Israel Palestine Conflict- हमास पॉलिटिकल पार्टी या आतंकी संगठन ?

Israel Palestine Conflict
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Israel Palestine Conflict- इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच जंग जारी है। जंग दरअसल फिलिस्तीन के सत्तारूढ़ संगठन हमास से है, जिसे इज़राइल आतंकी संगठन मानता है। यह संगठन प्रतिबंधित भी है। यह अरबी शब्द है और हमास का अर्थ होता है, ‘जोश’। 1970 के दिनों में इसके Activist मिस्र में Muslim Brotherhood से जुड़े थे। गज़ा पट्टी में ये लोग मस्जिदों में रहते, और वेस्ट बैंक में इनकी गतिविधियां विश्वविद्यालयों में नज़र आतीं।

Israel Palestine Conflict

दिसंबर, 1987 में गाज़ा पट्टी में इज़राइली कब्जे के विरुद्ध पहला विद्रोह हुआ। उन्हीं दिनों हमास की बुनियाद रखी गई। 1988 में हमास ने अपने चार्टर में उल्लेख किया कि अपने इस्लामिक होमलैंड को किसी ग़ैर मुस्लिम सियासत के आगे सरेंडर नहीं करेंगे, धर्मयुद्ध लड़ेंगे। इससे उलट, फिलिस्तीन लिबरेशन आर्गेनाइजेशन (पीएलओ) ने उसी साल 8 दिसंबर, 1988 को इज़राइल को मान्यता दी थी।

तेहरान में हमास पाॅलिटिकल ब्यूरो

1989 के दौरान अम्मान, जार्डन और तेहरान में हमास ने पाॅलिटिकल ब्यूरो कार्यालय खोले। हमास ने ‘इज्जअल-दीन अल-क़सम’ जैसा हथियारबंद ग्रुप बनाया। 1999 में जार्डन से बनी नहीं, तो हमास लीडरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। 2001 में सीरिया की राजधानी दमिश्क में हमास ने पाॅलिटिकल ब्यूरो खोला। सीरिया में असद सरकार पर मुसीबतें आईं, तो हमास के लोग क़तर की राजधानी दोहा शिफ्ट कर गये।

हमास के संस्थापक शेख़ अहमद यासीन

22 मार्च, 2004 को गाज़ा में इज़राइली गनशिप ने हमास के संस्थापक शेख़ अहमद यासीन को मार गिराया। इस घटना के बाद हमास ने बीच का रास्ता अख्तियार किया। अब वे द्विराष्ट्र सिद्धांत मानने को तैयार थे। 1967 से पहले सीमा की जो स्थिति थी, वह भी स्वीकार कर लिया। 2005 के आरंभ में अरियल शेरोन ने कुछ फिलस्तीनी इलाकों से इज़राइली फोर्स हटाये, और युद्ध विराम की घोषणा हुई।

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25 जनवरी, 2006 को 132 सदस्यीय फिलस्तीनी लेजिस्लेटिव कौंसिल (पीएलसी) के चुनाव हुए। 16 संसदीय क्षेत्रों में हुए चुनाव में 74 सीटें हमास ने जीतीं। इस आम चुनाव से दशक भर पहले, Oslo-Two Agreement के ज़रिये 20 जनवरी, 1996 को पीएलसी का चुनाव हुआ था, जिसका हमास ने बहिष्कार किया था। उस समय 88 सीटों वाली संसद में फतह पार्टी को 62 सीटें मिली थीं।

फतह पार्टी को वेस्ट बैंक और गाजा, जिसे ‘एरिया-ए’ कहा गया, वहां के सिविल व आंतरिक सुरक्षा के अधिकार दिये गये। ‘एरिया-बी’ में भी सिविलियन मामले देखने तक फतह को सीमित किया गया। बाक़ी ‘एरिया-बी’ में सुरक्षा इजराइल के ज़िम्मे था और ’एरिया-सी’ को पूर्णतः इज़राइल के नियंत्रण वाला क्षेत्र घोषित किया गया।

हमास और फतेह पार्टी

मगर, 2006 के चुनाव के बाद हमास और फतेह पार्टी में खटपट शुरू हुई। दोनों में सत्ता बंट गई। रामल्ला केंद्रित वेस्ट बैंक की सियासत महमूद अब्बास की फतेह पार्टी देखने लगी, जो वहां के राष्ट्रपति घोषित किये गये। 14 जून, 2007 से गाज़ा पट्टी की सत्ता हमास के हाथों में है, उसके प्रधानमंत्री हैं इस्माइल हानिया। पीएलसी (संसद) वहीं की वहीं है, जहां 132 सदस्यीय निचले सदन में हमस को 74, और प्रतिपक्ष को 58 सीटें हासिल हैं। 22 मई, 2021 को फिलस्तीनी संसदीय चुनाव की तारीख़ तय है। ऐसे माहौल में पीएलसी चुनाव की बात ही बेमानी है।

कतर, हमास की सबसे बड़ी आर्थिक ताक़त

हमास की राजनीतिक गतिविधियों के हवाले से कोई भी पूछेगा, यह एक निर्वाचित सरकार की हैसियत से इज़राइल के विरूद्ध लड़ रहा है, या उसे आतंकी संगठन ही मान लिया जाए? कतर, हमास की सबसे बड़ी आर्थिक ताक़त है। 2012 में क़तर के अमीर शेख़ हमद बिन ख़लीफा अल-थानी स्टेट विजिट के वास्ते गाज़ा पट्टी आये। ख़लीफा अल-थानी ने हमास को 1.8 अरब डाॅलर की मदद देने की घोषणा की।

Israel Palestine Conflict

अरब लीग, ट्यूनिशिया हमास की सरपरस्ती करते रहे। हमास प्रधानमंत्री इस्माइल हानिया को हर संभव सहायता का ऐलान तुर्की के राष्ट्रपति रिज़ेब तैयप एर्दोआन ने किया है। जर्मनी समेत यूरोप के कई देशों में सक्रिय एनजीओ हमास को पैसे भेज रहे हैं। हमास के पास आठ से 10 हज़ार राॅकेटों का जो ज़ख़ीरा है, उसमें ईरान का सबसे बड़ा योगदान है। ये राॅकेट मिस्र व सूडान के बरास्ते गाज़ा पट्टी पहुंचाये गये। लेबनान में ‘हिज़बुल्ला’, यमन के ‘होथी’ लड़ाके, हमास की मदद आड़े वक्त करते रहे।

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