26 महीने तक मंगल की धरती पर रहेगा नासा का ‘ इनसाइट लैंडर’

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का रोबोटिक ‘ इनसाइट लैंडर’  बीती रात करीब डेढ़ बजे (भारतीय समयानुसार) मंगल ग्रह पर उतारा गया. जानकारी के अनुसार मंगल के लिए भेजे गये इस नये रोबोट को लैंडिंग में सात मिनट का वक्त लगा. इंसाइट मिशन का मुख्‍य लक्ष्य मंगल के जमीनी के साथ-साथ आंतरिक भागों का अध्ययन करना है. पृथ्वी के अलावा यह एक मात्र ऐसा ग्रह है जिसकी नासा इस तरह जांच करने जा रहा है.

बताया जा रहा है कि इसकी लैंडिंग जब हो रही थी तो स्थिति बेहद तनावपूर्ण थे. यानी इस सात मिनट के वक्त में सबकी नजरें अंतरिक्ष यान पर थी जो धरती पर संदेश भेज रहा था. जब इंसाइट ने मंगल पर सुरक्षित तरीके से  लैंड किया तो कैलिफ़ोर्निया में नासा के मिशन कंट्रोल में बैठे सभी लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गयी. खबरों की मानें तो इस यान ने एलिसियम प्लानिशिया नामक सपाट मैदान में लैंड किया है जो इस लाल ग्रह की भूमध्य रेखा के करीब है.

क्या है इंसाइट लैंडर का काम, आप भी जानें
इंसाइट मंगल ग्रह के बारे में ऐसी जानकारियां साझा कर सकता है, जो अरबों सालों से नहीं मिली हैं. अपने अभियान के दौरान यह यान मंगल पर एक साइज़्मोमीटर स्थापित करेगा जो इसके अंदर की हलचलें रिकॉर्ड करने का काम करेगा. यान यह पता लगाने का प्रयास करेगा कि मंगल के अंदर कोई भूकंप जैसी हलचल होती भी है या नहीं. यह पहला यान है जो मंगल की खुदाई करके उसकी रहस्यमय जानकारियां जुटाने का प्रयास करेगा. यही नहीं एक जर्मन उपकरण भी मंगल की जमीन के पांच मीटर नीचे जाकर उसके तापमान के संबंध में जानकारी एकत्रित करेगा. इसके तीसरे प्रयोग में रेडियो ट्रांसमिशन का इस्तेमाल होगा जिससे यह बता चलेगा कि यह ग्रह अपनी धुरी पर डगमगाते हुए कैसे चक्कर लगाता है.

जमीन से तमाम आतंरिक जानकारियों को जुटाकर भेजेगा? 

इनसाइट में मौजूद उपकरण का काम मंगल ग्रह पर इनसाइट की लोकेशन बताकर नासा तक पहुंचाना है. ये वही साधारण तकनीक है, जो स्मार्टफोन में मौजूद होती है. इसका काम सूर्य की कक्षा से गुजरने के दौरान नॉर्थ पोल कितना डगमगाता है, इसकी जांच करना. इसके साथ ही इसकी रोबोटिक आर्म मंगल की धरती से सामान उठाएगा. जबकि HP3 ऐसा उपकरण है, जो गर्मी के बहाव और फिजिकल प्रॉपर्टी की जांच करेगा.

मंगल पर मौजूद गर्मी की जानकारी के लिए सतह से करीब 5 मीटर नीचे तक एक स्केल डाला जाएगा. जो अंदर मौजूद गर्मी का डेटा जमा करेगा. जबकि SEIS यानि सिस्मोमीटर मंगल पर आने वाले भूकंप से पैदा होने वाली लहरों और उल्का पिंड के असर की जांच करेगा.

मंगल ग्रह को जानकारी देने के लिए करीब 16 अंतरिक्ष यानों को उतारा या उतारने की कोशिश की गई. ऐसा करने वालों में सिर्फ तीन मुल्क शुमार रहे. इनमें रूस, अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम का नाम है. इन यानों में 4 मिशन क्रैश और 2 मिशन फेल रहे.

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