है। भारत ने बुधवार को अपने ‘मिशन शक्ति’ के जरिए अंतरिक्ष में पृथ्वी से 300 किलोमीटर दूर लाइव सेटैलाइट को अपने एंटी सेटैलाइट मिसाइल (ए-सैट) से मार गिराया। अब आपको बताते हैं कि आखिर क्या है यह एलईओ..यानी लो अर्थ ऑर्बिट….

 ‘लो अर्थ ऑर्बिट’ (What is Low Earth Orbit)

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पृथ्वी के केंद्र से 2000 किलोमीटर या 1200 मील की परिधि को लो अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit) कहते हैं। इस दायरे में मौसम और निगरानी करने वाले उपग्रह को स्थापित किया जाता है। जासूसी उपग्रहों को भी इसी ऑर्बिट में तैनात किया जाता है। इस ऑर्बिट में सेटैलाइट को स्थापित करने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है और इस कक्षा में ज्यादा शक्ति वाले संचार प्रणाली को स्थापित किया जा सकता है। ये उपग्रह जिस गति से अपनी कक्षा में घूमते हैं उनका व्यवहार भू-स्थिर (जिओ-स्टेशनरी) की तरह ही होता है।

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 स्वदेश तकनीक पर आधारित था मिशन

खास बात यह है कि ‘मिशन शक्ति’ पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा, ‘अभी तक यह उपलब्धि अमेरिका, रूस और चीन को हासिल थी। अब यह कामयाबी हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। हर हिंदुस्तानी के लिए यह गर्व का क्षण है।’  पीएम ने कहा, ‘आज कुछ समय पूर्व हमारे वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर दूर एलईओ में लाइव सेटेलाइट को मार गिराया है। लाइव सेटेलाइट पूर्व निर्क्षारित लक्ष्य था जिसे एंटी सेटैलाइट मिसाइल से मार गिराया गया।’

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पीएम ने बताया कि ‘मिशन शक्ति’ को सिर्फ तीन मिनट में सफलता पूर्वक हासिल किया गया। उन्होंने कहा, ‘भारत हथियारों की होड़ में कभी नहीं रहा। हम आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल 120 करोड़ भारतवासियों की सुरक्षा एवं कल्याण के लिए करना चाहते हैं। क्षेत्र में स्थिरता के लिए भारत को मजबूत होना जरूरी है। भारत ने अंतरिक्ष में जो काम किया है उसका मूल उद्देश्य भारत की सुरक्षा, विकास एवं तकनीकी विकास पर केंद्रित रहा है। ‘मिशन शक्ति’ हमारे उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में अहम कदम है।’

गौरतलब है कि साल 2007 में चीन ने इस तरह का परीक्षण करते हुए अंतरिक्ष में अपने एक मौसम उपग्रह को मार गिराया था। चीन ने 12 साल पहले जब इस तरह का परीक्षण किया था तो दुनिया भर में उसके इस कदम की आलोचना हुई थी।