#IsraelPalestineconflict क्या है ? आखिर क्यों फिलिस्तीन पर हमले कर रहा है इज़राइल…

Jerusalem
file

BY- Nirosha Singh

#IsraelPalestineconflict – इज़राइल और फिलिस्तीन का विवाद वैसे तो 100 साल पुराना है लेकिन विवाद की हालिया वजह इजराइल द्वारा शेख जर्राह (Sheikh Jarrah) को खाली कराया जाना है। शेख जर्राह पूर्वी येरुशलम का इलाका है। यह इलाका दोनों की सीमाओं पर है और यहां इजराइल फिलिस्तीनी परिवारों को निकालकर यहूदी लोगों को बसा रहा है। फिलिस्तीनी इसी का विरोध कर रहे हैं।

रमज़ान के आखिरी शुक्रवार को एकत्र हुए थे लोग

7 मई 2021 रमजान महीने का आखिरी शुक्रवार था। इस वजह से यरुशलम की मस्जिद अल-अक्सा में काफी तादाद में मुस्लिम लोग नमाज अदा करने इकट्ठा हुए थे। नमाज के बाद ये लोग शेख जर्राह को खाली कराए जाने के विरोध में प्रदर्शन करने लगे। ये विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया और इस दौरान इजराइली सेना और फिलिस्तीनियों के बीच झड़प हुई।

#IsraelPalestineconflict- रमजान में इज़राइल ने Damascus Gate पर बेरिकेडिंग लगाई

al aqsaa
Image credit-Twitter

यरुशलम में मुस्लिमों के पवित्र महीने रमजान के शुरू होने के बाद से ही इजराइली पुलिस और फिलिस्तीनियों के बीच झड़प की खबरें आ रही हैं। आम दिनों के मुकाबले रमजान में मस्जिद अल-अक्सा में आने वाले मुस्लिमों की संख्या ज्यादा होती है। इजराइली पुलिस ने यरुशलम शहर के दमास्कस गेट (Damascus Gate) पर बैरिकेडिंग कर दी थी। मुस्लिमों का कहना था कि ये उनकी धार्मिक स्वतंत्रता को रोकने की कोशिश है। बढ़ते विरोध को देखते हुए पुलिस ने वहां से बैरिकेडिंग हटा तो दी, लेकिन माहौल बिगड़ाने में ये भी एक प्रमुख वजह रही।

10 मई को होता है Jerusalem day

विवाद की एक और वजह येरुशलम-डे को भी बताया जा रहा है। दरअसल येरुशलम-डे 1967 के अरब-इजराइल युद्ध (Arab-Israeli War) में इजराइल की जीत के जश्न के तौर पर मनाया जाता है। इजराइल ने इस युद्ध को 6 दिन में ही जीत लिया था और पूर्वी येरुशलम पर कब्जा किया था। इस साल 10 मई को येरुशलम-डे मनाया गया।

#IsraelPalestineconflict- Western wall पर प्रार्थना करते हैं यहूदी

mosque al aqsa
image credit-Google

इस दिन इजराइली लोग येरुशलम में मार्च करते हुए वेस्टर्न वॉल तक जाकर प्रार्थना करते हैं। वेस्टर्न वॉल (Western wall) को यहूदियों का एक पवित्र स्थल माना जाता है। इस मार्च के दौरान भी हिंसक झड़पें हुईं। 10 मई को शेख जर्राह से 4 फिलिस्तीनी परिवारों को निकाले जाने के मामले में इजराइली सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी। बढ़ते विवाद को देखते हुए इसे भी टाल दिया गया है।

Jerusalem इतना विवादित क्यों है?

येरुशलम (Jerusalem) मुस्लिम, ईसाई और यहूदी (Muslims, Christians and Jews) तीनों धर्म मानने वाले लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। यहां अल-अक्सा मस्जिद (Al-Aqsa Mosque) है। मुस्लिमों का मानना है कि पैगंबर मोहम्मद मक्का से यहीं आए थे। इस मस्जिद के पास ‘डॉम ऑफ रॉक’ (‘Dome of rock’) भी है। मुस्लिमों के अनुसार यहीं से पैगंबर मोहम्मद ने स्वर्ग की यात्रा की थी। मक्का और मदीना के बाद मुस्लिम इसे तीसरी सबसे पवित्र जगह मानते हैं।

#IsraelPalestineconflict- The Church of the Holy Sepalkar समेत ये पवित्र स्थल

The Church of the Holy Sepalkar
Image credit-Google

येरुशलम (Jerusalem) में ईसाइयों का पवित्र ‘द चर्च ऑफ द होली सेपल्कर’ (‘The Church of the Holy Sepalkar’) भी है। दुनिया भर के ईसाइयों का मानना है कि ईसा मसीह को इसी जगह पर सूली पर चढ़ाया गया था और यही वह स्थान भी है, जहां ईसा फिर से जीवित हुए थे। येरुशलम में एक वेस्टर्न वॉल (Western wall) है। यहूदियों का कहना है कि यहां कभी उनका पवित्र मंदिर था और यह दीवार उसी की बची हुई निशानी है। यहीं पर यहूदियों की सबसे पवित्र जगह ‘होली ऑफ होलीज'(‘Holy of Holies’) है। यहूदी मानते हैं कि यहीं पर इब्राहिम ने अपने बेटे इसाक की कुर्बानी दी थी। यहूदियों का ये भी मानना है कि इसी जगह से विश्व का निर्माण हुआ था।

यह भी पढ़ें: https://www.indiamoods.com/israeli-attacks-continue-in-gaza-hideout-of-9-hamas-commanders-america-trying-to-reconcile/?fbclid=IwAR3LBqvX3-9xeLxGCQhsyOT2xPyORnQJkDSAieV6Fh8d_IVH2h91jcobRZs

तीन धर्म के लोगों की पवित्र स्थली है येरूशलम

bbc image
credit-bbc

येरुशलम तीनों धर्मों के पवित्र स्थलों के साथ-साथ विवाद की वजह भी है। 1967 के युद्ध में जीत के बाद इजराइल ने पूर्वी येरुशलम पर भी कब्जा कर लिया। इसी के बाद से इजराइल इस पूरी जगह को अपनी राजधानी मानता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इजराइल की इस बात को नहीं मानता। जबकि फिलिस्तीनी लोगों का कहना है कि फिलिस्तीन के एक स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद ये उनकी राजधानी होगी।

#IsraelPalestineconflict- Palestine की मांग क्या है?

फिलिस्तीन (Palestine) का कहना है, इजराइल 1967 से पहले की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक वापस लौट जाए और वेस्ट बैंक तथा गाजा पट्टी में स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र की स्थापना हो। साथ ही इजराइल पूर्वी येरुशलम से अपना दावा छोड़े, क्योंकि फिलिस्तीन आजाद होने के बाद उसे अपनी राजधानी बनाना चाहता है।

इजराइल का क्या कहना है?

Hamas

फिलिस्तीन (Palestine) की मांगों को इजराइल सिरे से नकारता आ रहा है। इजराइल यरुशलम से अपना दावा छोड़ने को राजी नहीं है। उसका कहना है कि यरुशलम हमारी राजधानी है और ये इजराइल का अभिन्न अंग है।

#IsraelPalestineconflict-दोनों के बीच किन इलाकों को लेकर विवाद है?

West Bank: वेस्ट बैंक इजराइल और जॉर्डन के बीच में है। इजराइल ने 1967 के युद्ध के बाद इसे अपने कब्जे में कर रखा है। इजराइल और फिलिस्तीन दोनों ही इस इलाके को अपना बताते हैं।

Israel
Gaza_ गज़ा पट्टी इजराइल और मिस्र के बीच में है। यहां फिलहाल हमास (Hamas) का कब्जा है। ये इजराइल विरोधी समूह है। सितंबर 2005 में इजराइल ने गाजा पट्‌टी से अपनी सेना को वापस बुला लिया था। 2007 में इजराइल ने इस इलाके पर कई प्रतिबंध लगा दिए।
यह भी पढ़ें:इज़राइल- फिलीस्तीन की लड़ाई तेज़, एक दूसरे की सीमा पर रॉकेट दागे, गज़ा सिटी में फिर 2014 जैसे हालात

Golan Heights

राजनीतिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ये इलाका सीरिया का एक पठार है। 1967 के बाद से ही इस पर इजराइल का कब्जा है। इस इलाके में कब्जे के विवाद को लेकर कई बार शांति वार्ता की कोशिशें हो चुकी हैं, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

दोहरी नीति भी विवाद की वजह

1967 में पूर्वी येरुशलम (Jerusalem) पर कब्जे के बाद से ही इजराइल यहां पैदा होने वाले यहूदी लोगों को इजराइली नागरिक मानता है, लेकिन इसी इलाके में पैदा हुए फिलिस्तीनी लोगों को कई शर्तों के साथ यहां रहने की अनुमति दी जाती है। इसमें एक शर्त ये भी है कि एक निश्चित अवधि से ज्यादा येरुशलम से बाहर रहने पर उनसे ये हक छीन लिया जाएगा। इजराइल की इस नीति को कई ह्यूमन राइट्स ग्रुप भेदभाव वाली नीति बताते हैं, लेकिन इजराइल हमेशा से इन आरोपों को नकारता आया है।

कितना पुराना है ये #IsraelPalestineconflict

ये संघर्ष कम से कम 100 साल पहले से चला आ रहा है। फिलहाल जहां इजराइल है, वहां कभी तुर्की का शासन था जिसे ओटोमान साम्राज्य कहा जाता था। 1914 में पहला विश्व युद्ध शुरू हुआ। तुर्की ने इस विश्व युद्ध में मित्र राष्ट्रों के खिलाफ वाले देशों का साथ दिया। मित्र राष्ट्रों में ब्रिटेन भी शामिल था। लिहाजा तुर्की और ब्रिटेन आमने-सामने आ गए। उस समय ब्रिटिश साम्राज्य अपने चरम पर था जिसका नतीजा ये हुआ कि ब्रिटेन ने युद्ध जीता और ओटोमान साम्राज्य ब्रिटेन के कब्जे में आ गया।

ब्रिटेन ने यहूदियों के लिये बसाया फिलिस्तीन

Al aqsa
credit-Twitter

इस समय तक जियोनिज्म की भावना चरम पर थी। ये एक राजनीतिक विचारधारा थी जिसका उद्देश्य एक अलग और स्वतंत्र यहूदी राज्य की स्थापना करना था। इसी के चलते दुनियाभर से यहूदी फिलिस्तीन में आने लगे। 1917 में ब्रिटेन के विदेश सचिव जेम्स बेलफोर (Britain’s Foreign Secretary James Belfor) ने एक घोषणा की जिसमें कहा गया कि ब्रिटेन फिलिस्तीन को यहूदियों की मातृभूमि बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

ब्रिटेन पर था ये दबाव

साल 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध खत्म हुआ। इस युद्ध में ब्रिटेन को काफी नुकसान हुआ और अब वो पहले जैसी शक्ति नहीं रहा। इधर यहूदी फिलिस्तीन में आते रहे और दूसरे देशों ने ब्रिटेन के ऊपर यहूदियों के पुनर्वास के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया। आखिरकार ब्रिटेन ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया और ये मसला यूनाइटेड नेशन के पास चला गया, जो कि 1945 में ही बना था। 29 नवंबर 1947 को यूनाइटेड नेशन ने फिलिस्तीन को दो हिस्सों में बांट दिया। एक अरब राज्य और दूसरा हिस्सा बना इजराइल। यरुशलम को यूनाइटेड नेशन ने अंतरराष्ट्रीय सरकार के कब्जे में रखा।

यह भी पढ़ें: #Israel Palestine Conflict-गज़ा में इज़राइली सेना ने मार गिराया हमास का टॉप कमांडर

#IsraelPalestineconflict-फिलिस्तीन और अरब देशों का बंटवारा

अरब देशों ने यूएन के इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि आबादी के हिसाब से उन्हें कम जमीन मिली। दरअसल बंटवारे के बाद फिलिस्तीन को जमीन का आधे से भी कम हिस्सा मिला, जबकि बंटवारे के पहले करीब 90% जमीन पर अरब लोगों का कब्जा था। इसी के अगले साल इजराइल ने खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया। अमेरिका ने फौरन एक देश के रूप में इजराइल को मान्यता दे दी। इसके बाद अरब देशों और इजराइल में कई युद्ध हुए। इजराइल ने हर युद्ध में अरब देशों को मात दी।

Input also from -News Agency/Google