शरीर में ही नहीं शादी के बाद जीवन में भी आते हैं अहम बदलाव, ऐसे संभालें अपना नवजीवन

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शादी के बाद लड़का हो या लड़की सबके जीवन में कुछ अहम बदलव आते हैं। शारीरिक बदलाव हार्मोनल होते हैं जबकि Marriage के बाद रिश्तों में बंधने वाले बदलाव भी बेहद अहम होते हैं। इनका हर किसी के मन पर गहरा असर पड़ता है। आजकल शादी का सीज़न चल रहा है, ज़रूर पढ़ें कि कैसे अपने नये- नये दांपत्य जीवन की डोर समझदारी के साथ थामें….

शादी के बाद ऐसे संभालें गृहस्थी

बंधन में तो बंध गये लेकिन यह भी जान लें कि शादी के बाद जिम्मेदारियों में बढ़ोतरी होने के साथ साथ जीवन का मतलब समझ में आने लगता है.  एक दूसरे को समझना बड़ी बात हो जाती है क्योंकि शादी से दो लोगों का रिश्ता एकदम बदल जाता है. इतना ही नहीं एक दूसरे के प्रति जिम्मेदारियां बढ़ती हैं और एक दूसरे को समझने का तरीका भी बदल जाता है.

आप सब कुछ शेयर कर सकते हैं

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रिश्तों का दायरा बढ़ता है और जब  दो लोग एक साथ आते हैं तो मैं की बजाय हमारा कॉन्सेप्ट आ जाता है. सब चीजें दोनों के इर्द गिर्द ही घूमती हैं और तकलीफें, समस्याएं आदि एक-दूसरे के साथ शेयर होती हैं. ऐसे में शुरू -शुरू में एक दूजे के अंदर खामियां या खूबियां पता चलती हैं. उलझनें, मतभेद भी हो सकते हैं लेकिन हर एक बात पर उचित डिस्कशन किया जा सकता है.

शादी के बाद तनाव न पालें, खुश रहें

नये दांपत्तय जीवन में तनाव हो सकता है लेकिन याद रखें कि ऐसे पल जीवन में आते रहते हैं और ये जीवन का हिस्सा भी होते हैं. तनाव के दौरान एक-दूसरे का सहारा बनें. दोनों पार्टनर एक-दूसरे के साथ मिलकर चलें, इससे बेहतर शायद कोई दूसरी चीज नहीं हो सकती है. बुरा वक्त भी है तो से मिलकर झेलें।

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भावनाओं को समझें

मैरिड लाइफ में सेक्स के अलावा भी एक दूसरे की भावनाएं समझने की ज़रूरत होती है। फिजिकल अट्रेक्शन जल्द खत्म हो जाता है लेकिन एक-दूसरे में आत्मीयता का एहसास कराएंगे तो जीवन खुशनुमा होगा. बातचीत और क्वालिटी समय एक साथ बिताने के अलावा कई तरह की चीजें एक साथ करने से एक दूसरे के प्रति लगाव बढ़ता है. अगर शॉपिंग के लिये जा रहे हैं तो एक -दूसरे को पार्टनर ही सबसे बेस्ट कम्पनी दे सकता है. वहीं आपकी बात को समझना भी आसान होता है कि क्या खरीद सकते हैं और किस चीज को नजर अंदाज करना है.

शादी के बाद खुलकर बात करें बच्चा चाहिये

शादी के बाद फैमिली प्लानिंग में भी एक दूसरे की भावनाओं का ख्याल रखें। अगर कोई एक तैयार नहीं है तो उसे बातचीत से हल करें। इस मुद्दे पर खुलकर बात करें, बहस नहीं।