सबसे साक्षर केरल ने वैक्सीनेशन में भी पेश की नई मिसाल, यहां टीके की बर्बादी का फीसद है ज़ीरो, कैसे..पढ़ें…

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सबसे साक्षर केरल ने वैक्सीनेशन लगाने के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। केरल को 73 लाख डोज लगाने को मिले और उसने 74 लाख लगा दिए और वैक्सीन की बर्बादी का आंकड़ा रहा ज़ीरो फीसद। कैसे पढ़िये ये रिपोर्ट…

वैक्सीन के 10 फ़ीसदी तक व्यर्थ होने पर है छूट

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दश के सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में एक है केरल। हर दिन कोरोना के मरीज़ों का आंकड़ा बढ़ रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने वैक्सीन के 10 फ़ीसदी तक व्यर्थ होने को लेकर छूट दी हुई है. तमिलनाडु जैसे राज्यों में इसके व्यर्थ होने की दर 8.83% और लक्षद्वीप में यह रिकॉर्ड रूप से 9.76% है. ऐसी ही या इससे ज्यादा बर्बादी के आंकड़े दूसरे राज्यों के भी हैं. लेकिन केरल की बर्बादी का आंकड़ा 00 फीसदी है. केरल को 73,38,806 वैक्सीन की डोज़ मिली थीं, जिनमें से उसने लोगों को 74,26,164 डोज़ दीं. मतलब केरल ने 87,358 अतिरिक्त लोगों को वैक्सीन दी. उसने वैक्सीन को बिल्कुल बर्बाद नहीं होने दिया.

सबसे साक्षर केरल के स्टाफ की सीएम ने ट्वीट कर की तारीफ

इसका खुलासा राज्य के मुख्यमंत्री विजयन ने अपने ट्वीट में किया, “केरल को भारत सरकार से 73,38,806 वैक्सीन की डोज़ मिलीं. हमने 74,26,164 डोज़ उपलब्ध कराईं. हर शीशी से व्यर्थ जाने वाली डोज़ का इस्तेमाल करके हमने एक अतिरिक्त ख़ुराक बनाई. हमारे स्वास्थ्यकर्मी, ख़ासकर नर्सें बेहद कुशल हैं. उनकी दिल से तारीफ.

केरल ने ये रिकॉर्ड कैसे बनाया

केरल ने हर शख़्स को इंजेक्शन में वैक्सीन की उतनी ही मात्रा दी, जितनी होनी चाहिए. लेकिन उसने साथ ही एक एक कुशल प्रणाली अपनाई. 05 मिलीलीटर (एमए) की हर शीशी में वैक्सीन की 10 ख़ुराक होती हैं. इसका मतलब है कि उस शीशी से 10 लोगों को वैक्सीन दी जा सकती है.लेकिन ये खुराक कम ना हो जाए लिहाजा कंपनियां हर शीशी में एक एक्स्ट्रा खुराक भी डाल रही हैं. आमतौर पर इसमें 0.55 एमएल या 0.6 एमएल अतिरिक्त दवा होती है.

सबसे साक्षर केरल की निपुण नर्सें

हालत ये है कि केरल की नर्सें इतनी निपुण हैं कि वो कोरोना डोज की एकदम पक्की खुराक हर किसी को दे रही हैं और ये ध्यान रख रही हैं कि इसकी एक भी बूंद बर्बाद नहीं जाए, जिससे जब वो दस लोगों को वैक्सीन का इंजेक्शन लगा देती हैं तो उस वायल में एक डोज आराम से बची रह जाती है.

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साथ ही केरल में हर अस्पताल को एक तय मात्रा में ही कोरोना वैक्सीन की शीशी दी जा रही है और ये पूरी पड़ताल हो रही है कि उसका पूरा इस्तेमाल हो रहा है या नहीं. लोगों को एक खास वक्त बताया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उस समय पर मौजूद हों और तभी शीशियां खोली जाएं.

यह रहा प्रबंधन का तरीका

जब वैक्सीन की कोई शीशी खुलती है तो इसके 04 घंटे के भीतर 10 लोगों को खुराक देनी होती है. अगर ये 04 घंटे बाद भी इस्तेमाल नहीं हुई तो शीशी में बाकी बची खुराक निष्प्रभावी हो जाती है यानि बेकार हो जाती है. इसलिए जब स्वास्थ्य केंद्र पर 10 से कम लोग होते हैं तो उस दिन टीकाकरण स्थगित कर दिया जाता है.