Infiltration of AAP in Himachal- पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष मनीष ठाकुर ने छोड़ी पार्टी, AAP का दामन थामा

MANISH THAKUR

Infiltration of AAP in Himachal-हिमाचल प्रदेश में युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मनीष ठाकुर ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. पार्टी में लंबे समय से उपेक्षा के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है. उन्होंने दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सदस्यता ले ली है. मनीष ठाकुर रोहड़ू से संबंध रखते हैं और पूर्व दिवंगत सीएम वीरभद्र सिंह से उनका 36 का आंकड़ा रहा था. सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मनीष ठाकुर ने लिखा कि पिछले 25 वर्षों के राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष के बावजूद आज मैं कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहा हूं.

मनीष ठाकुर सहित 23 अन्य युवा नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई

आम आदमी पार्टी के हिमाचल प्रदेश के चुनाव प्रभारी और दिल्ली के कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन ने हिमाचल प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष मनीष ठाकुर सहित 23 अन्य युवा नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई. आप में यूथ कांग्रेस के साजिद अली, अत्तर कपूर, राकेश ठाकुर, गौरव ठाकुर, जय लाल शर्मा, गौरव बंचैक, भानु शर्मा, ईशान ओहरी, सुधीर सुमन, जसवीर सिंह, विवेक जसवाल, मनोज शर्मा, जगपाल चौहान, पदम नेगी, पंकज सिंगला, प्रवेश शर्मा, रितेश मेहता, राधेश्याम, रोनी घेड़ा, अनीश राठौर, विशाल दुरी, चेतन चौहान व सागर क्लांटा शामिल हुए.

Infiltration of AAP in Himachal

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Infiltration of AAP in Himachal

मनीष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जिस मकसद और सोच के साथ मैंने और मेरे हजारों साथियों ने इस संघर्ष में योगदान दिया है, उस संघर्ष को बड़े नेताओं की राजनीतिक तानाशाही और संगठन के भीतर मौजूद चाटुकारों ने खोखला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. आज संगठन में सिर्फ और सिर्फ खास नेताओं की पसंद के लोगों की फौज रह गई है और जिसकी वजह से संगठन की यह दुर्गति हुई है. मनीष ठाकुर ने कहा कि हिमाचल कांग्रेस में संगठन के उच्च पदों पर बैठे पदाधिकारियों के गैर जिम्मेदार रवैये के कारण पार्टी के युवा कार्यकर्ता आहत हैं. इन नेताओं ने कांग्रेस को अपने घर की जागीर बना कर रखा है.

AAP की नजरें अब अन्य राज्यों के साथ Himachal पर

पंजाब के विधानसभा चुनावों में प्रचंड जीत (Punjab AAP win) के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) की नजरें अब अन्य राज्यों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश (Himachal pradesh) पर भी हैं. पार्टी इस पहाड़ी राज्य में आगामी चुनाव को देखते हुए जमीनी स्तर पर काम में जुट गई है. पार्टी ने बीजेपी और कांग्रेस के स्थानीय स्तर के प्रभावशाली नेताओं को अपने पाले में खींचने की कवायद शुरू कर दी है. पार्टी की टीमें जिलेवार दौरा कर रही हैं. अपनी-अपनी पार्टी से असंतुष्ट नेताओं की लिस्ट बनाकर उनसे बातचीत की जा रही है. मुमकिन है कि इनमें से कई नेता जल्द ही अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की पार्टी की झाड़ू थाम सकते हैं. आप के तेवर देख कांग्रेस ही नहीं, बीजेपी में भी चिंता बताई जा रही है.

Infiltration of AAP in Himachal

पंजाब की जीत से उत्साहित आम आदमी पार्टी ने हाल ही में ऐलान किया था कि वह हिमाचल प्रदेश में न सिर्फ आगामी नगर निगम चुनाव लड़ेगी बल्कि इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव (Himachal Assembly elections) में भी उतरेगी. इसकी तैयारी के लिए आप के वरिष्ठ नेताओं ने हिमाचल में पार्टी का आधार मजबूत करने के लिए दौरे शुरू कर दिए हैं. पार्टी सूत्रों से पता चला है कि दिल्ली की टीमें कांगड़ा और निचले हिमाचल के जिलों की यात्राएं कर रही हैं. इस दौरान वह उन नेताओं से मुलाकात कर रही हैं, जो आप में शामिल होने के इच्छुक हैं.

भाजपा और कांग्रेस के कई असंतुष्ट नेता आप की इन टीमों से मुलाकात कर चुके हैं

आप ने स्थानीय तौर पर रसूख रखने वाले कई नेताओं की लिस्ट बनाई है. उन्हें इंटरव्यू के लिए भी बुलाया जा रहा है. पार्टी सूत्रों का दावा है कि भाजपा और कांग्रेस के कई असंतुष्ट नेता आप की इन टीमों से मुलाकात कर चुके हैं. इनमें से कई नेता केजरीवाल के हिमाचल दौरे के वक्त आप में शामिल हो सकते हैं. ऐसे लोगों में कांगड़ा से प्रमुख नेता नरेश वरमानी भी शामिल हैं. हालांकि पार्टी की तरफ से इन लोगों के नाम गुप्त रखे जा रहे हैं. पार्टी चाहती है कि आप संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की यात्रा के दौरान ही इन लोगों के नाम सबके सामने आएं.

Infiltration of AAP in Himachal

आप के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि बीजेपी और कांग्रेस की इस वक्त कमजोरियां साफ दिख रही हैं. पहाड़ के लोगों को एक मजबूत विकल्प की तलाश है. पार्टी का मानना ​​है कि मौजूदा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार से लोग खुश नहीं हैं. ऐसे में आप को सत्ता विरोधी लहर का फायदा मिल सकता है. दूसरी तरफ कांग्रेस गंभीर अंदरूनी कलह से जूझ रही है. पार्टी नेतृत्व तक पर सवाल उठ रहे हैं. कांग्रेस राज्य में अपने वरिष्ठ नेता वीरभद्र सिंह और जीएस बाली से पहले ही हाथ धो चुकी है. निचले हिमाचल में गुटबाजी ने पार्टी को पस्त कर रखा है. ऐसे में AAP इनकी जगह की भरपाई कर सकती है.पार्टी के एक नेता का कहना था कि अगर हम चुनावों में नंबर 1 न बने, तब भी कम से कम हम प्रभावी विपक्ष बनने की कोशिश तो कर ही सकते हैं. आप का ये मिशन बीजेपी और कांग्रेस से लिए चिंता का विषय बन सकता है.