Kill The journalist, Maoists said, attack servivors recorded video revealing truth/ watch selfie-video!!!-‘मां हो सकता है मारा जाऊं…’ पत्रकार की मार्मिक कहानी

DOORDARSHAN JOURNALIST, ATTACK SERVIVOR

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है ये वीडियो

आतंकवादी हमला हो गया है. (गोलियों की आवाज़)

हम दंतेवाड़ा में आए थे इलेक्शन कवरेज पर. एक रास्ते से जा रहे थे. ( गोलियों की आवाज़)

आर्मी हमारे साथ थी. अचानक गिर गए. नक्सली हमला हुआ है.मम्मी अगर मैं जीवित बचा तो गनीमत है.मम्मी मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं. हो सकता है इस हमले में मैं मारा जाऊं. परिस्थिति सही नहीं है. पता नहीं क्यों मौत को सामने देखते हुए डर नहीं लग रहा हैबचना मुश्किल है यहां पर. छह सात जवान हैं साथ में. चारों तरफ से घेर लिया है. फिर भी मैं यही कहूंगा.

मोबाइल कैमरा घूम जाता है. कोई एंबुलेंस बुलाने की बात कहता है.भैया थोड़ा पानी दे देंगे.अब सुरक्षित हैं?

ये उस मोबाइल वीडियो का अंश है, जो दूरदर्शन के असिस्टेंट लाइटमैन मोर मुकुट शर्मा ने अपनी मां के लिए रिकॉर्ड किया था. सोशल मीडिया पर पिछले 36 घंटे से ये वीडियो वायरल हो गया है.

क्या मां तक पहुंचा वायरल वीडियो?

लेकिन कई सवाल हैं जिनके जवाब अभी लोगों को नहीं मालूम हैं.

जैसे कि उस मां के दिल पर क्या बीती जिसके लिए मोर मुकुट ने ये वीडियो बनाया था. क्या उन तक ये वीडियो पहुंच भी पाया?

मौत को सामने देख वीडियो बनाने का ऐसा ख्याल आया तो कैसे?

मौत को मात देने वाले दूरदर्शन के असिस्टेंट कैमरामैन दंतेवाड़ा से दिल्ली वापस लौट आए हैं. लेकिन जिस मां के लिए उन्होंने वीडियो रिकॉर्ड किया, वीडियो देख कर आखिर उनकी हालात क्या थी? बीबीसीने पलवल में मोर मुकुट शर्मा के घर पर बात की.

जो वीडियो मोर मुकुट ने मां के लिए रिकॉर्ड किया था, वो मां तक बाद में पहुंचा, उससे पहले ही बेटे के सुरक्षित होने की ख़बर मां तक पहुंच गई थी.

मोर मुकुट अपने छह भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं. परिवार में उनकी मां के अलावा तीन बड़ी बहनें हैं और दो बड़े भाई और भाभी हैं.

मुकुट शर्मा के बचने की किसने दी थी ख़बर?

मोर मुकुट शर्मा की बड़ी भाभी नीतू शर्मा वो पहली शख्स थीं, जिन्हें उन्होंने सबसे पहले दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में बचने की ख़बर दी थी.

वो कहती हैं, “मुझे 30 तारीख की दोपहर अंजान नंबर से बार- बार फ़ोन आ रहा था. नेटवर्क में दिक्कत थी तो मैंने पलट के उस नंबर पर फ़ोन किया. उधर से आवाज़ आई – क्या आपके कोई रिश्तेदार दूरदर्शन में काम करते हैं. उनसे बात कीजिए. और अगली आवाज़ आई मोर मुकुट की.”

“भाभी, यहां नक्सली हमला हो गया है, मेरे कैमरा मैन की मौत हो गई है. लेकिन मैं ठीक हूं. मम्मी को कुछ मत बताना.”

मौत क़रीब देख कर जिस मां के लिए मोर मुकुट ने वीडियो बनाया था, उसी मां को अपने सुरक्षित होने की ख़बर वो क्यों नहीं देना चाहते थे वो?

मुकुट ने बताया, “मेरे मन में दो युद्ध एक साथ चल रहे थे. एक युद्ध सामने चल रहा था. गोलियों की आवाज़ आ रही थी. सामने साथी का चेहरा था जिसका शरीर खून से लथपथ था और दूसरा युद्ध मन में चल रहा था. मां का चेहरा सामने था. उन पर क्या बीतेगी अगर में वापस घर लौट कर नहीं जाऊंगा. इसी उधेड़बुन में मैंने वो वीडियो बनाया. मुझे बचने की कोई उम्मीद नहीं थी.”

दिल्ली वापस लौटते ही मोर मुकुट ने बीबीसी से फ़ोन पर उस लम्हें के बारे में विस्तार से बताया.

पिता को छह महीने पहले आया था हार्ट अटैक

छह महीने पहले ही मोर मुकुट के पिता की मौत हो गई थी. उन्हें साइलेंट हार्ट अटैक आया था. घर में सबसे छोटा होने के कारण वो मां के सबसे लाडले भी हैं और उनके सबसे क़रीब भी.

दिल्ली लौटने के कुछ घंटों पहले ही मोर मुकुट का वीडियो उनकी मां ने पहली बार देखा. घर वालों ने पूरे घटना के बारे में मां को कुछ नहीं बताया था.

वीडियो देखते ही मोर मुकुट की मां ने सबसे पहले घरवालों को बहुत डांटा. लेकिन फिर बेटे के रात को ही वापस आने की बात सुन थोड़ा शांत हुईं.

सुबह जब बेटे से मिलीं तो दोनों बस एक-दूसरे से लिपट कर रोते रहे, मानो बरसों से बिछड़े हों.

उस पल को जीवन का सबसे यादगार लम्हा मानते हैं मोर मुकुट. वो कहते हैं, ”न तो उन्होंने मुझ से कुछ पूछा न मैंने उस घटना के बारे में उन्हें कुछ बताया, लेकिन गले लगते ही मुझे लगा कि मां ने मेरी सारी चिंताएं हर ली हैं और अब कुछ हो भी जाए तो मुझे ग़म नहीं.”

दरअसल मोर मुकुट के घर वाले उनकी मां से 24 घंटे तक सब कुछ छुपा पाने में इसलिए कामयाब रहे क्योंकि दिवाली की वजह से घर पर सफे़दी का काम चल रहा था. टीवी का कनेक्शन कटा हुआ है. इसलिए मां को देश दुनिया में क्या चल रहा उसकी ख़बर नहीं थी.

क्या चुनाव कवरेज पर छत्तीसगढ़ जाने का फ़रमान दफ्तर ने उन्हें सुनाया था या फिर उनका ख़ुद का फ़ैसला था?

इस पर मोर मुकुट कहते हैं, ”ये मेरा ख़ुद का फैसला था. मैंने छत्तीसगढ़ जाने के लिए अपने सेक्शन हेड से जा कर गुज़ारिश की थी. 14 साल से दूरदर्शन से जुड़ा रहा हूं, कई ऐसे कवरेज पर गया हूं. ये नया अनुभव नहीं है, शायद इसलिए मौत को क़रीब देख कर मैं नहीं घबराया था. ”

मोर मुकुट बताते हैं कि उनके ज़िंदा बचकर दिल्ली लौटने के बाद उनकी मां गहरी नींद में सो रही हैं.

शायद ये एक मां का वो सुकून है, जो बेटे के सिर पर आई मौत के दूर जाने पर मन में जन्म लेता है.

CURTESY-BBC

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