हर चीज़ में दिखती है कमी, कहीं ‘मिसिंग टाइल सिंड्रोम’ तो नहीं….

कहते हैं जीवन में कमियां ही कमियां देखने वाली सोच बाकायदा एक बीमारी  है, साइकोलोजिस्ट इसे ‘मिसिंग टाइल सिंड्रोम’ कहते हैं। जिसमें इनसान का ध्यान सिर्फ कमी की ओर रहता है। हैप्पीनेस इज़ अ सीरियस प्रॉब्लम – अ ह्यूमन नेचर रिपेयर मैनुअल के लेखक डेनिस प्रेगर के मुताबिक ‘उन चीजों पर ध्यान देना जो हमारे जीवन में नहीं है, आगे चल कर हमारी ख़ुशी को चुराने का सबसे बड़ा कारण बन जाती हैं।

जीने की नज़रिया बदलें

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‘मिसिंग टाइल सिंड्रोम’ के चलते जिंदगी में अगर कमियां ही कमियां दिखती हैं तो आप अपनी खुशियों से खुद दूरी बना रहे हैं |  जो मिसिंग है उसकी बजाय जो कुछ मौजूद है, आपके हिस्से है, उसे देखने-जीने का नज़रिया आपके सुख को मल्टीप्लाई कर सकता है | खुशियों को कई गुना बढ़ाकर आपकी झोली में डाल सकता है क्योंकि सुख जीवन के कई अनदेखे-अनजाने पहलुओं से भी जुड़ा होता है | इसीलिए जिंदगी को कमियों के साथ नहीं बल्कि कंप्लीटनेस के साथ देखिये | इतनी भर कोशिश कीजिये और उस सुख को भी अपनी खुशियों में जोड़ लीजिये जो सिर्फ सुविधाओं की भीड़ से नहीं मिलता | ऐसी कई खुशियां जिंदगी में जो मिला है, उसे लेकर संतुष्ट होने की सोच से मिलती हैं |

किसी से कॉम्पीटीशन नहीं

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जो है, जितना है उसे लेकर मन में संतुष्टि हो तो सोच और व्यवहार दोनों ही मोर्चों पर आप संवेदनशील बनते हैं | किसी से कोई ईर्ष्या नहीं | कोई प्रतिस्पर्धा नहीं | अपनी सोच और समझ आगे बढ़ते रहने के चलते आप बेहतरी की ओर ही बढ़ते हैं | दूसरों के प्रति सेंसिटिव होना खुद अपने आपको को भी दिली खुशी देता है | यूं भी किसी के अमन को ठेस पहुँचाकर खुद खुश नहीं जा सकता | देखने में आता है कि जो लोग खुद अपनी जिंदगी में हरदम खामियाँ ही देखते हैं उनके बिहेवियर में दूसरों के प्रति भी कटुता आ जाती है | अपनी चाहतों, जरूरतों और ज़िंदगी की हकीकत की मिली-जुली तस्वीर में जो खुशियों के रंग नहीं भरते वे संवेदनशील होने के सुख को नहीं जी पाते | जबकि संवेदनशीलता का भाव सराहना, सहजता और सहानुभूति का पूरा पैकेज है |

शुक्रिया ज़िंदगी

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जीवन में मिली अच्छी चीजों और स्नेहभरे रिश्तों के लिए शुक्रगुजार होना सीखिये | यहाँ तक कि अपने आलोचकों और नाकामयाबियों को भी शुक्रिया कहिए | क्योंकि जीवन से जुड़ी हर खट्टी-मीठी बात इस सफर को खास बनाती है | सेल्फ इमप्रूवमेंट में मददगार बनती हैं | हाँ, इन चीजों से जुड़ी बातों में सिर्फ कमियाँ देखना सही नहीं है | हर उतार-चढ़ाव को धन्यवाद देना सीखें जो आगे बढ़ते हुये आपको मिले हैं | यह सोच तकलीफ़ों में भी खुशियाँ ढूंढना सीखा देगी | जिंदगी में मिली नेमतों के प्रति शुक्रगुजार होने का सुख खुशियों को कई गुना बढ़ा देता है |

ठहराव है ज़रूरी

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जिंदगी को जब अगर कंप्लीटनेस के साथ देखा जाता है तो दिलो-दिमाग को सुकून मिलता है | जिंदगी में खामियाँ निकालने से पहले सोचिए कि हो सकता है किसी और के पास इतना सब भी ना हो | किसी और के जीवन का सफर आपसे कहीं ज्यादा मुश्किल रहा हो | खुश रहने और खुशियों को मल्टीप्लाई करने का यह फ़ोर्मूला हमेशा मन को शांत और सहज रखता है | जिंदगी एक सफ़र के समान ही है | इसके खूबसूरत पड़ावों को जीने के लिए जरा रुकना भी होता है | ठहरकर सोचना और समझना भी होता है कि कितना खूबसूरत सफ़र रहा है आपका | सब कुछ पा लेने के इरादे से जिंदगी की रफ्तार तो बनी रहती है पर कई सुंदर पड़ाव मिस हो जाते हैं | यह ठहराव तभी संभव है जब खुद की जिंदगी को लेकर संतुष्टि का भाव मन में हो | ऐसे सुखद ठहराव को जीने के लिए अपनी झोली में आई खुशियों को देखें ना कि कमियों को |

खुशी बांटें

जिंदगी के हर पहलू को लेकर नाखुशी रखना रिश्तों से जुड़ी खुशियों को जीने में भी बाधा बनता है | अपनों के साथ को जीना है तो जो आपको मिला है, उसे लेकर मन में तसल्ली होना जरूरी है | यह समझना जरूरी है कि सिर्फ कमियों के बारे में सोचकर अपनों स्नेह ना तो पाया जा सकता है और ना ही उनके साथ प्यार से जिया जा सकता है | अपनों के साथ से मिलने वाले संबल को जी भरकर जीना है तो जिंदगी को पूर्णता के साथ देखिये | जिसमें कुछ छूटा है तो बहुत कुछ आपके साथ भी है | यही सोच खुशी की वो राह है जिसपर चलते हुये अपनों से जुड़ी खुशियाँ कई गुना बढ़ जाती हैं | उस सुख को जिया जा सकता है जो कमियों के बारे में सोचते हुये कभी नहीं मिल सकता |