जम्मू में 3 हजार कश्मीरी यात्रियों की सेना ने की 3 दिन तक सेवा, सुरक्षित श्रीनगर पहुंचाया

kashmiri pilgrims

जम्मू में 3 हज़ार कशमीरी यात्री उस वक्त फंस गये जब पुलवामा हमले के बाद घाटी में कर्फ्यू के हालात बन गए। अब इन यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा सेना पर आ गया। बात चाहे जांबाज़ी की हो या शौर्य की, भारतीय सेना का जवाब नहीं। घाटी हो या देश का कोई हिस्सा… चाहे बाढ़ आए या तूफान या कोई आपदा, सेना सब संभाल लेती है और खुद को अव्वल साबित करती रहती है। इस बार भी जम्मू-कश्मीर में सेना ने कुछ ऐसा काम किया कि स्थानीय कश्मीरी भी वाह-वाह कह उठे। सबको पता है कि पुलवामा में 14 फरवरी को आत्मघाती हमले के बाद घाटी में बेहद संवेदनशील माहौल है। लोग डरे हुए हैं।  सुरक्षा बल अलर्ट मोड में हैं। घाटी में बेहद चौकसी बरती जा रही है और इस बीच सेना का मानवीय मिशन भी जारी है। वह मिशन है घाटी के लोगों को सुरक्षित रखने का। उन्हें मदद मुहैया कराने का, सरहद के साथ-साथ उनकी हिफाज़त का।

ARMY-JAMMU-AND-KASHMIR

कानून व्यवस्था और आतंकी गतिविधियों की आशंकाओं  के चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग कुछ समय से लगातार बंद है। अब ऐसे हालात में करीब तीन हजार से ज्यादा यात्री जम्मू में ही फंस गए। इसमें अधिकांश कश्मीरी यात्री शामिल थे। समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के मुताबिक भारतीय सेना से लोगों की परेशानी देखी नहीं गई तो सभी के रात में ठहरने का पहले इंतजाम किया और फिर सभी तीन हजार से अधिक यात्रियों को सेना ने भोजन कराया. इसके बाद सभी को जम्मू से श्रीनगर भेजने के लिए परिवहन की व्यवस्था की. खुद इस बात की पुष्टि रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने की. प्रवक्ता ने कहा,‘‘पिछले एक हफ्ते में, सेना ने जम्मू शहर में बड़ी संख्या में फंसे हुए यात्रियों की मदद की.

उन्होंने स्थानीय लोगों के सहयोग से भोजन और स्थान उपलब्ध कराकर रात में रुकने का इंतजाम और श्रीनगर जाने के लिए परिवहन की व्यवस्था कर उनकी भरपूर मदद की.”    सेना ने उन्हें तीन दिनों तक खाद्य आपूर्ति की. तीन दिन तक सेना की मेजबानी में आवभगत देखकर यात्री निहाल हो उठे और उन्होंने धन्यवाद दिया. उधर जम्मू डिफेंस के पीआरओ ने बताया कि सेना लगातार यात्रियों की मदद में जुटी है. उन्हें खाना, ठहरने का स्थान और परिवहन साधन उपलब्ध कराया जा रहा है. स्थानीय प्रशासन का भी इसमें सहयोग लिया जा रहा है. मदद लगातार जारी रहेगी

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