मल्लिकार्जुन खड़गे पर जेटली का निशाना कहा- उनकी आदत है असहमत रहना

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे पर आरोप लगाया है कि वे हर बात से असहमत ही रहते हैं और यह उनकी आदत है। रविवार को जेटली ने एक ब्लॉग में कहा कि खड़गे ने सीबीआई निदेशक की नियुक्ति को एक राजनीतिक संघर्ष की तरह बताने का प्रयास किया। खड़गे ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर रिषि कुमार शुक्ला को नया सीबीआई निदेशक नियुक्त करने पर अपनी असहमति जतायी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि अधिकारी को भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की जांच का अनुभव नहीं है और कानून एवं उच्चतम न्यायालय के फैसलों का उल्लंघन करते हुए चयन के मानदंडों को कमजोर किया गया।

जेटली ने एक ब्लाग में लिखा है कि लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता खड़गे ने नये सीबीआई निदेशक की नियुक्ति में ‘एक बार फिर असहमति जतायी है। खड़गे नियमित रूप से असहमति जताते हैं।’

जेटली ने याद किया कि कांग्रेस नेता ने तब भी असहमति जतायी थी जब आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक नियुक्त किया गया था, तब भी असहमति जतायी थी जब वर्मा को स्थानांतरित किया गया और अब भी असहमति जतायी है जब शुक्ला की नियुक्ति की गई है। जेटली ने कहा, ‘सीबीआई निदेशक की नियुक्ति और स्थानांतरण को देखने वाली प्रधानमंत्री, भारत के प्रधान न्यायाधीश और विपक्ष के नेता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति में एकमात्र चीज जो लगातार स्थिर बनी हुई है वह है खड़गे की असहमति।’
इलाज के लिए पिछले महीने अमेरिका गए जेटली ने कहा, ‘खड़गे का लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद उन्हें समिति में बैठने का हकदार बनाता है लेकिन उस पद का राजनीतिक रंग बाहर छोड़ देना होता है।’

खड़गे ने सरकार द्वारा 1983 बैच के अधिकारी एवं मध्यप्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक शुक्ला को नया सीबीआई निदेशक नियुक्त करने की घोषणा के बाद कल शाम प्रधानमंत्री को दो पृष्ठों का एक पत्र भेजकर असहमति जतायी। जेटली ने कहा कि विपक्ष के नेता जब कालेजियम के एक सदस्य के तौर पर बैठते हैं तो वह अपने पद का राजनीतिक रंग छोड़ देते हैं, वैसे ही जैसे प्रधानमंत्री और भारत के प्रधान न्यायाधीश अपने अपने अधिकारक्षेत्र का प्राधिकार छोड़कर निदेशक की नियुक्ति केवल योग्यता और निष्पक्षता के मानदंड पर करने पर कार्य करते हैं।

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